संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 20 जून 2025 को एक आपात बैठक के दौरान चीन ने इजरायल पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि सशस्त्र संघर्ष में "लाल रेखा" को पार करना अस्वीकार्य है। चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कॉन्ग ने इजरायल की ईरान पर हालिया सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का उल्लंघन बताया। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान-इजरायल संघर्ष अपने आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है और ईरान की परमाणु साइट्स को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
इजरायल के हमलों में अब तक ईरान के 640 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजरायल में 40 नागरिक मारे गए हैं।
फू कॉन्ग ने कहा:
"इजरायल की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधों के मानकों का उल्लंघन है। इससे क्षेत्रीय स्थिरता को गहरा खतरा पैदा हो गया है।"
उन्होंने सशस्त्र संघर्ष में "रेड लाइन" का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे कभी पार नहीं किया जाना चाहिए। ताकत का अंधाधुंध प्रयोग केवल तबाही को न्योता देता है।
चीन का स्पष्ट और आक्रामक रुख यह संकेत देता है कि यदि संघर्ष नहीं थमा तो वह कूटनीतिक स्तर पर और अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि चीन फिलहाल सैन्य हस्तक्षेप से बच रहा है और उसकी भूमिका "कूटनीतिक संतुलनकारी" तक सीमित है।
अगर युद्धविराम नहीं हुआ:
#BreakingNews #IsraelIranConflict #ChinaUNSC #UNUpdate #MiddleEastTensions #ShahTimesExclusive #GeoPolitics #NuclearCrisis
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 20 जून 2025 को एक आपात बैठक के दौरान चीन ने इजरायल पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि सशस्त्र संघर्ष में "लाल रेखा" को पार करना अस्वीकार्य है। चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कॉन्ग ने इजरायल की ईरान पर हालिया सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का उल्लंघन बताया। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान-इजरायल संघर्ष अपने आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है और ईरान की परमाणु साइट्स को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
इजरायल के हमलों में अब तक ईरान के 640 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजरायल में 40 नागरिक मारे गए हैं।
फू कॉन्ग ने कहा:
"इजरायल की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधों के मानकों का उल्लंघन है। इससे क्षेत्रीय स्थिरता को गहरा खतरा पैदा हो गया है।"
उन्होंने सशस्त्र संघर्ष में "रेड लाइन" का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे कभी पार नहीं किया जाना चाहिए। ताकत का अंधाधुंध प्रयोग केवल तबाही को न्योता देता है।
चीन का स्पष्ट और आक्रामक रुख यह संकेत देता है कि यदि संघर्ष नहीं थमा तो वह कूटनीतिक स्तर पर और अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि चीन फिलहाल सैन्य हस्तक्षेप से बच रहा है और उसकी भूमिका "कूटनीतिक संतुलनकारी" तक सीमित है।
अगर युद्धविराम नहीं हुआ:
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Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।