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इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए जबरन वसूली के इल्ज़ाम में निर्मला सीतारमण के खिलाफ FIR दर्ज करने का कोर्ट का हुक्म 

None 2024-09-28 10:50:36
इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए जबरन वसूली के इल्ज़ाम में निर्मला सीतारमण के खिलाफ FIR दर्ज करने का कोर्ट का हुक्म 
बेंगलुरु कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड के ज़रिए कथित उगाही के मामले में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने का हुक्म दिया है। 

नई दिल्ली,(Shah Times) । चुनावी बॉन्ड के जरिए कथित जबरन वसूली के मामले में कोर्ट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का हुक्म दिया है।

बेंगलुरु की पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव कोर्ट ने दिया हुक्म

 यह हुक्म बेंगलुरु की पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव कोर्ट ने दिया है. जनाधिकार संघर्ष परिषद (जेएसपी) के सह अध्यक्ष आदर्श अय्यर ने बेंगलुरु कोर्ट में शिकायत दर्ज कराकर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश देने की मांग की थी।

जन अधिकार संघर्ष परिषद ने 42वीं एसीएमएम कोर्ट में याचिका दायर की

 आदर्श अय्यर ने आरोप लगाया था कि चुनावी बॉन्ड के जरिए धमकी देकर जबरन वसूली की गई. जन अधिकार संघर्ष परिषद ने पिछले साल अप्रैल में 42वीं एसीएमएम कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, ईडी के अधिकारियों, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, पार्टी के अन्य राष्ट्रीय नेताओं, भाजपा के तत्कालीन कर्नाटक अध्यक्ष नलिन कुमार कटील, बीवाई विजयेंद्र के खिलाफ शिकायत की थी।

कोर्ट ने बेंगलुरु पुलिस को चुनावी बॉन्ड के जरिए जबरन वसूली का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया

 शिकायत पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बेंगलुरु के तिलक नगर पुलिस स्टेशन को चुनावी बॉन्ड के जरिए जबरन वसूली का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया  याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बालन ने दलीलें पेश कीं। मामले की सुनवाई 10 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने 2018 में इलेक्टोरल बॉन्ड योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत सरकार का उद्देश्य राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में नकद दान को खत्म करना था, ताकि राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बनी रहे। इसके बाद लोग एसबीआई के इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए राजनीतिक दलों को चंदा दे सकते हैं। लेकिन इसका खुलासा नहीं किया जाता। पिछले साल विपक्षी दलों के आरोपों और इसके खिलाफ कई याचिकाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया था।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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