मुजफ्फरनगर में गौकशी के एक मामले की जांच के दौरान नई मंडी पुलिस और एसओजी की टीम ने दो आरोपियों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार दोनों घायल हुए। मौके से दो तमंचे, कारतूस और 5.5 किलोग्राम गौमांस बरामद हुआ। एक अन्य आरोपी फरार है, जिसकी तलाश जारी है और जांच आगे बढ़ रही है।
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मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश | 12 अगस्त 2026 | Mohd Naved
मुजफ्फरनगर के नई मंडी थाना क्षेत्र में गौकशी के एक मामले की तफ्तीश के दौरान पुलिस और संदिग्ध आरोपियों के बीच मुठभेड़ की सूचना सामने आई है। पुलिस के मुताबिक कार्रवाई में दो आरोपी घायल अवस्था में गिरफ्तार किए गए हैं। दोनों की पहचान जीशान उर्फ कल्लू और फरमान के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके कब्जे से दो तमंचे, दो जिंदा कारतूस और दो खोखा कारतूस बरामद करने का दावा किया है।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई 12 अगस्त 2026 को थाना नई मंडी पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने की। मामला एक दिन पहले सामने आए गौवंश के क्षत-विक्षत सिर से जुड़ा है। पुलिस ने इस संबंध में पहले ही मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
पुलिस प्रेस नोट के मुताबिक 11 अगस्त को एक व्यक्ति ने थाना नई मंडी में तहरीर देकर बताया कि पचैंडा रोड पर एडीआई फर्नीचर के सामने नाले के पास गौवंश का सिर क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा संख्या 390/2026 दर्ज किया।
इस मुकदमे में उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम की धारा 3, 5 और 8 लगाई गई। इंडिया कोड के अनुसार इस कानून में गाय की हत्या पर रोक, गोमांस की बिक्री से जुड़े प्रतिबंध और संबंधित दंड का प्रावधान है।
पुलिस ने घटना के अनावरण और आरोपियों की पहचान के लिए टीम गठित की। अगले दिन मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई।
पुलिस के मुताबिक 12 अगस्त को सूचना मिली कि इस मामले से जुड़े तीन लोग पचैंडा रोड से नसीरपुर जाने वाले रास्ते पर एक निर्माणाधीन मकान में छिपे हुए हैं। पुलिस का दावा था कि उनके पास अवैध हथियार भी मौजूद थे।
सूचना के बाद नई मंडी पुलिस और एसओजी की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस के अनुसार टीम को देखकर मकान में मौजूद लोग फायरिंग करते हुए खेतों की ओर भागने लगे।
पुलिस ने आरोप लगाया कि उसकी टीम पर जान से मारने की नीयत से गोलीबारी की गई। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी की और आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इस कार्रवाई में दो संदिग्ध घायल हुए।
यह घटनाक्रम फिलहाल पुलिस के आधिकारिक बयान पर आधारित है। मुठभेड़ में फायरिंग की परिस्थितियों, गोली चलने की दिशा और घटनास्थल से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध स्रोतों से नहीं हुई है।
पुलिस के अनुसार घायल दोनों व्यक्तियों से पूछताछ के बाद उनकी पहचान जीशान उर्फ कल्लू, पुत्र मकसूद, निवासी इमरान कॉलोनी, थाना सिविल लाइन, मुजफ्फरनगर और फरमान, पुत्र पप्पू, निवासी उसी क्षेत्र के रूप में हुई।
दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने बताया कि तीसरा व्यक्ति मौके से भागने में सफल रहा और उसकी गिरफ्तारी के लिए कॉम्बिंग की जा रही है।
पुलिस ने इस कार्रवाई के संबंध में अलग से मुकदमा संख्या 391/2026 दर्ज किया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1) और आर्म्स एक्ट की धाराएं 3/25/28 लगाई गई हैं। बीएनएस की धारा 109(1) हत्या के प्रयास से संबंधित है।
पुलिस प्रेस नोट में दो 315 बोर के तमंचे, दो जिंदा कारतूस और दो खोखा कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा पुलिस ने 5.5 किलोग्राम गौमांस बरामद करने का भी दावा किया है।
बरामदगी के संबंध में आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी। खासकर यह पता लगाना जरूरी होगा कि बरामद सामग्री किस स्थान से मिली, उसका फॉरेंसिक परीक्षण क्या बताता है और उसका पहले दर्ज गौकशी मुकदमे से क्या संबंध स्थापित होता है।
उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम में गोहत्या पर रोक और संबंधित अपराधों के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। इसलिए इस मामले में बरामदगी और फॉरेंसिक साक्ष्य विवेचना का अहम हिस्सा रहेंगे।
पुलिस की कार्रवाई में मुठभेड़ का दावा अपने आप में किसी आरोपी की दोषसिद्धि नहीं है। अदालत में आरोपों की पुष्टि अभियोजन साक्ष्य, गवाहों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य कानूनी साक्ष्यों के आधार पर होगी।
इस मामले में पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने पहले फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई में दोनों घायल हुए। इस दावे की न्यायिक जांच के दौरान घटनास्थल के साक्ष्य, बरामद हथियार, कारतूस, फायरिंग के निशान और मेडिकल रिकॉर्ड अहम होंगे।
