🗓️ 23 सितंबर 2026
✍️ मोहम्मद नावेद
सीएम योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले यूपी में टैक्सी चालकों की कथित परेशानियों का जिक्र किया। उन्होंने मारपीट, वसूली और गाड़ियां गायब होने का दावा किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की मौजूदा कानून-व्यवस्था और 2017 से पहले की स्थिति की तुलना करते हुए टैक्सी चालकों से जुड़े अपने दावे सामने रखे हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उस दौर में टैक्सी चालकों को कथित तौर पर मारपीट और अवैध वसूली जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि कई मामलों में टैक्सी चालकों की गाड़ियां तक गायब हो जाती थीं। इन बयानों को उन्होंने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था में बदलाव के अपने राजनीतिक और प्रशासनिक तर्क के संदर्भ में रखा।
योगी आदित्यनाथ पहले भी उत्तर प्रदेश में अवैध टैक्सी, बस और रिक्शा स्टैंड को लेकर अधिकारियों को निर्देश देते रहे हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने प्रदेश में अवैध टैक्सी और दूसरे वाहन स्टैंड संचालित नहीं होने देने तथा ऐसे स्थानों पर अवैध वसूली रोकने के निर्देश दिए थे।
गोरखपुर में युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले टैक्सी स्टैंड के नाम पर वसूली होने का भी दावा किया था। उन्होंने उस समय की कानून-व्यवस्था को लेकर अपहरण और कथित वसूली जैसी समस्याओं का जिक्र किया था।
योगी आदित्यनाथ वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद उनकी सरकार ने कानून-व्यवस्था को अपने प्रमुख प्रशासनिक मुद्दों में रखा। अवैध टैक्सी स्टैंड और वाहन स्टैंड को लेकर भी समय-समय पर प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
सरकार की ओर से अवैध स्टैंडों को हटाने और वहां होने वाली कथित वसूली पर कार्रवाई के निर्देश कई मौकों पर सामने आए हैं। वर्ष 2022 में भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से प्रदेश में अवैध टैक्सी, बस और रिक्शा स्टैंड बंद कराने को कहा था।
मुख्यमंत्री का मौजूदा बयान उनके राजनीतिक भाषण और सरकार के कानून-व्यवस्था संबंधी नैरेटिव का हिस्सा है। टैक्सी चालकों से मारपीट और गाड़ियों के गायब होने के दावे को लेकर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों में इस बयान के साथ कोई विस्तृत जिला-वार आंकड़ा या स्वतंत्र समेकित रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।
इसलिए इन दावों को मुख्यमंत्री के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन्हें पूरे उत्तर प्रदेश में 2017 से पहले टैक्सी चालकों की स्थिति का स्वतंत्र रूप से प्रमाणित सांख्यिकीय निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
अवैध टैक्सी स्टैंड और वसूली की शिकायतें 2017 के बाद भी पूरी तरह समाप्त होने का दावा उपलब्ध रिपोर्टों से स्थापित नहीं होता। उदाहरण के लिए, 2023 में बहराइच से प्रकाशित एक रिपोर्ट में कई अवैध टैक्सी और टेंपो स्टैंडों पर वसूली के आरोप सामने आए थे।
इसी तरह बलरामपुर में भी मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद अवैध टैक्सी स्टैंड संचालित होने की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे संकेत मिलता है कि अवैध परिवहन स्टैंड और उनसे जुड़ी वसूली प्रशासन के लिए बाद के वर्षों में भी एक चुनौती बनी रही।
टैक्सी और कैब क्षेत्र में सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। ड्राइवरों की सुरक्षा, यात्रियों की सुरक्षा, वाहन सत्यापन, परमिट, किराया व्यवस्था और अवैध स्टैंड जैसे मुद्दे भी इससे जुड़े हैं।
वर्ष 2026 में उत्तर प्रदेश सरकार ने टैक्सी एग्रीगेटर सेवाओं के नियमन से जुड़े नियमों में बदलाव किए। रिपोर्टों के मुताबिक, नई व्यवस्था में पंजीकरण, ड्राइवर सत्यापन और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों पर जोर दिया गया है।
योगी आदित्यनाथ के बयान ने एक बार फिर 2017 से पहले और बाद की कानून-व्यवस्था की तुलना को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। सरकार अपने कार्यकाल में अपराध नियंत्रण और प्रशासनिक सख्ती को उपलब्धि के तौर पर पेश करती रही है, जबकि ऐसे दावों की व्यापक समीक्षा के लिए अपराध के आधिकारिक आंकड़े, पुलिस रिकॉर्ड और स्वतंत्र अध्ययनों को साथ देखना जरूरी है।
टैक्सी चालकों से जुड़े मौजूदा सवालों में भी यही पहलू अहम है। ड्राइवरों की सुरक्षा, अवैध वसूली पर रोक और परिवहन सेवाओं का नियमन तभी प्रभावी माना जाएगा जब इसके असर को शिकायतों, पुलिस कार्रवाई और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर लगातार परखा जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में टैक्सी चालकों के साथ कथित मारपीट और वाहनों के गायब होने का दावा किया है। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों से अवैध टैक्सी स्टैंड और वसूली की समस्या के अलग-अलग मामलों की पुष्टि होती है, लेकिन मुख्यमंत्री के पूरे दावे के समर्थन में इस समय कोई समेकित स्वतंत्र आंकड़ा सामने नहीं है।
इसलिए इस बयान का आकलन करते समय राजनीतिक दावे और सत्यापित प्रशासनिक रिकॉर्ड को अलग-अलग देखना जरूरी है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।