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दिल्ली में PM मोदी ने अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन का किया उद्घाटन, 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि जुटे
Mohammad Naved
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2026-09-19 11:47:24
📍 नई दिल्ली | 🗓️ 19 सितंबर 2026 | ✍️ Mohd Naved
PM मोदी ने विज्ञान भवन में पर्यावरण और जलवायु गतिकी के भविष्य पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन में 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि शामिल हुए।
दिल्ली में पर्यावरण और जलवायु पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शनिवार को पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अहम सवालों पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श शुरू हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “पर्यावरण और जलवायु गतिकी का भविष्य” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन राष्ट्रीय हरित अधिकरण की ओर से 19 और 20 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है।
सम्मेलन में पर्यावरण विशेषज्ञों, न्यायपालिका, सरकारी अधिकारियों और नीति से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसका प्रमुख उद्देश्य पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए न्यायिक दृष्टिकोण, वैज्ञानिक जानकारी और पर्यावरणीय शासन से जुड़े अनुभवों का आदान-प्रदान करना है।
पर्यावरणीय शासन पर केंद्रित है सम्मेलन
राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अनुसार सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़े ऐसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है, जहां नीति निर्माण, उसके क्रियान्वयन और प्रवर्तन के बीच अंतर दिखाई देता है। अलग-अलग देशों और संस्थानों के अनुभवों के आधार पर पर्यावरणीय शासन को मजबूत करने के रास्तों पर विचार किया जा रहा है।
इस विमर्श में पर्यावरण संरक्षण को केवल प्रशासनिक या वैज्ञानिक मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि न्यायिक और संस्थागत पहलू से भी देखने पर जोर है। सम्मेलन में विभिन्न न्यायिक व्यवस्थाओं के अनुभव साझा किए जा रहे हैं, ताकि पर्यावरणीय मामलों में संस्थागत सहयोग और जवाबदेही को मजबूत किया जा सके।
17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधियों की भागीदारी
सम्मेलन में भारत के सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के अलावा जिला अदालतों के न्यायाधीश, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी हिस्सा ले रहे हैं। राज्य न्यायिक अकादमियों, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों, राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियों, राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरणों और राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी सम्मेलन को व्यापक संस्थागत संदर्भ देती है। इसका फोकस अलग-अलग न्यायिक व्यवस्थाओं में पर्यावरण संबंधी मामलों से जुड़े अनुभवों और कार्यप्रणालियों को साझा करने पर है।
उद्घाटन सत्र में प्रमुख हस्तियां मौजूद
उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव मौजूद रहे।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सम्मेलन को पर्यावरण न्याय और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक मंच के रूप में रखा है। इसके तहत पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, विकास और न्याय के बीच संबंधों पर भी चर्चा हो रही है।
जलवायु न्याय और समानता पर भी चर्चा
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में जलवायु न्याय, समानता और समावेशन जैसे विषय भी शामिल हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार एक सत्र का उद्देश्य जलवायु कार्रवाई को अधिकार आधारित और समावेशी दृष्टिकोण से देखने पर केंद्रित है। इसमें जलवायु प्रभावों की असमानता, भावी पीढ़ियों के हित और विभिन्न न्यायक्षेत्रों के बीच सहयोग जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इस तरह सम्मेलन का दायरा केवल जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक पहलुओं तक सीमित नहीं है। इसमें यह सवाल भी शामिल है कि पर्यावरणीय नीतियों का प्रभाव समाज के अलग-अलग वर्गों पर किस तरह पड़ता है और संस्थागत स्तर पर जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाए।
नीति से लेकर अमल तक चुनौती
पर्यावरणीय कानून और नीतियां बनने के बाद उनका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि उनका क्रियान्वयन और प्रवर्तन कितना प्रभावी है। सम्मेलन में इसी अंतर को एक प्रमुख विमर्श के तौर पर रखा गया है।
नीति निर्माण, प्रशासनिक अमल, निगरानी और न्यायिक समीक्षा के बीच बेहतर समन्वय पर्यावरणीय शासन की अहम कड़ी है। अलग-अलग देशों के अनुभव साझा करने से इन व्यवस्थाओं में मौजूद संस्थागत अंतर और संभावित सुधार के रास्तों पर चर्चा का आधार तैयार होता है।
सम्मेलन का अगला चरण
दो दिवसीय सम्मेलन 20 सितंबर को समाप्त होगा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के कार्यक्रम के अनुसार समापन सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की भागीदारी निर्धारित है। समापन चरण में पर्यावरणीय शासन और संस्थागत सहयोग से जुड़े विचारों और अनुभवों को आगे की दिशा देने पर फोकस रहेगा।
इस सम्मेलन का महत्व इस बात में है कि पर्यावरणीय चुनौतियों पर चर्चा को न्यायपालिका, प्रशासन, वैज्ञानिक समुदाय और अंतरराष्ट्रीय संस्थागत अनुभवों से जोड़ा गया है। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय दबावों के बढ़ते असर के बीच आने वाले वर्षों में प्रभावी नीति, मजबूत क्रियान्वयन और जवाबदेह संस्थागत व्यवस्था इस विमर्श का अहम हिस्सा बनी रहेगी।
दिल्ली में शुरू हुआ यह सम्मेलन पर्यावरण और जलवायु से जुड़े सवालों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के न्यायिक और संस्थागत संवाद के लिए मंच प्रदान कर रहा है। 17 देशों की भागीदारी और भारतीय न्यायपालिका, प्रशासन तथा पर्यावरण विशेषज्ञों की मौजूदगी इसे व्यापक संवाद का रूप देती है। अब सम्मेलन से निकलने वाली सिफारिशों और उनके संभावित संस्थागत प्रभाव पर नजर रहेगी।
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।