~ Nadeem Siddiqui
कांग्रेस ने पश्चिम यूपी में छह जोन बनाकर नए प्रभारी नियुक्त किए। मिशन 2027 की तैयारी में दलित-मुस्लिम नेताओं को दी बड़ी जिम्मेदारी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक ज़मीन पर दो दशकों से संघर्ष कर रही कांग्रेस पार्टी ने अब 2027 के विधानसभा चुनाव और 2026 में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनज़र संगठन को फिर से खड़ा करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इस बार पार्टी ने अपने पुराने सिपाहियों पर भरोसा जताते हुए उन्हें अलग-अलग ज़ोन की कमान सौंपी है।
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कांग्रेस हाईकमान ने रणनीतिक सोच के साथ पश्चिम यूपी को छह ज़ोन में बांटते हुए हर ज़ोन के लिए एक ज़ोनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया है। इन नियुक्तियों में जातीय और सामाजिक संतुलन का खास ख्याल रखा गया है।
संगठनात्मक बदलाव के तहत पूर्व मंत्री दीपक कुमार को एक प्रमुख ज़ोन का प्रभारी बनाया गया है। दीपक कुमार वेस्ट यूपी के अनुभवी और वरिष्ठ दलित नेता माने जाते हैं। उनकी छवि ज़मीनी कार्यकर्ता से लेकर कैबिनेट मंत्री तक की यात्रा करने वाले नेता के रूप में रही है, जो दलित समाज में व्यापक स्वीकार्यता रखते हैं।
अन्य प्रमुख नियुक्तियों में शामिल हैं:
इनके अलावा कई पूर्व विधायक, संगठन से जुड़े पुराने नेता और सक्रिय पदाधिकारियों को भी ज़ोनल टीमों में शामिल किया गया है।
कांग्रेस की इस नई रणनीति में कुछ खास बातें हैं:
इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य एक ही है – पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को फिर से जनमानस से जोड़ना। इसके लिए 16 जुलाई को मेरठ में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें वेस्ट यूपी के 14 ज़िलों के पदाधिकारी शामिल होंगे।
इस बैठक में:
वर्ष 2012 के बाद से कांग्रेस वेस्ट यूपी में लगातार चुनावी हार का सामना करती आ रही है। मुस्लिम, दलित और जाटव वोट बैंक जिसे कभी कांग्रेस की रीढ़ कहा जाता था, वह सपा, बसपा और भाजपा में बंट चुका है।
2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में वेस्ट यूपी के अधिकांश जिलों में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया। ऐसे में पार्टी जानती है कि अगर उसे 2027 में वापसी करनी है, तो अभी से जमीनी तैयारी करनी होगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की यह नई कोशिश “लेट बट स्ट्रैटजिक” (देर से सही लेकिन रणनीतिक) है।
हालांकि, बड़ी चुनौती यह होगी कि क्या पार्टी इन नेताओं के माध्यम से कार्यकर्ताओं में जोश भर पाएगी और जनता तक अपना पुराना भरोसा लौटा पाएगी?
पूर्व मंत्री दीपक कुमार ने कहा,
"कांग्रेस पार्टी ने जो विश्वास जताया है, उस पर पूरी तरह खरा उतरने की कोशिश करूंगा। हमारा लक्ष्य है हर गांव, हर बूथ तक कांग्रेस का झंडा लहराना।"
वहीं, दानिश अली ने भी कहा कि
"पश्चिम उत्तर प्रदेश की आवाज़ बनने के लिए कांग्रेस को फिर से खड़ा करेंगे। यह सिर्फ चुनावी नहीं, सामाजिक न्याय की लड़ाई भी है।"
कांग्रेस की यह नई संगठनात्मक पहल दिखाती है कि पार्टी अब “सीट टू स्ट्रीट” की रणनीति अपनाने जा रही है – यानी उच्च स्तर की रणनीति के साथ ज़मीनी जड़ें मजबूत करना।
वेस्ट यूपी का सामाजिक तानाबाना बेहद विविध है, जहां दलित, मुस्लिम, गुर्जर, जाट, पंजाबी, वैश्य और ठाकुर समाज की भूमिका निर्णायक होती है। कांग्रेस अगर इन सभी वर्गों को एकजुट कर पाई तो यह संगठनात्मक बदलाव 2027 के चुनावों में उसे चौंकाने वाला लाभ दे सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।