📍 Meerut ✍️ Asif Khan
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में इस सप्ताह कला, समाज और संवेदना का सुंदर संगम देखने को मिला।
एक ओर मंच कला विभाग में “सुर और तान” की कार्यशाला ने विद्यार्थियों को संगीत की नई बारीकियाँ सिखाईं, तो दूसरी ओर दिव्यांगजनों के लिए गाँव सिंधावली में सर्वेक्षण अभियान चलाया गया। इसके साथ ही महिला सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर एक प्रेरक सत्र “चुप्पी तोड़ना” भी आयोजित हुआ।
मंच कला विभाग की सुरमयी कार्यशाला
नंदलाल बोस कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स के सत्यजीत रे सभागार में आयोजित इस एकदिवसीय कार्यशाला में दिल्ली से आए डॉ. रंजन कुमार ने मोहन वीणा पर जादुई प्रस्तुति दी। विदुषी मालविका भट्टाचार्य की मधुर गायकी और युवा कथक कलाकार उत्कर्ष शंकर मिश्र के नृत्य ने वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
विभागाध्यक्ष डॉ. भावना ग्रोवर ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को संगीत और मंच प्रस्तुति के व्यावहारिक पक्ष से जोड़ना था।




कार्यक्रम में प्रो. जया शर्मा, डॉ. निशा शर्मा, और कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। दिव्यांगजनों के लिए जागरूकता अभियान
सुभारती विकलांगता परामर्श सेवा केंद्र ने शारीरिक शिक्षा विभाग के सहयोग से गाँव सिंधावली में दिव्यांग सर्वेक्षण अभियान चलाया।
डॉ. संदीप कुमार ने टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। केंद्र की समन्वयक दीपिका चौधरी और डॉ. अंकित जादौन के नेतृत्व में छात्रों ने शिक्षा और सरकारी लाभों की जानकारी दी।
“चुप्पी तोड़ना” — महिला सुरक्षा पर संवाद
मैनेजमेंट कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निशा सिंह ने छात्राओं को “गुड टच”, “बैड टच” और “कंसेंट” की अहमियत को सरल भाषा में समझाया।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. मंजू अधिकारी ने कहा कि इस तरह के संवाद ही असली सशक्तिकरण की दिशा दिखाते हैं।
कार्यक्रम का समापन छात्राओं की आत्मरक्षा के संकल्प के साथ हुआ।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।