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दिल्ली: UPSC शताब्दी समारोह में बोले PM मोदी, नागरिक हित को सर्वोपरि रखकर काम करने पर जोर

Mohammad Naved • 2026-10-01 11:56:53
दिल्ली: UPSC शताब्दी समारोह में बोले PM मोदी, नागरिक हित को सर्वोपरि रखकर काम करने पर जोर

  • दिल्ली: UPSC के 100 साल पूरे, PM मोदी ने नागरिक-केंद्रित प्रशासन पर दिया जोर

  • UPSC शताब्दी समारोह में PM मोदी का संदेश, समय के साथ संस्थागत बदलाव जरूरी

  • दिल्ली: PM मोदी बोले, लोकसेवा में नागरिक हित और दायित्व सबसे अहम


  • 📍 दिल्ली

    🗓️ 1 अक्टूबर 2026

    ✍️ Mohd Naved


    UPSC के 100 साल पूरे होने पर दिल्ली में शताब्दी समारोह

    नई दिल्ली के भारत मंडपम में 1 अक्टूबर 2026 को संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC के शताब्दी समारोह का आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम में शामिल हुए और सभा को संबोधित किया। यह आयोजन आयोग की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सालभर चले समारोहों का समापन है। PM India

    UPSC की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को भारत के पहले Public Service Commission के रूप में हुई थी। स्वतंत्र भारत में इसकी भूमिका संवैधानिक ढांचे के तहत विकसित हुई और आयोग केंद्र सरकार की विभिन्न सेवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण संस्था बन गया।


    प्रधानमंत्री ने लोकसेवा और नागरिक हित पर दिया जोर

    समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसेवा को नागरिकों के जीवन से जोड़कर देखने की जरूरत पर जोर दिया। प्रधानमंत्री के सार्वजनिक प्रशासन से जुड़े पहले के संबोधनों में भी नागरिकों को शासन के केंद्र में रखने की बात प्रमुख रही है।

    प्रधानमंत्री ने पहले Civil Services Day के संबोधन में अधिकारियों से नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता देने और प्रशासन में मानवीय संवेदनशीलता बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने “नागरिक देवो भव” को प्रशासनिक सोच का महत्वपूर्ण आधार बताया था। PM India

    इसी व्यापक प्रशासनिक दृष्टिकोण के तहत नागरिक हित, जवाबदेही और सेवा भावना को लोकसेवा की बुनियादी जिम्मेदारी के रूप में रेखांकित किया जाता रहा है।


    UPSC की भूमिका की सराहना

    UPSC भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में चयन और भर्ती की एक प्रमुख संवैधानिक संस्था है। इसके जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय विदेश सेवा सहित कई केंद्रीय सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है।

    शताब्दी समारोह ऐसे समय आयोजित हुआ जब आयोग अपनी संस्थागत यात्रा के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक समारोह में राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और UPSC से जुड़े अधिकारी शामिल हुए। PM India


    समय के साथ संस्थागत बदलाव की जरूरत

    UPSC की 100 साल की यात्रा में प्रशासनिक जरूरतों, तकनीक और भर्ती व्यवस्था में कई बदलाव आए हैं। बदलते दौर में लोकसेवा की भूमिका भी अधिक जटिल हुई है।

    प्रधानमंत्री ने अलग-अलग प्रशासनिक मंचों पर सिविल सर्विस में लगातार सुधार की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने तकनीक, डेटा आधारित निर्णय और विभागों के बीच बेहतर समन्वय को आधुनिक प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण बताया है। PM India

    इसका व्यापक संदर्भ यह है कि आज प्रशासन से केवल नियमों के पालन की अपेक्षा नहीं होती। नागरिक सेवाओं की पहुंच, निर्णय लेने की गति, पारदर्शिता और जवाबदेही भी शासन की गुणवत्ता से जुड़ी अहम कसौटियां हैं।


    1926 से संवैधानिक संस्था तक का सफर

    UPSC की संस्थागत यात्रा 1926 में शुरू हुई। स्वतंत्रता से पहले Public Service Commission की भूमिका अलग प्रशासनिक ढांचे में थी। संविधान लागू होने के बाद संघ लोक सेवा आयोग को संवैधानिक दर्जा मिला।

    एक सदी के दौरान आयोग की भर्ती प्रणाली में बदलाव हुए। परीक्षा व्यवस्था, तकनीकी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप आयोग की कार्यप्रणाली में भी परिवर्तन हुआ।

