विदेश से एमबीबीएस करने के बाद भारत की अनिवार्य स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं करने का आरोप, ₹27 से ₹30 लाख में फर्जी प्रमाणपत्र लेकर मेडिकल कॉलेजों में की इंटर्नशिप
जयपुर, राजस्थान | 16 अक्टूबर 2026
By Mohd Haris
राजस्थान में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के फर्जी स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट घोटाले की जांच में नया खुलासा हुआ है। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने 15 अक्टूबर को 4 और मेडिकल ग्रेजुएट्स को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन्होंने विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बावजूद भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए अनिवार्य फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) पास नहीं किया। इसके बाद कथित तौर पर लाखों रुपये देकर फर्जी प्रमाणपत्र हासिल किए और राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की। एसओजी के मुताबिक, इस मामले में अब तक कुल 33 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें 28 विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के अलावा राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पूर्व रजिस्ट्रार, कर्मचारी और कथित बिचौलिए शामिल हैं। जांच एजेंसी ने 100 से अधिक संदिग्ध लाभार्थियों की पहचान भी की है।
₹30 लाख तक में तैयार कराए गए फर्जी सर्टिफिकेट
एसओजी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशाल बंसल के अनुसार, जांच में सामने आया है कि कुछ विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स ने एफएमजीई परीक्षा में असफल होने के बाद कथित बिचौलियों की मदद से फर्जी स्क्रीनिंग प्रमाणपत्र हासिल किए। इन दस्तावेजों के लिए प्रति उम्मीदवार ₹20 लाख से ₹30 लाख तक वसूले जाने का आरोप है। कथित फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप हासिल की गई और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किए गए। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि जाली दस्तावेज़ किस स्तर पर तैयार किए गए और मेडिकल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में उनकी जांच कैसे हुई।
रूस, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान से की थी एमबीबीएस की पढ़ाई हालिया कार्रवाई में गिरफ्तार 4 आरोपियों की पहचान भरत भूषण शर्मा (26), सौरव शर्मा (29), हिमांशु शर्मा (26) और शिवम चौधरी (28) के रूप में हुई है। एसओजी की जांच के अनुसार, भरत भूषण ने किर्गिस्तान, सौरव और हिमांशु ने रूस तथा शिवम चौधरी ने कजाकिस्तान से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की थी।
जांच में इनके खिलाफ निम्न आरोप सामने आए हैं।
भरत भूषण शर्मा: ₹30 लाख देकर कथित फर्जी प्रमाणपत्र हासिल किया और राजकीय मेडिकल कॉलेज, दौसा में इंटर्नशिप की।
सौरव शर्मा: ₹27 लाख में कथित फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर राजकीय मेडिकल कॉलेज, धौलपुर में इंटर्नशिप की।
हिमांशु शर्मा: ₹27 लाख देकर कथित फर्जी दस्तावेज़ हासिल किया और महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज, जयपुर में इंटर्नशिप की।
शिवम चौधरी: ₹30 लाख में कथित फर्जी प्रमाणपत्र हासिल कर राजकीय मेडिकल कॉलेज, अलवर में इंटर्नशिप की।
एसओजी के मुताबिक, चारों ने मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण के लिए भी आवेदन किया था। ये आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
4 फरवरी को दर्ज हुआ था मामला
इस कथित फर्जीवाड़े की जांच के सिलसिले में एसओजी थाना जयपुर में 4 फरवरी 2026 को मामला दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार कराने, कथित बिचौलियों की भूमिका और मेडिकल काउंसिल से संबंधित प्रक्रियाओं की पड़ताल की गई।
इससे पहले राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, कर्मचारी अखिलेश माथुर, फरहान हसन और कथित मुख्य आरोपी भानाराम माली समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी प्रमाणपत्रों का नेटवर्क कितने लोगों तक फैला था और इसमें किन-किन व्यक्तियों की भूमिका रही।
100 से अधिक संदिग्धों की पहचान
एसओजी के मुताबिक, अब तक 100 से अधिक ऐसे व्यक्तियों की पहचान हुई है जिन पर कथित फर्जी एफएमजीई प्रमाणपत्र हासिल करने या इस्तेमाल करने का संदेह है। यह संख्या जांच के दायरे में आए संदिग्धों की है। इसका अर्थ यह नहीं कि सभी के खिलाफ आरोप साबित हो चुके हैं।
पुलिस दस्तावेज़ों की वैधता, कथित भुगतान और संबंधित मेडिकल संस्थानों में इंटर्नशिप हासिल करने की प्रक्रिया की जांच कर रही है।
क्या है एफएमजीई परीक्षा और क्यों जरूरी है इसे पास करना?
फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन यानी एफएमजीई भारत में विदेशी मेडिकल डिग्री धारकों की पात्रता जांचने वाली स्क्रीनिंग परीक्षा है।
इसका संचालन नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज करता है। विदेश से मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले भारतीय अभ्यर्थियों को लागू नियमों के अनुसार भारत में मेडिकल रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस की पात्रता हासिल करने के लिए यह परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। इसके अलावा निर्धारित इंटर्नशिप, दस्तावेज़ सत्यापन और अन्य नियामकीय शर्तों को भी पूरा करना आवश्यक होता है। इस मामले में एक अहम अंतर है। जांच में आरोप विदेशी एमबीबीएस डिग्रियों के फर्जी होने का नहीं, बल्कि भारत की अनिवार्य स्क्रीनिंग परीक्षा के कथित जाली प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल का है।
मेडिकल रजिस्ट्रेशन व्यवस्था पर उठे सवाल
इस प्रकरण ने मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप और मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण के दौरान दस्तावेज़ सत्यापन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
यदि कोई उम्मीदवार अनिवार्य पात्रता परीक्षा पास किए बिना कथित फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे इंटर्नशिप हासिल करता है, तो यह संबंधित संस्थानों की जांच प्रक्रिया की प्रभावशीलता से जुड़ा विषय बन जाता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।