नेपाल के उत्तरी हिस्से में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल में 157 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी तीन लोगों की जान गई है। सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में सेना, पुलिस और राहत दलों का बचाव अभियान जारी है।
📍 Location :काठमांडू/रसुवा, नेपाल
📰 तारीख: 27 अगस्त 2026
✍️ Apurva Choudhary
अचानक आई बाढ़ ने मचाई तबाही
नेपाल के उत्तरी हिस्से में बुधवार को अचानक आई तेज बाढ़ और भूस्खलन ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। पानी, मिट्टी और चट्टानों के तेज बहाव ने घरों, सड़कों, पुलों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। रसुवा और आसपास के हिमालयी इलाकों में स्थिति सबसे गंभीर बताई जा रही है। कई जगह सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे राहत और बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
मृतकों की संख्या बढ़ी
नेपाल में प्राकृतिक आपदा से 157 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं सीमा पार तिब्बत क्षेत्र में भी तीन लोगों की जान गई है। इस तरह मृतकों का कुल आंकड़ा 160 से ऊपर पहुंच गया है।
बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। राहत एवं बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
भारतीय नागरिकों को लेकर चिंता
आपदा के बाद नेपाल में मौजूद कई भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल पहुंचे यात्रियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई रास्ते प्रभावित होने से यात्रियों की आवाजाही भी मुश्किल हो गई है। भारतीय अधिकारियों की ओर से प्रभावित नागरिकों की जानकारी जुटाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
भूस्खलन के बाद आई तेज बाढ़
पहाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चट्टानों और मलबे के खिसकने से नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ। इसके बाद पानी का दबाव बढ़ने से अचानक तेज बाढ़ की स्थिति पैदा हुई।
हिमालयी इलाकों में इस तरह की घटनाएं बेहद खतरनाक हो सकती हैं, क्योंकि संकरी घाटियों और पहाड़ी भूगोल के कारण पानी और मलबा बहुत तेजी से नीचे की ओर आता है।
सड़क और पुलों को भारी नुकसान
बाढ़ के तेज बहाव में कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। कुछ इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। सड़क संपर्क टूटने से प्रभावित लोगों तक भोजन, दवाइयां और दूसरी जरूरी वस्तुएं पहुंचाना चुनौती बन गया है। राहत दल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में जुटे हैं।
सेना और पुलिस का बचाव अभियान
नेपाल की सेना, पुलिस और राहत दल लगातार तलाशी और बचाव अभियान चला रहे हैं। खराब मौसम, तेज बहाव और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।
फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, घायलों को चिकित्सा सहायता और प्रभावित परिवारों तक जरूरी राहत पहुंचाना है।
दोबारा बाढ़ का खतरा
प्रभावित पहाड़ी इलाकों में खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मलबे और पानी के प्राकृतिक प्रवाह में बने अवरोधों के कारण अचानक दोबारा बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है।
इसी वजह से संवेदनशील इलाकों की निगरानी बढ़ाई गई है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रह
नेपाल में आई यह बाढ़ और भूस्खलन बड़ी प्राकृतिक त्रासदी में बदल गई है। 160 से ज्यादा मौतें और सैकड़ों लोगों के लापता होने से आपदा की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को ढूंढना और दुर्गम इलाकों तक राहत पहुंचाना है। बचाव अभियान जारी है और आने वाले घंटों में नुकसान की वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।