रियाद में राष्ट्रपति अहमद अल-शरा और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की मुलाक़ात, रक्षा सहयोग के साथ स्वास्थ्य, बिजली, आवास और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं पर सहमति
रियाद | 5 नवंबर 2026
By Mohd Haris
पश्चिम एशिया में बदलते राजनीतिक और सुरक्षा हालात के बीच सीरिया और सऊदी अरब ने अपने द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा देने की पहल की है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग समझौते पर दस्तख़त हुए हैं। इसके साथ ही सऊदी अरब ने युद्ध और संघर्ष से प्रभावित सीरिया के पुनर्निर्माण के लिए 403 मिलियन अमेरिकी डॉलर के रियायती कर्ज़ पर सहमति जताई है। यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब सीरिया अपनी आर्थिक व्यवस्था को दोबारा खड़ा करने, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत और क्षेत्रीय देशों के साथ कूटनीतिक रिश्तों को मज़बूत बनाने की कोशिश कर रहा है। सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने 4 नवंबर 2026 को सऊदी अरब की राजधानी रियाद का दौरा किया। इस दौरान उनकी मुलाक़ात सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से हुई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की। मुलाक़ात के दौरान रक्षा और विकास संबंधी कई समझौतों पर दस्तख़त किए गए।
रक्षा सहयोग समझौते से दोनों देशों के रिश्तों में नया मोड़
सीरिया और सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालयों के बीच हुआ समझौता इस यात्रा के सबसे अहम घटनाक्रमों में शामिल है। सीरिया के विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। हालांकि, समझौते की विस्तृत शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि इसके तहत सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा तकनीक, ख़ुफ़िया जानकारी के आदान-प्रदान या संयुक्त सुरक्षा गतिविधियों में से किन क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। रक्षा सहयोग समझौते का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि सीरिया लंबे संघर्ष के बाद अपनी क्षेत्रीय कूटनीतिक स्थिति को दोबारा स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। सऊदी अरब के साथ औपचारिक रक्षा सहयोग उसके बढ़ते क्षेत्रीय संपर्कों का संकेत देता है।
सीरिया के पुनर्निर्माण के लिए 403 मिलियन डॉलर की वित्तीय मदद
रियाद में रक्षा सहयोग के साथ आर्थिक पुनर्निर्माण को भी प्राथमिकता दी गई। सऊदी विकास कोष और सीरिया के वित्त मंत्रालय के बीच 6 समझौतों के तहत कुल 403 मिलियन अमेरिकी डॉलर के रियायती कर्ज़ पर सहमति बनी। यह वित्तीय सहायता सीरिया में युद्ध और संघर्ष से प्रभावित सार्वजनिक सुविधाओं को दोबारा विकसित करने के लिए प्रस्तावित है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक़, स्वास्थ्य केंद्रों के पुनर्निर्माण के लिए 100 मिलियन डॉलर, आवासीय इमारतों की मरम्मत के लिए 60 मिलियन डॉलर और नागरिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 105 मिलियन डॉलर निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा अलेप्पो के ताप विद्युत संयंत्र से संबंधित परियोजना के लिए 90 मिलियन डॉलर और दमिश्क तथा इदलिब में पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए 30 मिलियन डॉलर का प्रावधान बताया गया है। इन 5 मदों का कुल योग 385 मिलियन डॉलर है। घोषित कुल पैकेज में शेष 18 मिलियन डॉलर के परियोजनावार आवंटन की पूरी तफ़सील उपलब्ध रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि समझौते रियायती कर्ज़ से संबंधित हैं। इन्हें बिना वापसी की शर्त वाले अनुदान के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। कर्ज़ की ब्याज दर, भुगतान अवधि और धन जारी करने की समयसीमा के बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।
स्वास्थ्य, बिजली और आवास की बहाली पर विशेष ध्यान
सीरिया में वर्षों तक चले संघर्ष ने देश की सार्वजनिक सेवाओं और बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। अनेक इलाक़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं, बिजली आपूर्ति, आवासीय इमारतों और पेयजल व्यवस्था के पुनर्निर्माण की आवश्यकता बनी हुई है। ऐसे हालात में सऊदी अरब की ओर से घोषित वित्तीय सहयोग नागरिक सेवाओं की बहाली के लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत से प्रभावित इलाक़ों में चिकित्सा सेवाओं के विस्तार का रास्ता खुल सकता है। इसी तरह आवासीय परियोजनाएं क्षतिग्रस्त इमारतों की बहाली में मददगार हो सकती हैं। अलेप्पो में बिजली उत्पादन से संबंधित परियोजना भी अहम है। बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता उद्योग, कारोबार, अस्पतालों और घरेलू जीवन से सीधे जुड़ी हुई है। दमिश्क और इदलिब में पेयजल परियोजनाओं के लिए घोषित वित्तीय सहायता भी नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम है।
क्या क्षेत्रीय रक्षा गठबंधन में शामिल होगा सीरिया?
