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चमोली के थराली में बादल फटा: तबाही, मलबा,राहत-बचाव जारी

None 2025-08-23 11:39:17
चमोली के थराली में बादल फटा: तबाही, मलबा,राहत-बचाव जारी

चमोली थराली में प्राकृतिक आपदा, SDRF और पुलिस राहत कार्य

 बादल फटना थराली: स्कूल बंद, मार्ग अवरुद्ध, प्रशासन सर्तक

Report ~Ranbir Negi

उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली में मध्यरात्रि बादल फटने से तबाही। घर-दुकानें मलबे में दबे, एक युवती लापता। राहत-बचाव युद्धस्तर पर जारी।

Dehradun,(Shah Times) । उत्तराखंड का पहाड़ी इलाक़ा हमेशा से ही कुदरती आपदाओं की चपेट में आता रहा है। चमोली जिले के थराली क्षेत्र में शुक्रवार की मध्य रात्रि को बादल फटने की घटना ने एक बार फिर इंसानी ज़िंदगियों को हिला दिया। आधी रात को आए इस कुदरती क़हर ने थराली बाज़ार और आसपास के गांवों को मलबे में दबा दिया। घर, दुकानें, वाहन—सब कुछ कुछ ही पलों में तबाही के मंजर में बदल गया। प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और राहत-बचाव कार्य जारी है।

तबाही का मंजर

थराली बाज़ार, तहसील परिसर और आसपास के गांवों में अचानक आए मलबे ने लोगों को घबराहट में डाल दिया।

कई दुकानों की दीवारें टूट गईं

तहसील परिसर में खड़ी गाड़ियां मलबे में दब गईं

सागवाड़ा गांव में एक युवती के दबने की सूचना

चेपड़ो बाज़ार में दुकानें पूरी तरह क्षतिग्रस्त

सिर्फ़ बाज़ार ही नहीं बल्कि थराली-ग्वालदम और थराली-सागवाड़ा मार्ग भी अवरुद्ध हो गए हैं। इससे पूरे क्षेत्र में आवाजाही ठप हो गई।

https://twitter.com/ShahTimes1/status/1959136740565832113?t=ahZCe-Opd3ZqHWNEkk1YTw&s=19

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायज़ा लिया। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी तुरंत भेजा गया। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने की व्यवस्था की जा रही है। स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें लगातार मलबा हटाने और लापता लोगों की तलाश में लगी हुई हैं।

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मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट कर घटना पर गहरी संवेदना जताई और कहा कि राज्य सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि वे लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं और खुद राहत कार्यों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से सभी के सुरक्षित रहने की दुआ की।

विश्लेषण

बादल फटना कोई नई घटना नहीं है। उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में यह अक्सर देखा जाता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर कुदरत के इस कहर के सामने हमारी तैयारियां कितनी मज़बूत हैं।

क्या पहाड़ी इलाक़ों में चेतावनी प्रणाली पर्याप्त है

क्या आपदा प्रबंधन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन हैं

क्या स्थानीय लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था की जा सकती है।

प्रतिपक्षीय तर्क

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी ऊंचाई पर अचानक और तेज़ बारिश को रोकना संभव नहीं है। यह प्रकृति का अपना तंत्र है। लेकिन दूसरी ओर पर्यावरणविदों का कहना है कि बेतरतीब निर्माण, नदियों पर दबाव, और जंगलों की कटाई भी इस तरह की घटनाओं को और भी भयावह बना देती है।

नतीजा

थराली की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हिमालयी क्षेत्रों में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बेहद ज़रूरी है। सरकार और प्रशासन को सिर्फ़ आपदा आने के बाद ही सक्रिय नहीं होना चाहिए बल्कि पहले से ही वैज्ञानिक तरीक़ों से मॉनिटरिंग और चेतावनी प्रणाली मज़बूत करनी चाहिए।

मानवीय दृष्टिकोण से यह एक त्रासदी है। पर सामूहिक दृष्टिकोण से यह एक सबक भी है कि हमें प्रकृति के साथ तालमेल बैठाकर जीना सीखना होगा।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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