CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर मुंबई में CJP का प्रदर्शन, SIR और वोटर लिस्ट पर उठे सवाल
Mohammad Naved
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2026-10-02 12:27:31
मुंबई में CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। आंदोलन का केंद्र SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़े विवाद हैं।
📍 मुंबई, महाराष्ट्र
🗓️ 2 अक्टूबर 2026
✍️ Mohd Naved
मुंबई में CEC के खिलाफ CJP का प्रदर्शन
मुंबई में 2 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन को देशव्यापी अभियान में बदलने की बात कही है। मुंबई के शिवाजी पार्क से शुरू होने वाले इस आंदोलन को आगे दूसरे शहरों तक ले जाने की योजना बताई गई है।
CJP का मुख्य मुद्दा क्या है
CJP का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। संगठन ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ 2025 की SIR सूची को फ्रीज करने और चुनाव आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग भी रखी है।
13 करोड़ नामों का दावा क्यों चर्चा में है
CJP और आंदोलन से जुड़े दूसरे समूहों की तरफ से SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 13 करोड़ मतदाता नामों के ड्राफ्ट सूची से बाहर होने का दावा किया गया है। इस आंकड़े को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हुई है। हालांकि इसे CJP का दावा मानकर ही देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग की ओर से ऐसे नामों को लेकर सुधार और दोबारा शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने की जानकारी सामने आई है। इसलिए 13 करोड़ नामों को अंतिम रूप से स्थायी रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या के तौर पर प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर विवाद
विवाद का दूसरा अहम पहलू चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मुद्दों में मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने और हटाने, Form 6, मतदाता डेटा और SIR से जुड़े विषय शामिल थे।
इन आपत्तियों को लेकर चुनाव आयोग का पक्ष अलग है। आयोग ने कहा है कि अलग-अलग सदस्यों के बीच विचार-विमर्श के दौरान टिप्पणियां और मतभेद संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा SIR सहित प्रमुख फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए। इसलिए आंतरिक आपत्तियों का रिकॉर्ड अपने आप में किसी अंतिम चुनावी फैसले को अवैध साबित नहीं करता।
सुप्रीम कोर्ट में भी उठा मामला
CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी पहुंच चुकी है। याचिका में आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और SIR की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई पर सहमति जताई है। इससे विवाद का कानूनी पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है।
मुंबई से देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
CJP ने मुंबई के बाद दूसरे शहरों में भी प्रदर्शन करने की योजना बताई है। संगठन की तरफ से गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता सहित कई स्थानों पर आंदोलन की बात कही गई है। अंतिम चरण में दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया गया है।
दिल्ली में भी प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था
2 अक्टूबर को दिल्ली में भी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी की गई। जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई और नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए। दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके साथ ही मध्य दिल्ली के 11 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अस्थायी रूप से बंद किए जाने की जानकारी सामने आई।
राजनीतिक दलों की अलग-अलग प्रतिक्रिया
CEC के खिलाफ उठे विवाद पर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने अपनी निर्णय प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि उसके प्रमुख फैसले सामूहिक और सर्वसम्मत तरीके से लिए गए। इसलिए मौजूदा विवाद में राजनीतिक आरोप, संस्थागत जवाब और न्यायिक प्रक्रिया तीनों अलग-अलग स्तर पर चल रहे हैं।
आंदोलन की अगली दिशा
CJP की मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR से जुड़े कदमों पर रोक या पुनर्विचार, मतदाता सूची में छूटे नामों की बहाली और चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता शामिल है। इन मांगों पर आगे राजनीतिक प्रतिक्रिया के साथ-साथ अदालत और चुनाव आयोग के स्तर पर होने वाली कार्रवाई भी महत्वपूर्ण रहेगी।
क्या है असली मुद्दा
मौजूदा विवाद को केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन के तौर पर देखना अधूरा होगा। इसके केंद्र में मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं का नाम दर्ज रहना, चुनावी संस्थाओं की निर्णय प्रक्रिया और चुनाव आयोग की सार्वजनिक विश्वसनीयता जैसे संवैधानिक और प्रशासनिक सवाल हैं।
दूसरी तरफ यह भी जरूरी है कि SIR से जुड़े आंकड़ों और आरोपों को अंतिम तथ्य के रूप में पेश करने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक निष्कर्षों को देखा जाए। 13 करोड़ नामों का आंकड़ा आंदोलनकारियों और आलोचकों के दावों के संदर्भ में सामने आया है, जबकि चुनाव आयोग ने छूटे हुए पात्र मतदाताओं को शामिल करने के लिए सुधारात्मक कदमों की जानकारी दी है।
मुंबई में CJP का आंदोलन CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से शुरू होकर SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया तक पहुंच गया है। अब इस विवाद की दिशा तीन स्तरों पर तय होगी। आंदोलन का विस्तार, चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई और अदालत में चल रही कानूनी प्रक्रिया। इन तीनों घटनाक्रमों पर नजर रखना जरूरी होगा।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।