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कांग्रेस CWC बैठक: मनरेगा मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान

None 2025-12-27 16:13:14
कांग्रेस CWC बैठक: मनरेगा मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान

बिहार चुनाव के बाद पहली CWC बैठक, मनरेगा पर बड़ा फैसला

दिल्ली में CWC बैठक, मनरेगा और SIR पर चर्चा


कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मनरेगा से जुड़े नए कानून पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद पार्टी ने देशव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की।

📍New Delhi ✍️ Asif Khan 

बिहार चुनाव के बाद पहली CWC बैठक

कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की यह बैठक बिहार विधानसभा चुनाव के बाद पहली मानी जा रही है। बैठक दिल्ली के इंदिरा भवन में आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता, सांसद और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य हालिया राजनीतिक घटनाक्रम, संसद के शीतकालीन सत्र में पारित कानूनों और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर रणनीति पर चर्चा करना बताया गया।

बैठक के बाद राहुल गांधी का बयान

बैठक समाप्त होने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कार्यसमिति की बैठक में यह तय हुआ है कि पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक स्कीम नहीं थी, बल्कि यह एक राइट बेस्ड कॉन्सेप्ट था। उनके अनुसार इस योजना के जरिए देश के करोड़ों लोगों को मिनिमम वेज का अधिकार मिलता था।

https://youtube.com/shorts/tzwjbAk4n4g?si=OfuvVBIEVJ84an6U

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि डायरेक्ट राइट बेस्ड कॉन्सेप्ट पर बनी इस योजना को खत्म करना एक आक्रमण के समान है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में राज्यों से अधिकार और संसाधन लेकर केंद्र सरकार के पास केंद्रित किए जा रहे हैं।

केंद्र–राज्य फंडिंग को लेकर सवाल

राहुल गांधी ने कहा कि पहले इस योजना में केंद्र सरकार का योगदान ज्यादा था, जबकि नए प्रावधानों में राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ने की बात कही जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला बिना राज्यों से सलाह लिए लिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले से ग्रामीण इलाकों पर असर पड़ेगा और रोजगार से जुड़े अवसर कम होंगे। राहुल गांधी के मुताबिक यह निर्णय कैबिनेट या राज्यों से व्यापक विमर्श के बिना लिया गया।

https://twitter.com/INCIndia/status/2004842090329751575?t=Qu5ZTAQkpq1vCgAsnS4BVg&s=19

खड़गे का मनरेगा पर जोर

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक में कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को समाप्त किए जाने के खिलाफ देशव्यापी अभियान की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह कानून लाखों परिवारों के लिए आजीविका का साधन रहा है।

खड़गे ने कहा कि इस योजना की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध हुआ और कई परिवारों का भरण-पोषण संभव हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी हर हाल में मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।

मतदाता सूची पुनरीक्षण पर चिंता

बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। खड़गे ने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर पार्टी को गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने नेताओं से कहा कि घर-घर जाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के वोटर्स के नाम मतदाता सूची से न हटें।

उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है और पार्टी इसे गंभीरता से ले रही है।

गांधी नाम हटाने पर आपत्ति

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना उनके अपमान के समान है। उन्होंने याद दिलाया कि इस कानून को यूपीए सरकार के दौरान बनाया गया था और इसका नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया था, क्योंकि इसकी सोच और उद्देश्य से जुड़ा था।

खड़गे ने कहा कि इस योजना की दुनियाभर में सराहना हुई थी और इसे एक दूरदर्शी कदम माना गया था।

नए कानून को लेकर कांग्रेस की आपत्ति

बैठक में बताया गया कि यूपीए काल की मनरेगा योजना की जगह विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक लाया गया है, जिसे संसद के शीतकालीन सत्र में पारित किया गया। इस नए कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नए कानून में हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन रोजगार की गारंटी का प्रावधान है, लेकिन फंडिंग पैटर्न में बदलाव किया गया है।

60:40 फंडिंग मॉडल पर चर्चा

नए कानून के तहत केंद्र और राज्य सरकारों को 60:40 के अनुपात में फंडिंग साझा करनी होगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इससे राज्यों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। बैठक में यह मुद्दा उठाया गया कि राज्यों से इस बदलाव पर कोई व्यापक परामर्श नहीं किया गया।

शशि थरूर की मौजूदगी

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की इस बैठक में सांसद शशि थरूर भी शामिल हुए। इससे पहले वह पार्टी की दो अहम बैठकों में शामिल नहीं हो पाए थे। उनकी मौजूदगी को संगठनात्मक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री

बैठक में कांग्रेस शासित राज्यों कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। इनके साथ ही प्रदेश कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

आगामी चुनावों पर रणनीति

सूत्रों के मुताबिक बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति पर भी चर्चा हुई। कर्नाटक मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में नेतृत्व परिवर्तन पर कोई चर्चा नहीं हुई और फोकस पूरी तरह चुनावी तैयारी पर रहा।

संसद सत्र और पहले की बैठकें

30 नवंबर को संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर सोनिया गांधी की अगुवाई में एक बैठक हुई थी। उस बैठक में कुछ नेता व्यक्तिगत कारणों से शामिल नहीं हो पाए थे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि मौजूदा CWC बैठक का उद्देश्य संगठनात्मक एकजुटता और मुद्दों पर स्पष्ट रुख तय करना था।

देशव्यापी अभियान की रूपरेखा

बैठक के अंत में पार्टी ने संकेत दिए कि मनरेगा से जुड़े मुद्दे और मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ देशभर में अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में पार्टी के सांसद, विधायक और संगठन के पदाधिकारी शामिल होंगे।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अभियान का उद्देश्य जनता तक पार्टी का पक्ष पहुंचाना और जमीनी स्तर पर संवाद बढ़ाना है।