मुठभेड़ से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया दोनों को अलग-अलग देखना जरूरी है। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को कानून के तहत न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।
पुलिस के अनुसार दोनों गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा संख्या 390/2026 का अनावरण हुआ है। इसी मामले में 11 अगस्त को पचैंडा रोड पर गौवंश का सिर मिलने के बाद कार्रवाई शुरू हुई थी।
इसके बाद मुकदमा संख्या 391/2026 आर्म्स एक्ट और बीएनएस की धारा 109(1) के तहत दर्ज किया गया। पुलिस ने दोनों मामलों की विवेचना जारी होने की बात कही है।
पुलिस ने यह भी कहा है कि गिरफ्तार आरोपियों का विस्तृत आपराधिक इतिहास अभी खंगाला जा रहा है। इसलिए फिलहाल उनके खिलाफ केवल वही मामले निश्चित रूप से बताए जा सकते हैं, जिनका उल्लेख आधिकारिक प्रेस नोट में किया गया है।
पुलिस के अनुसार घटना के दौरान एक आरोपी मौके से भागने में सफल रहा। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम कॉम्बिंग कर रही है।
इस पहलू में आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि फरार व्यक्ति की पहचान क्या है और उसका पहले दर्ज गौकशी मामले में क्या कथित रोल था। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक सूचना में उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
फरार आरोपी की तलाश के साथ पुलिस को घटनास्थल और संभावित ठिकानों से जुड़े डिजिटल तथा भौतिक साक्ष्य जुटाने होंगे। इससे जांच का दायरा और स्पष्ट हो सकता है।
पुलिस के मुताबिक कार्रवाई थाना नई मंडी के प्रभारी निरीक्षक आनंद देव मिश्र के नेतृत्व में हुई। टीम में नई मंडी थाना पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ एसओजी प्रभारी मोहित सिंह तथा एसओजी के अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।
पुलिस प्रेस नोट में कुल 19 अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम कार्रवाई करने वाली टीम के तौर पर दर्ज किए गए हैं। इनमें नई मंडी थाने और मुजफ्फरनगर एसओजी के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं।
दोनों आरोपियों का अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उनकी गिरफ्तारी, मेडिकल रिकॉर्ड, बरामदगी और अन्य साक्ष्यों को विवेचना का हिस्सा बनाया जाएगा।
गौकशी से जुड़े मामले में उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत जांच जारी रहेगी। वहीं पुलिस पर फायरिंग के आरोप से जुड़े मुकदमे में बीएनएस की धारा 109(1) और आर्म्स एक्ट की धाराएं लागू की गई हैं।
यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है। पुलिस की ओर से किसी व्यक्ति को आरोपी बताकर गिरफ्तार करना और अदालत द्वारा उसे दोषी ठहराना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। अंतिम दोषसिद्धि अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक परीक्षण के बाद ही तय होगी।
पुलिस के मुताबिक कार्रवाई 12 अगस्त 2026 को थाना नई मंडी क्षेत्र में हुई। इससे पहले 11 अगस्त को पचैंडा रोड पर गौवंश का क्षत-विक्षत सिर मिलने की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
पुलिस के अनुसार दो आरोपियों, जीशान उर्फ कल्लू और फरमान को घायल अवस्था में गिरफ्तार किया गया। एक अन्य आरोपी मौके से फरार हो गया।
पुलिस ने दो 315 बोर के तमंचे, दो जिंदा कारतूस, दो खोखा कारतूस और 5.5 किलोग्राम गौमांस बरामद करने का दावा किया है।
पुलिस प्रेस नोट के अनुसार एक मामला उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम की धाराओं 3/5/8 के तहत और दूसरा मामला बीएनएस की धारा 109(1) तथा आर्म्स एक्ट की धाराओं 3/25/28 के तहत दर्ज है।
नहीं। अभी दोनों व्यक्ति पुलिस के मुताबिक आरोपी हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।
मुजफ्फरनगर गौकशी मामले में पुलिस की कार्रवाई ने जांच को अगले चरण में पहुंचाया है, लेकिन इस पूरे प्रकरण में कई तथ्य अभी विवेचना के अधीन हैं। दो आरोपियों की गिरफ्तारी, हथियारों की बरामदगी और तीसरे आरोपी की तलाश पुलिस कार्रवाई के तत्काल पहलू हैं।
इसके साथ ही मुठभेड़ की परिस्थितियां, बरामद सामग्री की फॉरेंसिक पुष्टि और आरोपियों की कथित भूमिका जैसे सवाल भी जांच के केंद्र में रहेंगे। उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर फिलहाल इतना स्थापित है कि पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ संबंधित मुकदमे दर्ज किए हैं।
मामले की आगे की दिशा चार्जशीट, फॉरेंसिक रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और अदालत की कार्यवाही से अधिक स्पष्ट होगी। इसलिए इस स्तर पर पुलिस के दावों और न्यायिक रूप से स्थापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।