दिल्ली-NCR में 91 किमी का NH-148A कॉरिडोर DND से फरीदाबाद, सोहना और जेवर एयरपोर्ट को जोड़ेगा। 6-लेन सड़क से एयरपोर्ट और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों की कनेक्टिविटी सुधरेगी।
📍 दिल्ली-NCR
🗓️ 22 सितंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
दिल्ली-NCR के सड़क नेटवर्क में एक अहम कड़ी जुड़ने जा रही है। NH-148A का करीब 91 किमी लंबा कॉरिडोर DND फ्लाईवे से फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और सोहना होते हुए जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी देने के लिए विकसित किया जा रहा है।
यह परियोजना केवल एयरपोर्ट कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है। इसका मकसद दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम, नोएडा और आसपास के इलाकों के बीच वैकल्पिक हाईस्पीड मार्ग तैयार करना और मौजूदा व्यस्त रास्तों पर ट्रैफिक दबाव कम करना है।
प्रस्तावित कॉरिडोर का एक हिस्सा DND फ्लाईवे से सोहना तक करीब 59 किमी लंबा है। इसके बाद करीब 32 किमी का लिंक जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ जाता है।
रूट दिल्ली के DND इलाके से शुरू होकर कालिंदी कुंज, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और सोहना क्षेत्र से जुड़ता है। आगे यह प्रमुख एक्सप्रेसवे नेटवर्क से कनेक्ट होकर जेवर एयरपोर्ट की दिशा में जाता है।
कॉरिडोर को 6 लेन के एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसके साथ कई हिस्सों में 3 लेन की सर्विस रोड भी प्रस्तावित हैं।
परियोजना में एलिवेटेड सेक्शन, फ्लाईओवर, अंडरपास और रेलवे ओवरब्रिज जैसी संरचनाएं शामिल हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार DND-Faridabad-Sohna हिस्से में 8 एलिवेटेड सेक्शन समेत कई प्रमुख इंजीनियरिंग स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं।
91 किमी के पूरे कॉरिडोर की लागत ₹7084 करोड़ बताई गई है। यह आंकड़ा 2025 में सामने आई परियोजना संबंधी रिपोर्टों में इस्तेमाल हुआ था।
हालांकि, केंद्र सरकार की अलग-अलग परियोजना स्वीकृतियों में इसके घटकों की लागत अलग दिखाई देती है। मई 2026 में सरकार ने DND-Faridabad-Sohna एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के करीब 59 किमी हिस्से की अनुमानित लागत ₹4463 करोड़ बताई थी। वहीं जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी वाले करीब 31.42 किमी ग्रीनफील्ड हिस्से के लिए मार्च 2026 में संशोधित पूंजीगत लागत ₹3630.77 करोड़ स्वीकृत हुई। इसलिए ₹7084 करोड़ को पूरे 91 किमी कॉरिडोर से जुड़े पुराने या संयुक्त परियोजना आंकड़े के तौर पर देखना जरूरी है।
इस कॉरिडोर से दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली को फरीदाबाद तथा सोहना की दिशा में एक वैकल्पिक हाईस्पीड मार्ग मिलेगा।
सरकारी दस्तावेज के मुताबिक DND-Faridabad-Sohna परियोजना दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोहना के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए तैयार की जा रही है। यह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और नोएडा एयरपोर्ट की दिशा में सीधा संपर्क भी मजबूत करेगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन के साथ दिल्ली-NCR से एयरपोर्ट तक सड़क कनेक्टिविटी की जरूरत बढ़ेगी। इसी वजह से जेवर को जोड़ने वाले ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को परियोजना का अहम हिस्सा बनाया गया है।
सरकार के मुताबिक करीब 31.42 किमी का यह हिस्सा दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से एयरपोर्ट तक तेज सड़क संपर्क देगा। इसका इंटरसेक्शन ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से भी होगा।
दिल्ली-NCR में NH-2 और NH-48 जैसे प्रमुख मार्गों पर लंबे समय से भारी यातायात रहता है। नया कॉरिडोर इनके लिए वैकल्पिक रूट उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगा।
