कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सितारों के पुराने दौर के लुक तैयार करने का चलन सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें तकनीक के साथ पुरानी फिल्मों और फैशन की यादें भी जुड़ रही हैं।
एआई ने बदला बॉलीवुड का अंदाज, पुराने दौर के लुक में सितारों को क्यों पसंद कर रहे हैं फैंस?
मुंबई। मनोरंजन की दुनिया में तकनीक और पुरानी यादों का मेल इन दिनों सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड बना रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से मौजूदा तस्वीरों को अस्सी के दशक के बॉलीवुड अंदाज में बदलने का चलन तेजी से ध्यान खींच रहा है। इन तस्वीरों में सितारों को पुराने जमाने के कपड़ों, हेयरस्टाइल, रोशनी और फिल्मी माहौल के साथ दिखाया जा रहा है। इस ट्रेंड की खास बात यह है कि इसमें केवल तस्वीर का रूप नहीं बदला जाता, बल्कि पूरी दृश्य शैली को एक पुराने दौर जैसा बनाने की कोशिश की जाती है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें देखकर लोगों को पुरानी फिल्मों, फिल्मी पोस्टरों और पारिवारिक एलबम की याद आती है।
अस्सी के दशक की तस्वीरें फिर चर्चा में
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर अस्सी के दशक जैसी तस्वीरें बनाने का चलन देखने को मिल रहा है। आम लोग ही नहीं, मनोरंजन जगत से जुड़े कुछ कलाकार भी इस तरह के डिजिटल प्रयोग का हिस्सा बने हैं। इस ट्रेंड में आधुनिक तस्वीर को पुराने समय के फोटो स्टूडियो जैसा रूप दिया जाता है। इसमें उस दौर के कपड़े, बड़े हेयरस्टाइल, पारंपरिक परिधान, पुराने कैमरे जैसा दृश्य प्रभाव और हल्की दानेदार तस्वीर जैसी खूबियां शामिल की जाती हैं। यानी तस्वीर नई होती है, लेकिन उसका पूरा अंदाज पुराने दौर की याद दिलाता है।
कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा का रेट्रो अंदाज
इस डिजिटल ट्रेंड ने बॉलीवुड के सितारों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है। नौ सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अस्सी के दशक की शैली में तैयार एक डिजिटल तस्वीर साझा की, जिसमें दोनों को पुराने बॉलीवुड के रोमांटिक अंदाज में दिखाया गया। तस्वीर में सिद्धार्थ को डेनिम परिधान और एविएटर चश्मे जैसे पुराने दौर से जुड़े अंदाज में दिखाया गया। इस तस्वीर पर प्रशंसकों ने पुराने दौर के चर्चित बॉलीवुड जोड़ों से समानताएं भी तलाशनी शुरू कर दीं। हालांकि, ऐसी तुलना प्रशंसकों की प्रतिक्रिया है, इसे किसी आधिकारिक फिल्मी संदर्भ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सिर्फ बॉलीवुड नहीं, दूसरे कलाकार भी शामिल
यह चलन केवल हिंदी फिल्म जगत तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा। दक्षिण भारतीय मनोरंजन जगत के कुछ कलाकारों ने भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से पुराने दौर का रूप अपनाने वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं। मलयालम मनोरंजन जगत से जुड़े कई कलाकारों की रेट्रो शैली वाली तस्वीरों ने भी सोशल मीडिया पर ध्यान खींचा। इन तस्वीरों में पुराने फैशन, हेयरस्टाइल और स्टूडियो पृष्ठभूमि का इस्तेमाल किया गया। इससे संकेत मिलता है कि यह केवल बॉलीवुड से जुड़ा प्रयोग नहीं, बल्कि व्यापक डिजिटल संस्कृति का हिस्सा बन रहा है।
आखिर पुराने लुक में ऐसा क्या खास है?
विशेषज्ञ टिप्पणी के बिना भी इस ट्रेंड में एक बात साफ दिखाई देती है—लोगों को पुरानी दृश्य शैली आकर्षित कर रही है। अस्सी और नब्बे के दशक का बॉलीवुड अपने खास कपड़ों, हेयरस्टाइल, रंगीन परिधानों, फिल्मी पोस्टरों और रोमांटिक दृश्यों के लिए जाना जाता है। आज की डिजिटल दुनिया में जब तस्वीरें बेहद साफ और तकनीकी रूप से परिष्कृत होती हैं, तब पुरानी तस्वीरों जैसा प्रभाव लोगों को अलग अनुभव देता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता इसी पुराने दृश्य सौंदर्य को नई तस्वीरों में दोबारा तैयार करने का रास्ता आसान बना रही है। यही कारण है कि लोग अपनी सामान्य तस्वीरों को पुराने फिल्मी पोस्टर, पारिवारिक एलबम या पुराने फोटो स्टूडियो के चित्र जैसा रूप देने में रुचि दिखा रहे हैं।
तकनीक ने फोटो एडिटिंग को बनाया आसान
पहले किसी तस्वीर को पूरी तरह बदलने के लिए पेशेवर फोटो संपादन सॉफ्टवेयर और तकनीकी जानकारी की जरूरत पड़ती थी। अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों में सामान्य भाषा में निर्देश देकर तस्वीर की शैली बदलने की सुविधा उपलब्ध है। उपयोगकर्ता तस्वीर के साथ यह बता सकता है कि उसे किस दौर का परिधान, हेयरस्टाइल, प्रकाश, पृष्ठभूमि और दृश्य प्रभाव चाहिए। इसके बाद उपकरण उसी विवरण के आधार पर नई तस्वीर तैयार कर सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि तैयार तस्वीर वास्तविक ऐतिहासिक तस्वीर है। वह एक डिजिटल रूपांतरण होती है और उसे उसी रूप में समझना जरूरी है।
प्रशंसकों को क्यों पसंद आ रहा है यह अंदाज?
