मद्रास हाईकोर्ट में CM विजय की चुनाव याचिकाएं खारिज करने की मांग पर सुनवाई शुरू
Wasi Siddiqui
•
2026-10-05 16:12:28
मद्रास हाईकोर्ट में CM विजय की चुनावी जीत को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की मांग पर सुनवाई शुरू हुई। मामला पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीटों से जुड़ा है।
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चेन्नई, तमिलनाडु
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5 October 2026
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Wasi Siddiqui
तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay की चुनावी जीत अब अदालत की कानूनी जांच के दायरे में है। मद्रास हाईकोर्ट में विजय की 2026 विधानसभा चुनाव जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिकाओं को खारिज करने की उनकी मांग पर सुनवाई शुरू हुई है।
विजय ने अदालत से आग्रह किया है कि उनके खिलाफ दाखिल चुनाव याचिकाओं को शुरुआती स्तर पर ही खारिज किया जाए। इन याचिकाओं में उनकी पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट विधानसभा सीटों से जुड़ी चुनावी जीत को चुनौती दी गई है।
मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि चुनाव याचिका सामान्य राजनीतिक आरोप से अलग एक औपचारिक न्यायिक प्रक्रिया है। अदालत को यह देखना होता है कि याचिका में कानून के मुताबिक पर्याप्त तथ्य और आधार मौजूद हैं या नहीं।
मुख्य तथ्य
2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट, दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। बाद में उन्होंने पेरंबूर सीट अपने पास रखी और तिरुचिरापल्ली ईस्ट विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया। Bar and Bench - Indian Legal news
पेरंबूर में विजय को 1,20,365 वोट मिले, जबकि उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी R. D. Shekar को 66,650 वोट मिले। विजय की जीत का अंतर 53,715 वोट रहा। तिरुचिरापल्ली ईस्ट में विजय को 91,381 वोट मिले, जबकि DMK उम्मीदवार S. Inigo Irudayaraj को 63,965 वोट मिले। वहां जीत का अंतर 27,416 वोट रहा।
विजय की चुनावी जीत को चुनौती देने वाली कुल 4 चुनाव याचिकाओं का उल्लेख अदालत से जुड़े रिकॉर्ड और रिपोर्टों में मिलता है। इनमें 3 याचिकाएं पेरंबूर सीट से और 1 याचिका तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से संबंधित है।
याचिकाओं में क्या चुनौती दी गई है
पेरंबूर सीट को लेकर R. D. Shekar और 2 मतदाताओं, S. Dinesh तथा T. N. Lakshmi Narasimhan, ने चुनाव याचिकाएं दाखिल की हैं।
तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से विजय की जीत को S. Inigo Irudayaraj ने चुनौती दी है। याचिकाओं में अलग-अलग चुनावी और प्रक्रिया संबंधी दावे किए गए हैं। इनमें चुनावी हलफनामे में कथित जानकारी, चुनावी खर्च और प्रचार अभियान से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
कुछ याचिकाओं में चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों की कथित भूमिका को भी मुद्दा बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि 21 April 2026 के एक चुनावी भाषण के संदर्भ में बच्चों से परिवार के मतदाताओं को TVK के पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित करने की अपील की गई थी। इन दावों की अदालत में कानूनी जांच होना बाकी है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि याचिका में लगाए गए आरोप अपने आप में न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं हैं। अदालत में इनके आधार, साक्ष्य और कानूनी प्रासंगिकता का परीक्षण होना है।
विजय की ओर से क्या मांग है
मुख्यमंत्री विजय की ओर से अदालत में मुख्य प्रयास इन चुनाव याचिकाओं को प्रारंभिक स्तर पर खारिज कराने का है।
अगस्त 2026 में विजय के वकीलों ने अदालत को बताया था कि वे चुनाव याचिकाओं को खारिज करने के लिए आवेदन दाखिल करेंगे। अदालत ने चुनाव मामलों के जल्द निपटारे की जरूरत पर भी जोर दिया था। कानून के तहत ऐसे चुनाव मामलों के निपटारे के लिए निर्धारित समयसीमा महत्वपूर्ण है।
विजय की ओर से दिए गए तर्कों में यह भी शामिल रहा है कि किसी चुनाव को रद्द करने के लिए केवल राजनीतिक या नैतिक आपत्ति पर्याप्त नहीं होती। याचिका में कानून के तहत मान्य आधार और आवश्यक तथ्य मौजूद होना जरूरी है।
अदालत के सामने असल कानूनी सवाल
इस सुनवाई का तत्काल सवाल यह नहीं है कि विजय चुनाव जीतने के हकदार थे या नहीं। अदालत के सामने शुरुआती सवाल यह है कि क्या संबंधित चुनाव याचिकाएं ऐसी कानूनी और तथ्यात्मक सामग्री पेश करती हैं जिनके आधार पर मामला आगे सुनवाई और ट्रायल तक जाना चाहिए।
Representation of the People Act, 1951 के तहत चुनाव याचिका में कथित भ्रष्ट आचरण या अन्य कानूनी आधारों से जुड़े आवश्यक तथ्य स्पष्ट रूप से दिए जाने चाहिए। अदालतों ने कई मामलों में यह स्पष्ट किया है कि केवल सामान्य आरोप पर्याप्त नहीं होते।
