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कैप्सूल से कस्टमाइज्ड न्यूट्रीशन तक: हेल्थ इंडस्ट्री में बदलाव

None 2026-02-11 07:33:31
कैप्सूल से कस्टमाइज्ड न्यूट्रीशन तक: हेल्थ इंडस्ट्री में बदलाव

न्यूट्रास्यूटिकल डिलीवरी में बदलाव, नए फॉर्मेट्स की बढ़त

गमी से 3डी प्रिंट तक, न्यूट्रीशन प्रोडक्ट्स का विस्तार

हेल्थ सप्लीमेंट्स में डिलीवरी फॉर्मेट्स का नया दौर


न्यूट्रास्यूटिकल सेक्टर में डिलीवरी फॉर्मेट्स तेजी से बदल रहे हैं।
गमी, पाउडर, ड्रिंक्स और कस्टमाइज्ड सॉल्यूशंस की मांग बढ़ी है।
हेल्थ सप्लीमेंट इंडस्ट्री में पारंपरिक टैबलेट और कैप्सूल के साथ नए डिलीवरी फॉर्मेट्स सामने आ रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल और कंज्यूमर जरूरतों के चलते कंपनियां नए विकल्प पेश कर रही हैं

📍 New Delhi ✍️ Dr. Sanjay Agarwal

न्यूट्रास्यूटिकल इंडस्ट्री का मौजूदा परिदृश्य

न्यूट्रास्यूटिकल इंडस्ट्री में पिछले कुछ वर्षों में तेज बदलाव दर्ज किए गए हैं। पहले जहां सप्लीमेंट्स मुख्य रूप से टैबलेट और कैप्सूल तक सीमित थे, वहीं अब डिलीवरी फॉर्मेट्स की रेंज बढ़ रही है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपभोक्ता अब ऐसे प्रोडक्ट्स पसंद कर रहे हैं जो इस्तेमाल में आसान हों और रोजमर्रा की जिंदगी में फिट बैठें। इस बदलाव ने मैन्युफैक्चरर्स और ब्रांड्स को नए फॉर्मेट्स विकसित करने के लिए प्रेरित किया है।

कंज्यूमर डिमांड में बदलाव

मार्केट डेटा के अनुसार, हेल्थ और वेलनेस को अब केवल इलाज से नहीं जोड़ा जा रहा। कंज्यूमर इसे लाइफस्टाइल का हिस्सा मान रहे हैं। आसान सेवन, बेहतर टेस्ट और पोर्टेबिलिटी जैसे फैक्टर्स खरीद के फैसले को प्रभावित कर रहे हैं। इसी वजह से न्यूट्रास्यूटिकल प्रोडक्ट्स के डिजाइन और प्रेजेंटेशन में भी बदलाव देखा जा रहा है।

गमी और च्यूएबल प्रोडक्ट्स

गमी और च्यूएबल सप्लीमेंट्स की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ी है। ये फॉर्मेट्स खासकर बच्चों और युवा कंज्यूमर्स में लोकप्रिय हैं। इंडस्ट्री आंकड़ों के मुताबिक, गमी सेगमेंट में ग्रोथ रेट अन्य पारंपरिक फॉर्मेट्स की तुलना में तेज है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनमें न्यूट्रिएंट स्टेबिलिटी बनाए रखना एक तकनीकी चुनौती बनी हुई है।

इफर्वेसेंट टैबलेट और पाउडर

इफर्वेसेंट टैबलेट और पाउडर पानी में घुलकर इस्तेमाल किए जाते हैं। ये फॉर्मेट्स खास तौर पर विटामिन और इलेक्ट्रोलाइट कैटेगरी में देखे जा रहे हैं। कंपनियां इन्हें फंक्शनल ड्रिंक ऑप्शन के तौर पर पेश कर रही हैं। मार्केट रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सेगमेंट अर्बन कंज्यूमर्स में तेजी से जगह बना रहा है।

