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DU Women’s Safety Protest: बारिश में छात्राओं का बड़ा मार्च, सुरक्षित कैंपस और आजादी की मांग

Apurva Choudhary • 2026-09-29 19:43:59
DU Women’s Safety Protest: बारिश में छात्राओं का बड़ा मार्च, सुरक्षित कैंपस और आजादी की मांग
दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस में महिला सुरक्षा को लेकर मार्च हुआ। मिरांडा हाउस से फैकल्टी ऑफ आर्ट्स तक निकले प्रदर्शन में सुरक्षित सड़कें, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन और निगरानी की मांग उठी। प्रदर्शनकर्ताओं ने महिलाओं की आवाजाही पर पाबंदियों के बजाय जवाबदेही और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा पर जोर दिया।

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📍 New Delhi 📰 29 September 2026 ✍️ Apurva Choudhary 

बारिश के बीच DU कैंपस में महिला सुरक्षा पर बड़ा मार्च
दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में महिला सुरक्षा को लेकर सोमवार को छात्राओं का बड़ा मार्च निकला। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्राएं और अन्य प्रतिभागी सड़कों पर जुटे और सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों, बेहतर कैंपस सुरक्षा तथा महिलाओं की स्वतंत्र आवाजाही की मांग उठाई।
मार्च मिरांडा हाउस से शुरू होकर फैकल्टी ऑफ आर्ट्स तक पहुंचा। प्रदर्शन में अलग-अलग दिल्ली विश्वविद्यालय कॉलेजों के छात्र शामिल हुए। आयोजकों के मुताबिक यह मार्च स्वतंत्र रूप से आयोजित किया गया था और इसमें महिलाओं तथा क्वियर प्रतिभागियों के लिए भागीदारी रखी गई थी।
यह प्रदर्शन दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से जुड़े कथित गैंगरेप के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों की अगली कड़ी है। पिछले सप्ताह भी लेडी श्रीराम कॉलेज, गार्गी कॉलेज और कमला नेहरू कॉलेज के आसपास छात्राओं ने महिला सुरक्षा को लेकर मार्च किए थे।

मिरांडा हाउस से फैकल्टी ऑफ आर्ट्स तक मार्च
सोमवार दोपहर करीब 3 बजे मिरांडा हाउस के गेट नंबर 7 के आसपास छात्राएं जुटीं। इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्राएं चत्र मार्ग से होते हुए फैकल्टी ऑफ आर्ट्स की ओर बढ़ीं, जहां दूसरे कॉलेजों के छात्र भी मार्च में शामिल हुए।
बारिश के दौरान भी प्रदर्शन जारी रहा। हाथों में पोस्टर और प्लेकार्ड लिए छात्राओं ने महिला सुरक्षा, आजादी और सार्वजनिक स्थानों पर बराबर पहुंच से जुड़े नारे लगाए।
मार्च के अंत में प्रदर्शनकारी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के आसपास जुटे। कई छात्राओं ने पोस्टर ऊपर उठाकर अपनी मांगें सामने रखीं।

‘Hum Auratein Aazad Hain’ बना प्रमुख संदेश
प्रदर्शन का प्रमुख संदेश ‘Hum Auratein Aazad Hain’ रहा। छात्राओं ने ऐसे नारों और पोस्टरों का इस्तेमाल किया जिनमें महिलाओं की सुरक्षा को उनकी आवाजाही पर पाबंदियों से जोड़ने के बजाय सार्वजनिक व्यवस्था और जवाबदेही से जोड़ने की बात कही गई।
‘Darr ke aage azaadi’ और ‘Pinjra todna nahi chhodenge’ जैसे नारे भी सुनाई दिए। कुछ पोस्टरों में छात्राओं ने रात में बाहर निकलने पर परिवारों की ओर से लगाई जाने वाली पाबंदियों और लगातार लोकेशन ट्रैकिंग पर भी सवाल उठाए।
आयोजकों ने मार्च को गैर-राजनीतिक बताया। प्रदर्शन से जुड़े दिशानिर्देशों में आपत्तिजनक, सेक्सिस्ट, जातिवादी, होमोफोबिक या ट्रांसफोबिक भाषा और पोस्टरों से बचने की बात भी रखी गई थी।

छात्राओं की मुख्य मांगें क्या हैं?
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने महिला सुरक्षा के लिए केवल प्रतिबंध या हॉस्टल कर्फ्यू बढ़ाने के बजाय बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
इन मांगों में कैंपस और आसपास की सड़कों पर खराब स्ट्रीट लाइट ठीक करना, सार्वजनिक पार्कों में रोशनी बढ़ाना, डीटीसी और शटल बसों की संख्या बढ़ाना, सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना तथा सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था शामिल रही।
छात्राओं ने कॉलेजों, हॉस्टलों और पीजी से आने-जाने वाले रास्तों को सुरक्षित बनाने, पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने और निगरानी व्यवस्था को प्रभावी करने की जरूरत भी उठाई।

छात्राओं ने सुरक्षा और पाबंदी के बीच अंतर पर सवाल उठाए
प्रदर्शन में एक बड़ा मुद्दा यह रहा कि यौन हिंसा या छेड़छाड़ की घटनाओं के बाद महिलाओं की आवाजाही सीमित करने के बजाय सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाया जाए।
कई छात्राओं ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें देर शाम बाहर निकलने, मेट्रो से लौटने या कैंपस के कुछ हिस्सों से अकेले गुजरने के दौरान परिवारों और स्वयं की सुरक्षा को लेकर दबाव का सामना करना पड़ता है।
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कुछ छात्राओं ने खराब रोशनी वाली सड़कों, सुनसान रास्तों और लगातार फोन पर परिवार से जुड़े रहने की मजबूरी का जिक्र किया। एक छात्रा ने कहा कि समस्या का समाधान छात्राओं को कम बाहर निकलने के लिए कहना नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना है।