सीरिया और सऊदी अरब के बीच रक्षा सहयोग समझौता ऐसे समय हुआ है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा साझेदारियों को लेकर भी बातचीत जारी है।
सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी ने बहरीन में आयोजित मनामा डायलॉग के दौरान संकेत दिया था कि उनकी सरकार सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान से संबंधित प्रस्तावित रक्षा सहयोग व्यवस्था में शामिल होने की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रही है। इस बयान के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में सीरिया की संभावित भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ी है। हालांकि, सीरिया की किसी नए बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन में औपचारिक सदस्यता की पुष्टि नहीं हुई है। रियाद में हुआ समझौता सऊदी अरब और सीरिया के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग से संबंधित है। इसलिए प्रस्तावित क्षेत्रीय गठबंधन और मौजूदा द्विपक्षीय समझौते को अलग-अलग घटनाक्रम के रूप में समझना आवश्यक है।
लाल सागर और होर्मुज की सुरक्षा पर भी बातचीत
रियाद में दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर भी विचार-विमर्श हुआ।
सीरिया के विदेश मंत्रालय से संबंधित प्रकाशित जानकारी के मुताबिक़, बातचीत में लाल सागर, बाब अल-मंदेब और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया। ये समुद्री रास्ते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस का बड़े पैमाने पर परिवहन होता है, जबकि बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच समुद्री आवाजाही का अहम मार्ग है।
दोनों पक्षों ने समुद्री व्यापार को ख़तरे में डालने वाली गतिविधियों को रोकने और क्षेत्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर ज़ोर दिया।
दिसंबर 2024 के बाद सीरिया-सऊदी रिश्तों में बढ़ी सक्रियता
सीरिया में दिसंबर 2024 के दौरान बशर अल-असद की सत्ता समाप्त होने के बाद देश की राजनीतिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया था। इसके बाद अहमद अल-शरा के नेतृत्व में नई हुकूमत ने क्षेत्रीय देशों के साथ संबंधों को दोबारा व्यवस्थित करने की कोशिशें तेज़ कीं। सऊदी अरब इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में सामने आया है। अहमद अल-शरा की नवंबर यात्रा से पहले भी दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क हुए थे। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक़, 6 अक्टूबर 2026 को भी अल-शरा और मोहम्मद बिन सलमान की मुलाक़ात हुई थी। उस दौरान सीरिया के क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे और आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं के पुनर्निर्माण पर चर्चा हुई थी।
अब नवंबर में हुए समझौतों ने आर्थिक सहयोग के साथ रक्षा संबंधों को भी औपचारिक स्वरूप दिया है।
कृषि, उद्योग और पर्यावरण क्षेत्र में भी समझौते
रक्षा और वित्तीय सहयोग के अतिरिक्त दोनों देशों ने औद्योगिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर भी दस्तख़त किए।
कृषि और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित 2 अन्य समझौता ज्ञापन भी हस्ताक्षरित हुए हैं।
इन समझौतों से संकेत मिलता है कि दोनों देश अपनी साझेदारी को रक्षा और पुनर्निर्माण तक सीमित रखने के बजाय आर्थिक तथा विकास संबंधी क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाना चाहते हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।