फंक्शनल बेवरेजेस

न्यूट्रास्यूटिकल और बेवरेज इंडस्ट्री के बीच की दूरी कम हो रही है। रेडी टू ड्रिंक न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स, प्रोटीन ड्रिंक्स और हर्बल बेवरेजेस बाजार में उपलब्ध हैं। रिटेल चैनल्स में इनकी उपलब्धता बढ़ी है। हालांकि, स्टोरेज और शेल्फ लाइफ को लेकर रेगुलेटरी मानकों का पालन जरूरी माना जा रहा है।

लिपोसोमल टेक्नोलॉजी

लिपोसोमल एनकैप्सुलेशन एक उन्नत डिलीवरी सिस्टम के रूप में सामने आया है। इसमें एक्टिव इंग्रीडिएंट्स को माइक्रो लेयर में सुरक्षित रखा जाता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह तकनीक कुछ न्यूट्रिएंट्स की बायोअवेलेबिलिटी बढ़ाने में मदद करती है। लागत अधिक होने के कारण इसे प्रीमियम कैटेगरी में रखा जा रहा है।

ओरल डिसॉल्विंग फिल्म्स और स्ट्रिप्स

ओरल डिसॉल्विंग फिल्म्स और स्ट्रिप्स पानी के बिना इस्तेमाल की जा सकती हैं। ये खास तौर पर ट्रैवल फ्रेंडली मानी जाती हैं। विटामिन और एनर्जी सपोर्ट प्रोडक्ट्स में इनका उपयोग देखा जा रहा है। कंपनियां इन्हें माइक्रोडोज फॉर्मेट के रूप में पेश कर रही हैं।

स्प्रे और ड्रॉप्स

सब्लिंगुअल स्प्रे और लिक्विड ड्रॉप्स का उपयोग भी बढ़ा है। ये सीधे ओरल म्यूकोसा से एब्जॉर्ब होते हैं। मार्केट डेटा के मुताबिक, विटामिन बी12 और हर्बल एक्सट्रैक्ट कैटेगरी में इनकी मांग स्थिर रूप से बढ़ रही है।

पर्सनलाइज्ड और 3डी प्रिंटेड न्यूट्रीशन

पर्सनलाइज्ड न्यूट्रीशन एक उभरता हुआ ट्रेंड है। कुछ कंपनियां कस्टमाइज्ड न्यूट्रिएंट प्रोफाइल पर काम कर रही हैं। 3डी प्रिंटेड न्यूट्रास्यूटिकल्स अभी सीमित स्तर पर उपलब्ध हैं। टेक्नोलॉजी कॉस्ट और रेगुलेटरी क्लीयरेंस को लेकर काम जारी है।

बिजनेस और रेगुलेटरी पहलू

नए डिलीवरी फॉर्मेट्स के लिए रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी कंट्रोल में निवेश जरूरी माना जा रहा है। रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत फूड और सप्लीमेंट कैटेगरी की सीमाएं तय की जाती हैं। कंपनियों को लेबलिंग और सेफ्टी गाइडलाइंस का पालन करना होता है।

ब्रांडिंग और मार्केट स्ट्रैटेजी

डिलीवरी फॉर्मेट अब ब्रांड पहचान का हिस्सा बन गया है। अलग-अलग फॉर्मेट्स के जरिए कंपनियां अलग कंज्यूमर ग्रुप्स को टारगेट कर रही हैं। रिटेल और ऑनलाइन चैनल्स में इन प्रोडक्ट्स की मौजूदगी बढ़ी है।

इंडस्ट्री का आगे का रुख

इंडस्ट्री रिपोर्ट्स संकेत देती हैं कि आने वाले वर्षों में हाइब्रिड फॉर्मेट्स और कस्टमाइज्ड सॉल्यूशंस पर फोकस बढ़ सकता है। सस्टेनेबल पैकेजिंग और क्लीन लेबल इंग्रीडिएंट्स भी प्राथमिकता में शामिल हैं।

Dr. Sanjay Agarwal

Scientific Advisor,

Alcomex GBN Pharma Group USA

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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