चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर CJP के गंभीर इल्ज़ाम
Asif Khan
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2026-10-11 17:43:29
दिल्ली में सीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस: मुख्य चुनाव आयुक्त और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर उठाए सवाल
सीजेपी नेताओं का दावा: हिरासत में अमानवीय व्यवहार और राजधानी में पाबंदियों से आम जनता परेशान
प्रेस क्लब से सीजेपी का आरोप: चुनाव आयोग की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर पाबंदियों पर घेरा
सीजेपी ने प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग, केंद्र और दिल्ली पुलिस पर कई आरोप लगाए। नेताओं ने हिरासत में अमानवीय व्यवहार और राजधानी में पाबंदियों का दावा किया।
📍 नई दिल्ली 🗓️ 11 October 2026 ✍️ Asif Khan
रविवार को दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान पार्टी के सह-संयोजक व प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास ने मुख्य चुनाव आयुक्त, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए। प्रवक्ताओं ने हालिया घटनाक्रम, हिरासत के अनुभव और दिल्ली में लागू सुरक्षा पाबंदियों को लेकर अपनी बात रखी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों के साथ समझौता कर चुका है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निष्पक्षता न बरतने और एक विशेष राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनका यह संघर्ष चुनावी संस्था की कार्यप्रणाली के खिलाफ है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन दिल्ली के प्रेस क्लब में रविवार को संपन्न हुआ।
सीजेपी नेताओं ने दावा किया कि उनके साथी अभिजीत दिपके के पारिवारिक शोक (दादी के निधन) की सूचना के समय पुलिस ने असंवेदनशील आचरण किया।
नेताओं ने हिरासत के दौरान अलग-अलग थानों में रखे जाने और फोन जब्त किए जाने को लेकर भी चिंता जताई।
राजधानी में सुरक्षा कर्मियों की भारी तैनाती, मेट्रो स्टेशन बंद करने और ट्रेनें प्रभावित होने से आम नागरिकों की परेशानी का दावा किया गया।
आशुतोष रांका के मुताबिक, "शनिवार को जब अभिजीत दिपके को उनकी दादी के निधन की सूचना दी गई, तब भी दिल्ली पुलिस के जवान कैमरे और माइक लेकर मौजूद थे और संवेदनहीन व्यवहार किया गया।" उन्होंने आरोप लगाया कि दिपके को उनके परिजनों से बात करने की अनुमति नहीं दी गई। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, माणिक सरकार और पिनाराई विजयन जैसे नेताओं ने छात्रों व युवाओं के लोकतांत्रिक विरोध को समर्थन दिया।
सौरव दास ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें आरकेपुरम थाने में रखा गया, जबकि आशुतोष रांका और अभिजीत दिपके को अन्यत्र रखा गया। सौरव दास ने आशंका व्यक्त की कि पुलिस ने उनके फोन की जांच की और उसमें साक्ष्य प्लांट किए जा सकते हैं। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों की तुलना 1975 के आपातकाल से की।
सीजेपी प्रवक्ताओं के अनुसार, पिछले 72 घंटों के दौरान राजधानी में अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आए हैं, जिसके तहत छात्रों और युवाओं के साथ विरोध प्रदर्शन तथा नेताओं की हिरासत की स्थिति उत्पन्न हुई।
सौरव दास ने दावा किया कि दिल्ली को सुरक्षा छावनी में बदल दिया गया है और सीमावर्ती व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से अर्धसैनिक बलों (बीएसएफ सहित) को बुलाया गया है। उनका आरोप था कि सुरक्षा के नाम पर 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, रेलगाड़ियों को रद्द या बाधित करने और दुकानों को बंद कराने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है और प्रदर्शनकारियों के प्रति नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
सीजेपी का दावा: सुरक्षा व्यवस्था के लिए 30,000 से 40,000 से अधिक कर्मियों की तैनाती।
सीजेपी का दावा: 57 मेट्रो स्टेशनों का संचालन और कई ट्रेन सेवाएं प्रभावित।
समय संदर्भ: पिछले 72 से 96 घंटों के भीतर का घटनाक्रम
सीजेपी नेताओं ने अपने आरोपों को जनता के सामने रखते हुए आंदोलन और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी बात जारी रखने की बात कही है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग, केंद्र सरकार अथवा दिल्ली पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।
सीजेपी द्वारा प्रेस क्लब में लगाए गए आरोप चुनावी निष्पक्षता, पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और नागरिक सुविधाओं से जुड़े हैं। संस्थागत संतुलन और लोकतांत्रिक मर्यादा के तहत इन आरोपों पर संबंधित संवैधानिक संस्थाओं और कानून व्यवस्था एजेंसियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी राजनीतिक या नागरिक समूह द्वारा संवैधानिक संस्थाओं और पुलिस प्रशासन पर लगाए गए आरोपों का राजनीतिक और कानूनी महत्व होता है। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता लोकतंत्र का आधार है; ऐसे में लगाए गए आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता जब तक कि साक्ष्य या न्यायिक निष्कर्ष सामने न आएं। वहीं, सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों के आवागमन व अधिकारों के बीच संतुलन साधना प्रशासन के लिए एक संवेदनशील चुनौती बना रहता है। निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों के तहत इन दावों की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का प्रतिउत्तर अत्यंत आवश्यक है।
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Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।