रबी सीजन से पहले गेहूं, चना, सरसों, जौ समेत 6 फसलों की MSP बढ़ाने पर कैबिनेट में फैसला संभव है। नई दरों की आधिकारिक मंजूरी की पुष्टि का इंतजार है।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 30 सितंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
MSP बढ़ोतरी पर कैबिनेट की नजर
रबी सीजन की बुवाई से पहले किसानों से जुड़ी न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP व्यवस्था एक बार फिर केंद्र में है। 30 सितंबर 2026 को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट बैठक में गेहूं, चना, सरसों, जौ समेत 6 रबी फसलों की MSP बढ़ाने के प्रस्ताव पर फैसला होने की संभावना जताई गई थी। उपलब्ध रिपोर्ट में इसे संभावित कैबिनेट फैसला बताया गया है, इसलिए नई MSP दरों को अभी स्वीकृत दर के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
किन 6 फसलों पर चर्चा
जिन 6 प्रमुख रबी फसलों की MSP में संशोधन की चर्चा है, उनमें गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड एवं सरसों और कुसुम शामिल हैं। ये सभी केंद्र सरकार की घोषित MSP व्यवस्था में शामिल प्रमुख रबी फसलें हैं।
इन फसलों के लिए मौजूदा 2026-27 मार्केटिंग सीजन की MSP पहले ही निर्धारित की जा चुकी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक गेहूं की MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल, जौ की 2,150 रुपये, चने की 5,875 रुपये, मसूर की 7,000 रुपये, रेपसीड एवं सरसों की 6,200 रुपये और कुसुम की 6,540 रुपये प्रति क्विंटल है।
मौजूदा MSP में पहले ही हुई थी बढ़ोतरी
सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए इन सभी 6 रबी फसलों की MSP में पिछले सीजन के मुकाबले बढ़ोतरी की थी। गेहूं की MSP में 160 रुपये प्रति क्विंटल, जौ में 170 रुपये, चने में 225 रुपये, मसूर में 300 रुपये, रेपसीड एवं सरसों में 250 रुपये और कुसुम में 600 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई थी।
इनमें कुसुम की बढ़ोतरी 600 रुपये प्रति क्विंटल रही, जो इन 6 फसलों में सबसे अधिक थी। मसूर के MSP में 300 रुपये का इजाफा हुआ था।
MSP का आधार क्या है
सरकार के अनुसार MSP तय करते समय कृषि लागत एवं मूल्य आयोग यानी CACP की सिफारिशों पर विचार किया जाता है। इसके साथ राज्य सरकारों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों की राय भी प्रक्रिया का हिस्सा होती है।
केंद्र सरकार ने 2018-19 के बजट में MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना स्तर पर रखने का सिद्धांत घोषित किया था। सरकार के अनुसार 2018-19 के बाद से अधिसूचित खरीफ, रबी और अन्य वाणिज्यिक फसलों की MSP इसी न्यूनतम 50% मार्जिन के सिद्धांत को ध्यान में रखकर तय की जाती रही है।
मौजूदा MSP और उत्पादन लागत का अंतर
2026-27 के आधिकारिक आंकड़ों में गेहूं की उत्पादन लागत 1,239 रुपये प्रति क्विंटल और MSP 2,585 रुपये है। चने की उत्पादन लागत 3,699 रुपये और MSP 5,875 रुपये है।
मसूर की उत्पादन लागत 3,705 रुपये के मुकाबले MSP 7,000 रुपये है। रेपसीड एवं सरसों की उत्पादन लागत 3,210 रुपये और MSP 6,200 रुपये है। कुसुम की उत्पादन लागत 4,360 रुपये के मुकाबले MSP 6,540 रुपये है। जौ के लिए उत्पादन लागत 1,361 रुपये और MSP 2,150 रुपये निर्धारित है।
सरकार के आंकड़ों में कितना मार्जिन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2026-27 के लिए गेहूं पर उत्पादन लागत के मुकाबले MSP का मार्जिन 109%, जौ पर 58%, चने पर 59%, मसूर पर 89%, रेपसीड एवं सरसों पर 93% और कुसुम पर 50% है। ये प्रतिशत सरकार द्वारा इस्तेमाल किए गए उत्पादन लागत के आधार पर हैं।
इस आंकड़े को किसान की वास्तविक आय या मुनाफे के बराबर मानना उचित नहीं होगा। खेती की जमीन, मजदूरी, सिंचाई, स्थानीय मंडी, परिवहन, भंडारण और बिक्री की वास्तविक स्थिति अलग-अलग इलाकों में बदलती है।