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बिहार चुनाव के बाद पहली CWC बैठक, मनरेगा पर बड़ा फैसला

दिल्ली में CWC बैठक, मनरेगा और SIR पर चर्चा


कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मनरेगा से जुड़े नए कानून पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद पार्टी ने देशव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की।

📍New Delhi ✍️ Asif Khan 

बिहार चुनाव के बाद पहली CWC बैठक

कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की यह बैठक बिहार विधानसभा चुनाव के बाद पहली मानी जा रही है। बैठक दिल्ली के इंदिरा भवन में आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता, सांसद और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य हालिया राजनीतिक घटनाक्रम, संसद के शीतकालीन सत्र में पारित कानूनों और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर रणनीति पर चर्चा करना बताया गया।

बैठक के बाद राहुल गांधी का बयान

बैठक समाप्त होने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कार्यसमिति की बैठक में यह तय हुआ है कि पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक स्कीम नहीं थी, बल्कि यह एक राइट बेस्ड कॉन्सेप्ट था। उनके अनुसार इस योजना के जरिए देश के करोड़ों लोगों को मिनिमम वेज का अधिकार मिलता था।

https://youtube.com/shorts/tzwjbAk4n4g?si=OfuvVBIEVJ84an6U

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि डायरेक्ट राइट बेस्ड कॉन्सेप्ट पर बनी इस योजना को खत्म करना एक आक्रमण के समान है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में राज्यों से अधिकार और संसाधन लेकर केंद्र सरकार के पास केंद्रित किए जा रहे हैं।

केंद्र–राज्य फंडिंग को लेकर सवाल

राहुल गांधी ने कहा कि पहले इस योजना में केंद्र सरकार का योगदान ज्यादा था, जबकि नए प्रावधानों में राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ने की बात कही जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला बिना राज्यों से सलाह लिए लिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले से ग्रामीण इलाकों पर असर पड़ेगा और रोजगार से जुड़े अवसर कम होंगे। राहुल गांधी के मुताबिक यह निर्णय कैबिनेट या राज्यों से व्यापक विमर्श के बिना लिया गया।

https://twitter.com/INCIndia/status/2004842090329751575?t=Qu5ZTAQkpq1vCgAsnS4BVg&s=19

खड़गे का मनरेगा पर जोर

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक में कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को समाप्त किए जाने के खिलाफ देशव्यापी अभियान की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह कानून लाखों परिवारों के लिए आजीविका का साधन रहा है।

खड़गे ने कहा कि इस योजना की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध हुआ और कई परिवारों का भरण-पोषण संभव हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी हर हाल में मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।

मतदाता सूची पुनरीक्षण पर चिंता

बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। खड़गे ने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर पार्टी को गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने नेताओं से कहा कि घर-घर जाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के वोटर्स के नाम मतदाता सूची से न हटें।

उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है और पार्टी इसे गंभीरता से ले रही है।

गांधी नाम हटाने पर आपत्ति

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना उनके अपमान के समान है। उन्होंने याद दिलाया कि इस कानून को यूपीए सरकार के दौरान बनाया गया था और इसका नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया था, क्योंकि इसकी सोच और उद्देश्य से जुड़ा था।

खड़गे ने कहा कि इस योजना की दुनियाभर में सराहना हुई थी और इसे एक दूरदर्शी कदम माना गया था।

नए कानून को लेकर कांग्रेस की आपत्ति

बैठक में बताया गया कि यूपीए काल की मनरेगा योजना की जगह विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक लाया गया है, जिसे संसद के शीतकालीन सत्र में पारित किया गया। इस नए कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नए कानून में हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन रोजगार की गारंटी का प्रावधान है, लेकिन फंडिंग पैटर्न में बदलाव किया गया है।

60:40 फंडिंग मॉडल पर चर्चा

नए कानून के तहत केंद्र और राज्य सरकारों को 60:40 के अनुपात में फंडिंग साझा करनी होगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इससे राज्यों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। बैठक में यह मुद्दा उठाया गया कि राज्यों से इस बदलाव पर कोई व्यापक परामर्श नहीं किया गया।

शशि थरूर की मौजूदगी

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की इस बैठक में सांसद शशि थरूर भी शामिल हुए। इससे पहले वह पार्टी की दो अहम बैठकों में शामिल नहीं हो पाए थे। उनकी मौजूदगी को संगठनात्मक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री

बैठक में कांग्रेस शासित राज्यों कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। इनके साथ ही प्रदेश कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

आगामी चुनावों पर रणनीति

सूत्रों के मुताबिक बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति पर भी चर्चा हुई। कर्नाटक मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में नेतृत्व परिवर्तन पर कोई चर्चा नहीं हुई और फोकस पूरी तरह चुनावी तैयारी पर रहा।

संसद सत्र और पहले की बैठकें

30 नवंबर को संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर सोनिया गांधी की अगुवाई में एक बैठक हुई थी। उस बैठक में कुछ नेता व्यक्तिगत कारणों से शामिल नहीं हो पाए थे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि मौजूदा CWC बैठक का उद्देश्य संगठनात्मक एकजुटता और मुद्दों पर स्पष्ट रुख तय करना था।

देशव्यापी अभियान की रूपरेखा

बैठक के अंत में पार्टी ने संकेत दिए कि मनरेगा से जुड़े मुद्दे और मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ देशभर में अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में पार्टी के सांसद, विधायक और संगठन के पदाधिकारी शामिल होंगे।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अभियान का उद्देश्य जनता तक पार्टी का पक्ष पहुंचाना और जमीनी स्तर पर संवाद बढ़ाना है।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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