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मिर्गी संबंधों, करियर, वित्त और सामाजिक स्थिति को प्रभावित करती हैं

None • 2023-11-19 15:27:33
मिर्गी संबंधों, करियर, वित्त और सामाजिक स्थिति को प्रभावित करती हैं

कोच्चि । केरल (Kerla) में विशेषज्ञों ने बताया कि मिर्गी संबंधों, करियर, वित्त और सामाजिक स्थिति को प्रभावित करती हैं।

कोच्चि के अमृता अस्पताल (Amrita Hospital Kochi) के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्टों में से एक ने मिर्गी के बढ़ते निदान पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने मिर्गी की समग्र घटनाओं और व्यापकता में वृद्धि की आशंका जताते हुए बढ़ती उम्र की आबादी की वर्तमान प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला है। मिर्गी के लगभग 80 प्रतिशत मरीज निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं, खासकर गरीब सामाजिक-आर्थिक तबके में। कई नव निदान मिर्गी रोगी वृद्ध व्यक्ति हैं।

अमृता अस्पताल (Amrita Hospital) में मिर्गी रोग विशेषज्ञ और न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. सिबी गोपीनाथ (Dr. Sibi Gopinath) ने भारत में मिर्गी (epilepsy in india) की स्थिति पर हाल के निष्कर्षों पर विचार करते हुए कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''मिर्गी आम न्यूरोलॉजिकल विकारों में से एक है, और भारत में ही, हमारे पास एक करोड़ से अधिक मरीज मिर्गी से प्रभावित हैं। भारत को इलाज में भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे शहरी क्षेत्रों में 22 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 90 प्रतिशत का इलाज नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मिर्गी में हाथ और पैर का मरोड़ना, गिरना, और मुंह से झाग निकलना, और आंत्र सहित ने लक्षण पाए जाते हैं। विशेष रूप से, दौरे अलग-अलग हो सकते हैं, जिनमें से कुछ बोलने में अचानक रुकावट और खाली घूरना, आंखों का तेजी से झपकना और भ्रम, अस्पष्ट भय, दृश्य मतिभ्रम के रूप में प्रकट होते हैं।

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डा़ गोपीनाथ (Dr. Gopinath) ने भ्रांतियों को दूर करते हुए इस बात पर जोर देते हैं कि मिर्गी एक तंत्रिका संबंधी विकार है, मानसिक विकार नहीं। मिर्गी किसी भी उम्र में विकसित हो सकती है और दौरे विभिन्न रूपों में प्रकट हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, ''मिर्गी का प्रबंधन मुख्य रूप से दौरे-रोधी दवाओं पर निर्भर करता है, जिसमें 70-75 प्रतिशत रोगियों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई है। मिर्गी के प्रकार, उम्र और लिंग, रोगी के व्यवसाय जैसे कारकों के आधार पर दवाओं को अनुकूलित किया जाता है।''

उन्होंने कहा कि शेष 30 प्रतिशत के लिए, सर्जिकल विकल्प संभव हैं। अफसोस की बात है, देखभाल करने वालों को अक्सर मिर्गी से पीड़ित परिवार के सदस्य की देखभाल में मदद करने के लिए ज्ञान की कमी होती है। आम जनता में शिक्षा और जागरूकता की उल्लेखनीय कमी है कि मिर्गी से पीड़ित लोगों का समर्थन कैसे किया जाए।''

https://shahtimesnews.com/announcement-of-reward-of-rs-50-thousand-on-absconding-nafees-biryani-wanted-in-umesh-pal-murder-case/

#ShahTimes

कोच्चि । केरल (Kerla) में विशेषज्ञों ने बताया कि मिर्गी संबंधों, करियर, वित्त और सामाजिक स्थिति को प्रभावित करती हैं।

कोच्चि के अमृता अस्पताल (Amrita Hospital Kochi) के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्टों में से एक ने मिर्गी के बढ़ते निदान पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने मिर्गी की समग्र घटनाओं और व्यापकता में वृद्धि की आशंका जताते हुए बढ़ती उम्र की आबादी की वर्तमान प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला है। मिर्गी के लगभग 80 प्रतिशत मरीज निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं, खासकर गरीब सामाजिक-आर्थिक तबके में। कई नव निदान मिर्गी रोगी वृद्ध व्यक्ति हैं।

अमृता अस्पताल (Amrita Hospital) में मिर्गी रोग विशेषज्ञ और न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. सिबी गोपीनाथ (Dr. Sibi Gopinath) ने भारत में मिर्गी (epilepsy in india) की स्थिति पर हाल के निष्कर्षों पर विचार करते हुए कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''मिर्गी आम न्यूरोलॉजिकल विकारों में से एक है, और भारत में ही, हमारे पास एक करोड़ से अधिक मरीज मिर्गी से प्रभावित हैं। भारत को इलाज में भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे शहरी क्षेत्रों में 22 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 90 प्रतिशत का इलाज नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मिर्गी में हाथ और पैर का मरोड़ना, गिरना, और मुंह से झाग निकलना, और आंत्र सहित ने लक्षण पाए जाते हैं। विशेष रूप से, दौरे अलग-अलग हो सकते हैं, जिनमें से कुछ बोलने में अचानक रुकावट और खाली घूरना, आंखों का तेजी से झपकना और भ्रम, अस्पष्ट भय, दृश्य मतिभ्रम के रूप में प्रकट होते हैं।

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डा़ गोपीनाथ (Dr. Gopinath) ने भ्रांतियों को दूर करते हुए इस बात पर जोर देते हैं कि मिर्गी एक तंत्रिका संबंधी विकार है, मानसिक विकार नहीं। मिर्गी किसी भी उम्र में विकसित हो सकती है और दौरे विभिन्न रूपों में प्रकट हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, ''मिर्गी का प्रबंधन मुख्य रूप से दौरे-रोधी दवाओं पर निर्भर करता है, जिसमें 70-75 प्रतिशत रोगियों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई है। मिर्गी के प्रकार, उम्र और लिंग, रोगी के व्यवसाय जैसे कारकों के आधार पर दवाओं को अनुकूलित किया जाता है।''

उन्होंने कहा कि शेष 30 प्रतिशत के लिए, सर्जिकल विकल्प संभव हैं। अफसोस की बात है, देखभाल करने वालों को अक्सर मिर्गी से पीड़ित परिवार के सदस्य की देखभाल में मदद करने के लिए ज्ञान की कमी होती है। आम जनता में शिक्षा और जागरूकता की उल्लेखनीय कमी है कि मिर्गी से पीड़ित लोगों का समर्थन कैसे किया जाए।''

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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