रेट्रो तस्वीरों की लोकप्रियता में पुरानी यादों की भूमिका महत्वपूर्ण दिखाई देती है। किसी पुराने दौर की दृश्य शैली लोगों को बचपन, पुराने सिनेमा, पारिवारिक एलबम और उस समय के फैशन की याद दिला सकती है। इसके अलावा सितारों को ऐसे अंदाज में देखना भी प्रशंसकों के लिए नया अनुभव है। जिन कलाकारों को दर्शक आधुनिक परिधानों और मौजूदा फैशन में देखते हैं, उन्हें अचानक पुराने दौर के कपड़ों और हेयरस्टाइल में देखना स्वाभाविक रूप से जिज्ञासा पैदा करता है।सोशल मीडिया इस जिज्ञासा को और बढ़ाता है। एक तस्वीर पसंद आने के बाद दूसरे लोग भी उसी तरह की तस्वीर बनाने की कोशिश करते हैं। इस तरह कोई एक रचनात्मक प्रयोग सामूहिक डिजिटल ट्रेंड का रूप ले सकता है।
लेकिन एआई तस्वीरों में सावधानी भी जरूरी
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार हर तस्वीर को वास्तविक तस्वीर समझना सही नहीं है। डिजिटल रूपांतरण में चेहरे, कपड़े, पृष्ठभूमि या दूसरे दृश्य तत्व वास्तविकता से अलग हो सकते हैं।भारत सरकार भी एआई से बने भ्रामक और डीपफेक कंटेंट के जोखिम को लेकर लगातार नियमों और दिशा-निर्देशों पर जोर देती रही है। मार्च 2026 में सरकार ने सिंथेटिक रूप से तैयार सामग्री से जुड़े नुकसान से निपटने के लिए नियमों को मजबूत किए जाने की जानकारी दी थी। इनमें अनुमत एआई सामग्री की स्पष्ट पहचान और उसके स्रोत का पता लगाने योग्य तकनीकी विवरण जैसे प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। सरकार ने यह भी कहा है कि एआई से तैयार सामग्री अगर किसी व्यक्ति का प्रतिरूपण करती है, भ्रामक होती है या अन्य कानूनों का उल्लंघन करती है, तो उस पर मौजूदा कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।
मनोरंजन में एआई का बढ़ता प्रभाव
फिल्म और मनोरंजन उद्योग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका लगातार बढ़ रही है। तस्वीरों के रेट्रो रूपांतरण से लेकर डिजिटल दृश्य निर्माण तक, यह तकनीक रचनात्मक प्रयोगों के लिए नए रास्ते खोल रही है। लेकिन तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतना ही जरूरी है कि दर्शक डिजिटल और वास्तविक सामग्री के बीच अंतर समझें। खासकर किसी कलाकार के चेहरे या निजी तस्वीर से जुड़ी सामग्री को साझा करते समय सहमति, गोपनीयता और सही जानकारी का ध्यान रखना जरूरी है।
आगे क्या?
रेट्रो एआई तस्वीरों का मौजूदा चलन यह दिखाता है कि मनोरंजन में नई तकनीक और पुरानी यादें एक साथ दर्शकों को आकर्षित कर सकती हैं। आने वाले समय में अलग-अलग दशकों की फिल्मी शैलियों, फैशन और फोटोग्राफी को डिजिटल रूप में दोबारा तैयार करने के प्रयोग और बढ़ सकते हैं। फिलहाल, बॉलीवुड सितारों का पुराने दौर में डिजिटल रूपांतरण सोशल मीडिया के लिए मनोरंजन और रचनात्मकता का नया जरिया बना हुआ है। मगर इस चमकदार डिजिटल दुनिया के बीच यह समझना भी उतना ही जरूरी है कि एआई से बनी तस्वीर कल्पना और तकनीकी रचना हो सकती है, इतिहास की वास्तविक तस्वीर नहीं।
निष्कर्ष
नई तकनीक ने पुराने बॉलीवुड के अंदाज को फिर से चर्चा में ला दिया है। फैंस के लिए यह सिर्फ तस्वीर बदलने का प्रयोग नहीं, बल्कि बीते दौर की यादों को नए डिजिटल रूप में देखने का एक दिलचस्प तरीका बनता जा रहा है।