दिल्ली में दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट के दौरान दिए गए बयान ने पुराने विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया। अभिजीत दीपके ने जवाब में सम्मान जताया और मतभेद खत्म करने की अपील की।
नई दिल्ली | 31 अक्टूबर 2026
By Mohd Haris
दिल्ली कॉन्सर्ट में दिलजीत दोसांझ का बयान, पुराना विवाद फिर चर्चा में
नई दिल्ली। मशहूर पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 की शाम जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित कॉन्सर्ट के दौरान उन्होंने अपने प्रशंसकों को संगीत के साथ एक ऐसा संदेश दिया, जिसे उनके पुराने विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, दिलजीत ने मंच से पंजाबी समुदाय की पहचान और संघर्ष का ज़िक्र किया। उन्होंने किसी व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को सीजेपी और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ पहले हुए मतभेद से जोड़कर देखा गया।
'पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ', मंच से क्या बोले दिलजीत?
कॉन्सर्ट के दौरान दिलजीत ने प्रशंसकों के प्रति मोहब्बत और समर्थन का इज़हार किया। उन्होंने अपने पुराने बयान 'मैं एक कलाकार हूं' का भी ज़िक्र किया।
उनके संदेश का सबसे चर्चित हिस्सा था:
पंजाबियों को लड़ना कैसे है, यह मत सिखाओ।
यह पंजाबी में दिए गए उनके बयान का हिंदी भावार्थ है।
इस टिप्पणी को सोशल मीडिया पर पुराने विवाद के संदर्भ में देखा गया। हालांकि, दिलजीत ने मंच से अभिजीत दीपके या सीजेपी का नाम लेकर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई थी?
रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में दिल्ली में सीजेपी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिलजीत से उनकी प्रतिक्रिया पूछी गई थी।
बताया गया कि इंस्टाग्राम लाइव के दौरान उन्होंने विरोध प्रदर्शनों से दूर रहने की इच्छा जताई थी। उनका कहना था कि वह एक कलाकार हैं, राजनेता नहीं।
दिलजीत के इस रुख से सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नाराज़गी ज़ाहिर की थी। उनका मानना था कि सामाजिक मुद्दों पर आवाज़ उठाने वाले कलाकार से अधिक स्पष्ट समर्थन की उम्मीद थी। बाद में दिलजीत ने राजधानी में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना भी की थी।
अभिजीत दीपके का जवाब, 'मिट्टी पाओ' कहकर सुलह की अपील
दिलजीत के कॉन्सर्ट का बयान चर्चा में आने के बाद अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की।
उन्होंने पंजाबी में 'मिट्टी पाओ' कहते हुए पुराने मतभेद भुलाने की अपील की।
दीपके ने अपने संदेश में कहा कि जून में दिलजीत की टिप्पणी से उन्हें दुख पहुंचा था, लेकिन कलाकार के प्रति उनका सम्मान पहले जैसा ही है।
उन्होंने यह भी बताया कि मई में अमेरिका के शिकागो शहर में दिलजीत के कॉन्सर्ट में शामिल हुए थे। उनके मुताबिक, वह दिलजीत के संगीत के साथ उनके व्यक्तित्व और सांस्कृतिक पहचान के भी प्रशंसक रहे हैं।
दीपके ने दिलजीत से उन्हें छोटा भाई समझकर पुरानी बात खत्म करने की गुज़ारिश की।
संगीत, सामाजिक मुद्दे और कलाकार की ज़िम्मेदारी पर बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने कलाकारों की सामाजिक ज़िम्मेदारी से जुड़ा एक अहम सवाल फिर सामने रखा है।
एक नज़रिया यह है कि लोकप्रिय कलाकारों का सार्वजनिक मुद्दों पर रुख सामाजिक बहस को प्रभावित करता है। दूसरी तरफ, कलाकारों को यह अधिकार भी है कि वे तय करें कि किस राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन में अपनी भागीदारी दर्ज करानी है।
दिलजीत का शुरुआती बयान इसी दूसरे पक्ष से जुड़ा दिखाई देता है, जबकि दीपके की नाराज़गी सामाजिक मुद्दों पर कलाकारों से अपेक्षित समर्थन को लेकर थी।
हालिया घटनाक्रम में खास बात यह है कि दीपके ने आलोचना जारी रखने के बजाय सुलह का संदेश दिया है।
कॉन्सर्ट के आखिर में भी दिखा पंजाबी पहचान का संदेश
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली कॉन्सर्ट का समापन लेज़र डिस्प्ले के साथ हुआ।
इस दौरान 'मैं हूं पंजाब' और 'मैं एक कलाकार हूं' जैसे संदेश प्रदर्शित किए गए।
इससे कॉन्सर्ट में दिलजीत की कलात्मक और सांस्कृतिक पहचान का संदेश प्रमुखता से सामने आया।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।