दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई अभियोजन पक्ष के अनुरोध पर टल गई। अब 30 सितंबर को मामले की सुनवाई होगी।
📍 नई दिल्ली 🗓️ 21 सितंबर 2026 ✍️ Mohd Naved
दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत के लिए अभी और इंतज़ार करना होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दोनों की जमानत अर्जियों पर होने वाली सुनवाई स्थगित कर दी। अदालत ने अब मामले को 30 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुरोध पर टली सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ में न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट शामिल थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक ने समय मांगा। बताया गया कि मामले में मुख्य दलील रखने वाले अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू अस्वस्थ हैं। इसके बाद अदालत ने सुनवाई आगे बढ़ा दी।
अब दोनों जमानत अर्जियों पर 30 सितंबर को सुनवाई होगी। इस मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम ने निचली अदालत से जमानत नहीं मिलने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है।
निचली अदालत ने जुलाई में जमानत खारिज की थी
कड़कड़डूमा अदालत ने 4 जुलाई को उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जियां खारिज कर दी थीं। दोनों ने लंबी हिरासत और मुकदमे की प्रक्रिया में देरी को अपनी दलीलों का अहम आधार बनाया था। निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि वह सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के मद्देनज़र दोनों को जमानत देने की स्थिति में नहीं है।
इसके बाद दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाईकोर्ट में दाखिल अर्जियां राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम की संबंधित धारा के तहत दायर की गई हैं और इनमें जुलाई के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है।
मामला किससे जुड़ा है
यह मामला वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ी कथित बड़ी साजिश की जांच से संबंधित है। पुलिस ने इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम समेत कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। प्राथमिकी की जांच दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा कर रही है।
पुलिस का आरोप है कि हिंसा के पीछे व्यापक साजिश थी। यह आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट में पहले क्या हुआ
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया था। उसी मामले में अदालत ने पांच अन्य आरोपियों को शर्तों के साथ जमानत दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में आरोपियों की कथित भूमिका और मामले में उनकी स्थिति को अलग-अलग आधार पर देखा गया था।
बाद में जमानत और लंबी हिरासत से जुड़े कानूनी सवालों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग पीठों के दृष्टिकोण को लेकर भी बहस सामने आई। दिल्ली हाईकोर्ट की रिपोर्टेड कार्यवाही के मुताबिक, यूएपीए मामलों में लंबे समय तक मुकदमे में देरी और जमानत के सिद्धांतों से जुड़े सवाल को बड़ी पीठ के समक्ष भेजे जाने की स्थिति बनी।
दिल्ली हाईकोर्ट में अब क्या होगा
30 सितंबर की सुनवाई में दोनों आरोपियों की जमानत अर्जियों पर पक्षकार अपनी दलीलें रखेंगे। अभियोजन पक्ष पहले ही दोनों अर्जियों का विरोध कर चुका है। अगस्त में दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में दाखिल जवाब में इन नई जमानत अर्जियों को चुनौती दी थी। पुलिस ने दोनों को मामले में कथित मुख्य साजिशकर्ताओं के तौर पर पेश किया था। ये अभियोजन पक्ष के आरोप हैं, जिनका अंतिम निर्धारण मुकदमे के दौरान होगा।
इस मामले में अदालत के सामने एक अहम सवाल लंबी हिरासत और मुकदमे की प्रगति से जुड़ा है। दूसरी तरफ अभियोजन पक्ष मामले की कथित साजिश और यूएपीए के तहत लागू कानूनी कसौटियों पर जोर दे रहा है। दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर अदालत आगे की कार्यवाही तय करेगी।
मुकदमे की देरी भी अहम मुद्दा
उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से पहले यह दलील दी गई थी कि वे लंबे समय से हिरासत में हैं और मुकदमे की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इसी आधार पर उन्होंने जमानत की मांग की थी। जून में दोनों ने निचली अदालत का रुख किया था और 4 जुलाई को उनकी अर्जियां खारिज कर दी गई थीं।
इस पूरे कानूनी विवाद में एक तरफ व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मुकदमे में देरी का सवाल है। दूसरी तरफ यूएपीए के तहत जमानत के लिए लागू कठोर कानूनी मानदंड और अभियोजन पक्ष के आरोप हैं। अदालत को इन दोनों पहलुओं पर कानून के मुताबिक विचार करना है।
30 सितंबर पर रहेगी नजर
अब इस मामले की अगली अहम तारीख 30 सितंबर है। उस दिन दिल्ली हाईकोर्ट में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जियों पर सुनवाई होगी। सोमवार की कार्यवाही में अदालत ने केवल सुनवाई स्थगित की है। इस स्तर पर जमानत को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
मामले की अगली सुनवाई यह स्पष्ट करेगी कि हाईकोर्ट दोनों आरोपियों की जमानत अर्जियों पर क्या कानूनी रुख अपनाता है। जब तक अदालत कोई आदेश नहीं देती, दोनों की जमानत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
दिल्ली दंगा साजिश मामले की सुनवाई लंबे समय से कानूनी और संवैधानिक बहस का विषय रही है। आने वाली कार्यवाही में अदालत को जमानत, लंबी हिरासत, मुकदमे की प्रगति और यूएपीए की कानूनी कसौटियों से जुड़े पक्षों पर विचार करना होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।