✍️ By Shah Times Editorial Desk | 12 जुलाई 2025
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने पूरे देश में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision - SIR) की तैयारी शुरू कर दी है। अगले महीने से यह अभियान पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और केरल जैसे पांच राज्यों में शुरू होने की संभावना है। यह वही राज्य हैं जहां 2026 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया है या इसके पीछे राजनीतिक मंशाएं छिपी हैं? क्या यह प्रक्रिया एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) की वापसी का नया संस्करण है?
चुनाव आयोग के मुताबिक, यह अभियान दो वर्षों में चरणबद्ध रूप से पूरे देश में लागू किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की सहमति और पर्यवेक्षण के बाद आयोग को अब कानूनी सुरक्षा मिली है, जिससे वह इस प्रक्रिया को तीव्रता से लागू करने की योजना बना रहा है। बिहार में इसकी शुरुआत के दौरान भले ही विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इसे एनआरसी की वापसी बताया हो, लेकिन चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की पहल कह रहा है।
कपिल सिब्बल ने प्रेस वार्ता में यह स्पष्ट रूप से कहा कि बिहार में चल रहा यह विशेष पुनरीक्षण "एनआरसी की वापसी का पायलट प्रोजेक्ट" है। उनका आरोप है कि:
“महाराष्ट्र में वोटों की संख्या बढ़ाई गई जबकि बिहार में घटाई जा रही है। यह सीधा राजनीतिक संतुलन बदलने की कोशिश है।”
— कपिल सिब्बल, राज्यसभा सांसद
उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा के साथ “साझेदारी” का आरोप लगाया और दावा किया कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और बूथ लेवल अधिकारी (BLOs) अब मतदाता सूची को अपडेट करने और पुनरीक्षण के प्रशिक्षण में जुट गए हैं। तकनीकी रूप से भी वेबसाइट पर संशोधित सूचियों को अपलोड किया जा रहा है। 2002–2004 के बाद देश में इस तरह का अभियान पहली बार इतने बड़े स्तर पर हो रहा है।
बिहार में खासकर उन मतदाताओं से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जो 2004 के बाद मतदाता बने हैं। आयोग का फोकस यही है कि पहले पुराने डेटा को क्रॉस-वेरिफाई किया जाए ताकि 'डुप्लिकेट वोटर', 'फर्जी नाम' और 'मृत मतदाता' सूची से हटाए जा सकें।
| चरण | राज्य/क्षेत्र | अनुमानित समय |
|---|---|---|
| चरण 1 | WB, TN, Assam, Kerala | अगस्त 2025 |
| चरण 2 | MP, Rajasthan, Telangana (2026 में चुनाव) | नवंबर 2025 - फरवरी 2026 |
| चरण 3 | अन्य राज्य | 2026–2027 |
चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मतदाता सूची बनाए रखने और उसे अद्यतन करने का अधिकार प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में दिए अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि पारदर्शी चुनाव के लिए सत्यापित और अद्यतन मतदाता सूची आवश्यक है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी नागरिक को गैरवाजिब तरीके से मतदाता सूची से हटाया नहीं जा सकता। इस लिहाज से आयोग को सतर्कता और निष्पक्षता के साथ यह प्रक्रिया लागू करनी होगी।
| बिंदु | एनआरसी | विशेष सघन पुनरीक्षण |
|---|---|---|
| उद्देश्य | नागरिकता की पुष्टि | मतदाता के रूप में पंजीकरण की शुद्धता |
| दस्तावेज़ | जन्म प्रमाण, भूमि रिकॉर्ड, पूर्वजों के दस्तावेज़ | पते और उम्र के सामान्य दस्तावेज |
| कानून | नागरिकता कानून (CAA, 1955) के तहत | जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत |
| प्रभाव | नागरिकता पर असर | वोट देने का अधिकार प्रभावित |
इस तुलना से स्पष्ट होता है कि तकनीकी रूप से यह एनआरसी नहीं है, लेकिन नियमों की सख्ती और दस्तावेज़ों की माँग इसे सामाजिक रूप से एनआरसी जैसा बना रही है।
मतदाता सूची को सटीक और पारदर्शी बनाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। लेकिन अगर यह प्रक्रिया पक्षपात, भेदभाव या राजनीतिक हितों से प्रेरित हो, तो इससे लोकतंत्र की नींव हिल सकती है।
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि कोई भी नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न हो। चुनाव आयोग को चाहिए कि वह पारदर्शिता बनाए रखे, सभी पक्षों को विश्वास में ले और प्रत्येक राज्य में समान मानकों का पालन करे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।