इसके अलावा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी मजबूत होने पर लंबी दूरी के यातायात को दिल्ली के अंदरूनी हिस्सों से गुजरने की जरूरत कुछ हद तक घट सकती है। हालांकि वास्तविक ट्रैफिक राहत कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने और वाहनों के रूट बदलने के बाद ही स्पष्ट होगी।
कॉरिडोर का असर सोहना और गुरुग्राम की कनेक्टिविटी पर भी पड़ेगा। DND से आने वाला ट्रैफिक फरीदाबाद और सोहना के रास्ते दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ सकेगा।
इसके साथ गुरुग्राम में अलग से सदर्न पेरिफेरल एलिवेटेड रोड परियोजना भी आगे बढ़ रही है। सरकारी और स्थानीय स्तर की योजनाओं का उद्देश्य द्वारका एक्सप्रेसवे, गुरुग्राम-सोहना हाईवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बीच संपर्क को बेहतर करना है।
DND-Faridabad-Sohna हिस्से में 140 मीटर का नेटवर्क आर्च ब्रिज भी प्रमुख संरचना है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक परियोजना में प्रीकास्ट सेगमेंटल निर्माण, लॉन्चिंग गर्डर और आधुनिक स्टील संरचनाओं जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
परियोजना का एक उद्देश्य निर्माण के साथ यातायात प्रबंधन और दीर्घकालिक संरचनात्मक मजबूती को ध्यान में रखना भी है।
ऐसा दावा फिलहाल तथ्य के तौर पर करना जल्दबाजी होगा। नया कॉरिडोर कई प्रमुख मार्गों को वैकल्पिक कनेक्टिविटी देगा, लेकिन दिल्ली-NCR का ट्रैफिक केवल एक सड़क परियोजना से खत्म नहीं होता।
वाहनों की संख्या, पीक-ऑवर ट्रैफिक, इंटरचेंज की क्षमता, स्थानीय सड़कों की स्थिति और नए एयरपोर्ट से पैदा होने वाला यातायात भी महत्वपूर्ण कारक होंगे।
इसलिए परियोजना से ट्रैफिक दबाव कम होने की उम्मीद है, लेकिन पूरे NCR को जाम से पूरी तरह मुक्त करने का आकलन कॉरिडोर के संचालन के बाद ही किया जा सकेगा।
2025 की रिपोर्टों में DND-Sohna हिस्से को अंतिम चरण में बताया गया था। 2026 में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भी परियोजना का निरीक्षण किया और इसकी प्रगति की जानकारी दी।
दिल्ली वाले हिस्से में DND से मीठापुर तक करीब 9 किमी के सेक्शन में एलिवेटेड संरचना भी परियोजना का अहम हिस्सा है। जेवर लिंक और दूसरे कनेक्शन पॉइंट पूरे होने के बाद ही पूरे कॉरिडोर का यातायात लाभ सामने आएगा।
इस परियोजना की अहमियत इसके रूट से समझी जा सकती है। एक तरफ यह दिल्ली और फरीदाबाद को जोड़ती है, दूसरी तरफ सोहना के रास्ते दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक पहुंच बनाती है। तीसरी दिशा में जेवर एयरपोर्ट के लिए सीधा संपर्क तैयार होता है।
इस तरह NH-148A को NCR के कई मौजूदा हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के बीच एक कनेक्टिविटी लिंक के रूप में देखा जा रहा है।
कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने के बाद दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम, नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के बीच सड़क संपर्क में बदलाव देखने को मिलेगा। खासकर एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों और इंटरसिटी ट्रैफिक को वैकल्पिक रूट मिलने की उम्मीद है।
लेकिन परियोजना का वास्तविक असर केवल सड़क बनने से तय नहीं होगा। इंटरचेंज, सर्विस रोड, स्थानीय कनेक्टिविटी और ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था भी उतनी ही अहम होगी।
दिल्ली-NCR की बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते वाहन दबाव के बीच 91 किमी का यह कॉरिडोर क्षेत्रीय सड़क नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण नया लिंक जोड़ रहा है। इसका सबसे बड़ा परीक्षण तब होगा, जब सड़क पूरी तरह परिचालन में आएगी और रोजमर्रा के ट्रैफिक पर इसका वास्तविक असर सामने आएगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।