MSP बढ़ने से किसान को क्या असर होगा
MSP में बढ़ोतरी का सीधा असर उस कीमत पर पड़ता है जिस पर सरकार अधिसूचित फसलों की खरीद करती है। लेकिन MSP और किसान को मिलने वाली वास्तविक बाजार कीमत एक ही चीज नहीं हैं।
सरकारी व्यवस्था में खरीद एजेंसियां तब खरीद करती हैं जब संबंधित फसल और खरीद व्यवस्था के लिए निर्धारित शर्तें पूरी होती हैं। इसलिए केवल MSP घोषित होने से हर किसान को अपनी पूरी उपज उसी कीमत पर बेचने की गारंटी नहीं बनती।
यही वजह है कि MSP का वास्तविक असर समझने के लिए घोषित दर के साथ सरकारी खरीद, मंडी कीमत, खरीद केंद्रों की उपलब्धता और किसान की बाजार तक पहुंच को भी देखना जरूरी है। सरकार ने अगस्त 2026 में भी स्पष्ट किया था कि कुल कृषि उत्पादन में से बाजार योग्य अधिशेष का वह हिस्सा सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदा जाता है जो संबंधित खरीद व्यवस्था के दायरे में आता है।
रबी सीजन से पहले क्यों अहम है फैसला
रबी फसलों की बुवाई आम तौर पर खरीफ सीजन के बाद शुरू होती है। इस समय किसान बीज, खाद, सिंचाई और अन्य इनपुट पर खर्च का आकलन करते हैं।
ऐसे में MSP में संभावित बदलाव किसानों के फसल चयन और खेती की लागत के अनुमान को प्रभावित कर सकता है। खासकर गेहूं, दलहन और तिलहन जैसी फसलों के मामले में MSP का संकेत बाजार और उत्पादन संबंधी फैसलों के लिए महत्वपूर्ण होता है।
हालांकि किसी नई MSP दर के वास्तविक असर का आकलन तब ही किया जा सकेगा जब कैबिनेट की आधिकारिक मंजूरी, नई दर और उसके लागू होने की तारीख स्पष्ट हो जाए।
किसानों के लिए सिर्फ MSP ही मुद्दा नहीं
कृषि क्षेत्र में MSP एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, लेकिन किसानों की आमदनी पर इसका असर कई दूसरे कारकों से भी जुड़ा है।
उत्पादन लागत, डीजल और बिजली खर्च, उर्वरक की कीमत, सिंचाई, मौसम, मंडी की स्थिति, भंडारण सुविधा, परिवहन लागत और फसल की वास्तविक खरीद, सभी मिलकर किसान की आय तय करते हैं।
इसलिए MSP में बढ़ोतरी को किसानों की आय में उसी अनुपात में बढ़ोतरी के रूप में पेश करना आंकड़ों के लिहाज से सही नहीं होगा। वास्तविक फायदा खरीद की मात्रा और किसानों को मिलने वाली कीमत पर निर्भर करेगा।
सरकार की मौजूदा MSP नीति
केंद्र सरकार 22 अधिसूचित कृषि फसलों के लिए हर साल MSP तय करती है। इनमें खरीफ, रबी और कुछ वाणिज्यिक फसलें शामिल हैं।
2026-27 में 14 खरीफ फसलों की MSP में भी बढ़ोतरी की गई थी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार खरीफ फसलों में सूरजमुखी बीज के MSP में 622 रुपये प्रति क्विंटल की सबसे बड़ी पूर्ण बढ़ोतरी की गई थी। कपास में 557 रुपये, नाइजरसीड में 515 रुपये और तिल में 500 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
आगे क्या होगा
30 सितंबर 2026 की कैबिनेट बैठक में यदि रबी MSP बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है तो सरकार नई दरों की आधिकारिक जानकारी जारी करेगी। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि 6 फसलों की MSP में कितनी बढ़ोतरी हुई और नई दर किस मार्केटिंग सीजन के लिए लागू होगी।
जब तक आधिकारिक अधिसूचना सामने नहीं आती, प्रस्तावित बढ़ोतरी के बारे में किसी निश्चित राशि या नई MSP को अंतिम दर बताना जल्दबाजी होगी।
रबी सीजन से पहले 6 प्रमुख फसलों की MSP पर संभावित बढ़ोतरी किसानों के लिए अहम नीति अपडेट है। मौजूदा 2026-27 MSP में गेहूं 2,585 रुपये, जौ 2,150 रुपये, चना 5,875 रुपये, मसूर 7,000 रुपये, रेपसीड एवं सरसों 6,200 रुपये और कुसुम 6,540 रुपये प्रति क्विंटल पर हैं।
अब निगाह कैबिनेट के आधिकारिक फैसले और उसके बाद जारी होने वाली नई MSP दरों पर रहेगी। अंतिम तस्वीर सरकारी घोषणा के बाद ही साफ होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।