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मशहूर और मारूफ शायर मुनव्वर राना नहीं रहें 

None 2024-01-15 06:26:20
मशहूर और मारूफ शायर मुनव्वर राना नहीं रहें 

मुनव्वर राना 1952 में उत्तर प्रदेश के रायबरेली में पैदा हुए थे लेकिन उन्होंने अपना ज्यादातर जिंदगी कोलकाता में गुजारी

लखनऊ । मशहूर और मारूफ शायर मुनव्वर राना का देर रात दिल का दौरा पड़ने से देहांत हो गया. वह कई दिनों से बीमार थे।

मुनव्वर राना का लखनऊ के पीजीआई में इलाज चल रहा था. उन्हें 9 जनवरी को तबीयत बिगड़ने के बाद आईसीयू में भर्ती कराया गया था. मुनव्वर राना ने 71 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. मुनव्वर राना को किडनी और हार्ट मुतालिक कई मसायल थे।

 मुनव्वर राना की बेटी सुमैया राना ने बताया कि उनके वालिद का इतवार देर रात अस्पताल में देहांत हो गया. सरोज पीर को उनको सपुर्दे खाक किया जाएगा ।  

 मुनव्वर राना के फैमिली में उनकी बीवी, चार बेटियां और एक बेटा है. मुनव्वर राना के बेटे तबरेज राना ने बताया कि बीमारी की वजह से वह 14-15 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. उन्हें पहले लखनऊ के मेदांता और फिर एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था. जहां उन्होंने इतवार रात करीब 11 बजे आखरी सांस ली।

पिछले साल मुनव्वर राना को तबीयत खराब होने पर लखनऊ के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. तब भी उनकी हालत इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।

मुनव्वर राना की बेटी और  सुमैया राना ने बताया था कि उनके वालिद की सेहत पिछले दो-तीन दिनों से खराब है. डायलिसिस के दौरान उनके पेट में दर्द था जिसके चलते डॉक्टर ने उन्हें एडमिट कर लिया. उनके गॉल ब्लैडर में कुछ दिक्कत थी, जिसके चलते उसकी सर्जरी की गई. तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो उसके बाद वह वेंटिलेटर सपोर्ट सिस्टम पर चले गए।

मुनव्वर राना ने देश और विदेशों में मुनकिद मुशायरों में शिरकत करते थे और अपने बुलंद, खनकती आवाज में महफिल में जान फूंक देते थे, लेकिन मां को बयां करती उनकी लाइनें लोगों की आंखें नम कर देती थीं।

वह कहते थे-

ऐ अंधेरे देख ले मुंह तेरा काला हो गयामां ने आंखें खोल दीं घर में उजाला हो गया

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती हैमां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है

मुनव्वर राना अपने बेबाक अंदाज और बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहते थे. उनके कुछ बयानों पर कंट्रोवर्सी भी हुई. एक बार असहिष्णुता ( Intolerance )के मुद्दे पर उन्होंने अवार्ड तक वापस कर दिया था।

उदास रहने को अच्छा नहीं बताता है, कोई भी जहर को मीठा नहीं बताता हैकल अपने आपको देखा था मां की आंखों में, ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आईमैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई

मुनव्वर राना 1952 में उत्तर प्रदेश के रायबरेली में पैदा हुए थे लेकिन उन्होंने अपना ज्यादातर जिंदगी कोलकाता में गुजारी. उनकी एक रचना 'शाहदाबा' के लिए उन्हें 2014 में उर्दू जबान के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था. इससे पहले 2012 में उर्दू साहित्य में सेवाओं के लिए उन्हें शहीद शोध संस्थान की ओर से माटी रतन सम्मान से सम्मानित किया गया था. मुनव्वर राना की बेटी सुमैया राना समाजवादी पार्टी की मेंबर हैं।

Munawwar Rana

Famous and famous poet Munawwar Rana is no more

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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