हालांकि, यदि याचिका में पर्याप्त material facts मौजूद हों और विवादित तथ्यों का फैसला साक्ष्य के आधार पर होना हो, तो अदालत प्रारंभिक चरण में पूरी याचिका खारिज करने से बच सकती है। एक हालिया मद्रास हाईकोर्ट आदेश में भी अदालत ने कहा था कि ऐसे विवादित तथ्यों को ट्रायल के दौरान परखा जाना चाहिए।
पेरंबूर सीट का राजनीतिक और कानूनी महत्व
पेरंबूर सीट विजय के लिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि उन्होंने इसी सीट को अपने पास रखा। तिरुचिरापल्ली ईस्ट से इस्तीफा देने के बाद वहां उपचुनाव की स्थिति बनी।
पेरंबूर में विजय की जीत का अंतर 53,715 वोट था। इसलिए चुनाव याचिका का परिणाम केवल एक सीट के आंकड़े से जुड़ा विषय नहीं है। यह मुख्यमंत्री की विधानसभा सदस्यता की वैधानिक स्थिति से जुड़ा संवेदनशील मामला है।
फिर भी, चुनाव याचिका दाखिल होने भर से निर्वाचित प्रतिनिधि की जीत रद्द नहीं होती। चुनाव परिणाम तब तक प्रभावी रहता है जब तक सक्षम अदालत उसे कानून के अनुसार निरस्त न करे।
तिरुचिरापल्ली ईस्ट का अलग पहलू
तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट का मामला थोड़ा अलग है। विजय ने यहां जीत दर्ज करने के बाद विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था।
इसी सीट से जुड़ी चुनाव याचिका में उनकी जीत को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने चुनाव विवाद के निपटारे तक उपचुनाव से जुड़े कदमों पर रोक की मांग भी की थी।
इसका मतलब यह है कि मामले का असर केवल पिछली चुनावी जीत के न्यायिक परीक्षण तक सीमित नहीं है। इससे आगे की चुनावी प्रक्रिया पर भी कानूनी सवाल उठ सकते हैं।
2026 चुनाव के बाद चुनाव याचिकाओं की बड़ी संख्या
तमिलनाडु और पुडुचेरी के 2026 विधानसभा चुनावों के बाद मद्रास हाईकोर्ट में कुल 55 चुनाव याचिकाएं दाखिल होने की जानकारी सामने आई थी।
यह संख्या पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में काफी अधिक है। 2021 में 13, 2016 में 23 और 2011 में 12 चुनाव याचिकाएं दाखिल हुई थीं।
इस संदर्भ में विजय से जुड़ा मामला व्यापक चुनावी मुकदमों की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए अदालत का रुख केवल एक राजनीतिक नेता के मामले के लिए नहीं, बल्कि चुनाव याचिकाओं के न्यायिक परीक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
अदालत ने पहले क्या रुख अपनाया
अदालत ने पहले ही यह संकेत दिया था कि चुनाव याचिकाओं का निपटारा निर्धारित अवधि के भीतर होना चाहिए। अगस्त में सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री विजय और मंत्री Arjuna के खिलाफ चुनाव मामलों में जवाब दाखिल करने में देरी को लेकर लागत लगाने की चेतावनी भी दी गई थी। बाद में उनके वकीलों ने संबंधित आवेदन दाखिल करने का आश्वासन दिया।
अदालत का यह रुख बताता है कि मामला लंबी प्रक्रिया में अनिश्चित रूप से लंबित रखने के बजाय समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर है।
आरोप और स्थापित तथ्य में अंतर
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण संपादकीय बिंदु आरोप और न्यायिक निष्कर्ष के बीच अंतर है।
याचिकाकर्ताओं ने चुनाव प्रचार, हलफनामे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई दावे किए हैं। दूसरी ओर विजय इन चुनाव याचिकाओं को खारिज कराने की मांग कर रहे हैं।
अभी अदालत ने इन आरोपों को सत्यापित तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है। इसलिए अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आने तक विजय की चुनावी जीत को अवैध घोषित करना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
आगे क्या होगा
मद्रास हाईकोर्ट में अब यह देखा जाएगा कि विजय की ओर से दायर आवेदन चुनाव याचिकाओं को शुरुआती स्तर पर खारिज करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार पेश करते हैं या नहीं।
यदि अदालत आवेदन स्वीकार करती है तो संबंधित चुनाव याचिकाएं आगे ट्रायल में जाने से पहले ही समाप्त हो सकती हैं। यदि आवेदन खारिज होते हैं, तो चुनाव याचिकाओं में उठाए गए विवादित मुद्दों पर आगे न्यायिक प्रक्रिया जारी रह सकती है।
अंतिम परिणाम अदालत के आदेश और आगे की न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
C. Joseph Vijay की 2026 विधानसभा चुनाव जीत से जुड़े विवाद अब महत्वपूर्ण न्यायिक चरण में पहुंच गए हैं। मद्रास हाईकोर्ट में उनकी ओर से चुनाव याचिकाओं को खारिज करने की मांग पर सुनवाई शुरू हो चुकी है।
मामले में पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीटों से जुड़े चुनावी दावे, प्रचार अभियान, हलफनामे और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित सवाल उठाए गए हैं। लेकिन इन दावों को अभी अंतिम न्यायिक सत्य नहीं माना जा सकता।
अब अदालत का फैसला तय करेगा कि ये याचिकाएं शुरुआती स्तर पर खत्म होती हैं या विस्तृत ट्रायल की ओर बढ़ती हैं। इस लिहाज से अगली न्यायिक कार्यवाही तमिलनाडु की सियासत और मुख्यमंत्री विजय की विधानसभा स्थिति, दोनों के लिए अहम रहेगी।
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Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।