    शताब्दी समारोह इसी दीर्घकालिक संस्थागत यात्रा को रेखांकित करने का अवसर बना है।


    शताब्दी समारोह में स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी

    प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने UPSC शताब्दी के अवसर पर स्मारक सिक्का और स्मारक डाक टिकट जारी किया। इसके अलावा “100 Landmark Judgements - Shaping the Policies of UPSC and Public Service Commissions in India” नामक पुस्तक भी जारी की गई। PM India

    यह कार्यक्रम 2 दिवसीय आयोजन का हिस्सा था। इसका पहला दिन 30 सितंबर को “शताब्दी समारोह - मंथन” के रूप में आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न विषयों पर वक्तव्य और पैनल चर्चा हुई। Press Information Bureau


    नागरिक-केंद्रित प्रशासन क्यों महत्वपूर्ण है

    लोकसेवा में नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण का सीधा संबंध सरकारी सेवाओं की पहुंच और प्रशासनिक जवाबदेही से है। जब सरकारी संस्थाएं नागरिकों को सेवा के केंद्र में रखती हैं, तो नीतियों और प्रशासनिक फैसलों के असर को आम लोगों के नजरिए से परखा जाता है।

    प्रधानमंत्री ने जून 2026 में IAS अधिकारी प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत के दौरान भी “नागरिक देवो भव” पर जोर दिया था। उन्होंने अधिकारियों से नागरिकों को शासन के केंद्र में रखने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की बात कही थी। Press Information Bureau

    यह संदेश UPSC जैसी भर्ती संस्था के संदर्भ में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी प्रक्रिया के जरिए प्रशासनिक तंत्र में बड़ी संख्या में अधिकारी प्रवेश करते हैं।


    तकनीक और प्रशासनिक क्षमता पर जोर

    आधुनिक शासन में डिजिटल सिस्टम, डेटा और Artificial Intelligence की भूमिका लगातार बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े अपने हालिया संबोधनों में तकनीक और डेटा की समझ को बेहतर निर्णय प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण बताया है। PM India

    हालांकि तकनीकी बदलाव के साथ मानवीय निर्णय और संवेदनशीलता की भूमिका भी बनी रहती है। प्रधानमंत्री ने Civil Services Day के संबोधन में अधिकारियों से तकनीक आधारित प्रशासन के साथ मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखने की अपील की थी। PM India


    UPSC के सामने आगे की चुनौतियां

    UPSC के अगले चरण में भर्ती प्रक्रिया को बदलती प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप बनाए रखना एक प्रमुख विषय रहेगा। तकनीकी बदलाव, नई तरह की सरकारी सेवाएं और बढ़ती प्रशासनिक जटिलताएं आयोग के सामने नई जरूरतें पैदा कर रही हैं।

    साथ ही परीक्षा और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और अभ्यर्थियों के भरोसे को बनाए रखना भी संस्थागत जिम्मेदारी का हिस्सा है।

    शताब्दी समारोह केवल अतीत की उपलब्धियों का स्मरण नहीं है। यह अगले दौर की भर्ती व्यवस्था और लोकसेवा की बदलती भूमिका पर विचार का अवसर भी है।


    आगे क्या

    UPSC की शताब्दी के बाद आयोग के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही रहेगा कि वह बदलती प्रशासनिक जरूरतों के साथ अपनी प्रक्रियाओं को किस तरह विकसित करता है।

    सरकारी भर्ती व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने के साथ परीक्षा सुरक्षा, डेटा संरक्षण, पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

    लोकसेवा में चयनित अधिकारियों से नागरिक-केंद्रित प्रशासन की अपेक्षा भी बढ़ रही है। ऐसे में UPSC की भूमिका केवल भर्ती तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था में आने वाली नई पीढ़ी के चयन के जरिए शासन की गुणवत्ता से भी जुड़ती है।


    UPSC के 100 वर्ष पूरे होना भारतीय लोकसेवा व्यवस्था के इतिहास में एक महत्वपूर्ण संस्थागत पड़ाव है। दिल्ली के भारत मंडपम में हुए शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयोग की भूमिका, लोकसेवा और नागरिक-केंद्रित प्रशासन पर जोर दिया।

    प्रधानमंत्री के पहले के प्रशासनिक संबोधनों में भी “नागरिक देवो भव”, तकनीक, डेटा, जवाबदेही और सुधार को प्रमुखता दी गई है। PM India

    अब UPSC के अगले 100 वर्ष की दिशा में भर्ती व्यवस्था की निष्पक्षता, पारदर्शिता, तकनीकी क्षमता और बदलती प्रशासनिक जरूरतों के बीच संतुलन अहम रहेगा।

    वीडियो देखें

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    Mohammad Naved

    Mohammad Naved

    Shah Times Reporter

    शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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