नॉर्थ कैंपस की खराब लाइटिंग और रास्तों का मुद्दा
द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने नॉर्थ कैंपस के कुछ हिस्सों में खराब रोशनी, सुनसान रास्तों और महिलाओं के पीछे बाइक या कार से आने जैसी घटनाओं की शिकायतें साझा कीं।
रिपोर्ट में एक छात्र संगठन प्रतिनिधि के हवाले से कहा गया कि आयोजकों को शुरुआत में कुछ सौ प्रतिभागियों की उम्मीद थी, लेकिन मार्च में संख्या काफी अधिक हो गई। हालांकि विभिन्न रिपोर्टों में प्रतिभागियों की संख्या अलग-अलग बताई गई है, इसलिए इसे एक निश्चित आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
छात्रों की मांग का केंद्र यह रहा कि सुरक्षा केवल किसी घटना के बाद चर्चा का विषय न बने, बल्कि रोजमर्रा के कैंपस जीवन का स्थायी हिस्सा हो।

आस्था कुंज पार्क की घटना बनी तत्काल वजह
यह आंदोलन दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से जुड़े कथित गैंगरेप मामले के बाद तेज हुआ। रिपोर्टों के अनुसार लड़की को कथित तौर पर तीन आरोपियों ने निशाना बनाया और मामले में पुलिस कार्रवाई हुई है।
मामला अभी आपराधिक न्याय प्रक्रिया के स्तर पर है। आरोपों और गिरफ्तारी को दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता। छात्र प्रदर्शन इसी घटना के बाद दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उठी व्यापक चिंता का हिस्सा बन गया है।
पिछले दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों के छात्र समूहों ने भी महिला सुरक्षा को लेकर मार्च किए थे। 27 सितंबर को एसएफआई से जुड़े छात्रों ने भी नॉर्थ कैंपस में ‘कैंपस जस्टिस मार्च’ निकाला था और सुरक्षित कैंपस तथा सार्वजनिक स्थानों की मांग उठाई थी।

DUSU और राजनीतिक छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU ने भी समर्थन जताया। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार DUSU ने महिला सुरक्षा को अपनी प्रमुख चिंताओं में शामिल बताया और प्रशासन के सामने सुरक्षा से जुड़ी मांगें उठाने की बात कही।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है। मिरांडा हाउस से शुरू हुआ ‘Hum Auratein Aazad Hain’ मार्च आयोजकों के अनुसार स्वतंत्र और गैर-राजनीतिक था, जबकि DUSU और राजनीतिक छात्र संगठनों की ओर से समान मुद्दे पर अलग समर्थन या भागीदारी की घोषणा भी सामने आई।
इससे प्रदर्शन के राजनीतिक स्वरूप को लेकर चर्चा भी हुई। DU Beat की रिपोर्ट के अनुसार ABVP की ओर से भी महिला सुरक्षा के लिए ‘Chalo DU March’ का समर्थन घोषित किया गया था, जबकि मूल मार्च के आयोजकों ने उसे स्वतंत्र और गैर-राजनीतिक बताया था।

राहुल गांधी ने भी प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी
29 सितंबर को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनकी आवाजाही सीमित करने के बजाय सुरक्षित सार्वजनिक स्थान बनाने और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।
यह प्रतिक्रिया उस समय सामने आई जब DU में महिला सुरक्षा को लेकर लगातार छात्र प्रदर्शन हो रहे हैं। राहुल गांधी की टिप्पणी राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आई है और इसे प्रदर्शन आयोजकों की आधिकारिक स्थिति से अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

प्रदर्शन का अगला फोकस क्या है?
छात्रों की मांगों से संकेत मिलता है कि आंदोलन का फोकस केवल किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। सुरक्षित रास्ते, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन, पुलिस पेट्रोलिंग, निगरानी और कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दे लगातार सामने रखे जा रहे हैं।
छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच इन मांगों पर आगे किस तरह की कार्रवाई होती है, यह महत्वपूर्ण होगा। खास तौर पर उन रास्तों और सार्वजनिक स्थानों की पहचान, जहां छात्राओं को सुरक्षा संबंधी समस्याएं आती हैं, और वहां स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर निगाह रहेगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय में महिला सुरक्षा को लेकर हालिया प्रदर्शन यह भी दिखाते हैं कि छात्राएं सुरक्षा को केवल अतिरिक्त प्रतिबंधों के रूप में नहीं, बल्कि बेहतर सार्वजनिक व्यवस्था, जवाबदेही और स्वतंत्र आवाजाही के साथ जोड़कर देख रही हैं।
फिलहाल सोमवार का मार्च समाप्त हो चुका है, लेकिन महिला सुरक्षा को लेकर DU कैंपस में छात्र गतिविधियां और सार्वजनिक बहस जारी है। आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन, दिल्ली पुलिस और संबंधित नागरिक एजेंसियों की ओर से इन मांगों पर क्या कार्रवाई होती है, यह इस मुद्दे का अगला महत्वपूर्ण चरण होगा।
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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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