महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे और अमित शाह की मुलाकात ने महायुति सरकार की आंतरिक खींचतान को उजागर किया। शिंदे ने अजित पवार और फडणवीस से नाराजगी जताई।
मुंबई (शाह टाइम्स) : महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि राजनीतिक संदेशों से भरी हुई मानी जा रही है। महायुति सरकार की आंतरिक खींचतान इस मुलाकात के बाद और ज्यादा उजागर हो गई है।
क्यों खास रही यह मुलाकात?
रविवार को मुंबई के सह्याद्री गेस्ट हाउस में हुई यह बैठक महज कुछ मिनटों की नहीं थी। यह एक गंभीर बातचीत थी, जिसमें शिंदे ने अजित पवार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कार्यशैली और रवैये पर नाराजगी जताई। सूत्रों के अनुसार, शिंदे अपने विभागों को मिलने वाले बजट में कटौती और प्रशासनिक निर्णयों में हस्तक्षेप से बेहद नाराज हैं।
बजट में भेदभाव, मंत्रालय में हस्तक्षेप
शिवसेना का आरोप है कि एनसीपी नेता और वित्त मंत्री अजित पवार ने बीजेपी और एनसीपी के मंत्रियों को वरीयता दी, जबकि शिवसेना को अपेक्षित बजट नहीं दिया गया। वहीं, देवेंद्र फडणवीस द्वारा राज्य के प्रशासन में शिंदे की राय की अनदेखी, खासकर शहरी विकास विभाग में, उनकी नाराजगी की बड़ी वजह बनी है।
शिंदे के करीबी अफसरों को हटाया गया
एकनाथ शिंदे को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उनके करीबी माने जाने वाले अजय आशर को महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन के उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया और उनकी जगह अजित पवार के करीबी दिलीप वलसे पाटिल को नियुक्त कर दिया गया। इसके बाद शिवसेना को यह संदेश गया कि सत्ता संतुलन अब शिंदे की बजाय अजित पवार की ओर झुकता जा रहा है।
सत्ता में हिस्सेदारी पर असहमति
2022 में मुख्यमंत्री बनने के बाद शिंदे को नीति निर्धारण में पूर्ण स्वतंत्रता थी, लेकिन 2024 के चुनाव के बाद बदलते समीकरणों में उनका कद छोटा हुआ है। अब उन्हें उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार करना पड़ा है, जिससे उनकी भूमिका सीमित हो गई है। यही कारण है कि वे सत्ता की नई बुनावट से खुद को असहज महसूस कर रहे हैं।
फडणवीस का जवाबी संतुलन
हालांकि, मुख्यमंत्री फडणवीस ने शिंदे को संतुष्ट करने की भी कोशिश की है। हाल ही में उन्होंने निर्णय लिया कि अब मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाने वाली सभी महत्वपूर्ण फाइलें पहले एकनाथ शिंदे के माध्यम से जाएंगी। यह कदम शिंदे को राजनीतिक संदेश देने और उन्हें सम्मानजनक स्थान देने का प्रयास माना जा रहा है।
क्या है बीजेपी का नजरिया?
बीजेपी नेताओं का मानना है कि अब सरकार को चुनावी वादों के अनुसार पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करना है। इसलिए पार्टी अब सत्ता साझेदारों की खुशामद के बजाय जनहित के फैसलों को प्राथमिकता दे रही है। उनका यह भी कहना है कि शिंदे को बदले हुए राजनीतिक समीकरण को समझना और स्वीकार करना होगा।
मुलाकात नहीं एक शिष्टाचार भेंट
एकनाथ शिंदे और अमित शाह की यह मुलाकात केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले बड़े बदलावों का संकेत है। यह साफ है कि महायुति सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा, और आने वाले दिनों में इस गठबंधन की राजनीति में और भी खिंचतान देखने को मिल सकती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।