2026 विश्व कप से शुरू होगा नया दौर
अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में होने वाला 2026 फीफा विश्व कप इतिहास का पहला संस्करण होगा, जिसमें 48 टीमें हिस्सा लेंगी। इससे पहले 32 टीमें टूर्नामेंट का हिस्सा होती थीं। यह बदलाव पहले ही विश्व फुटबॉल में बड़ा सुधार माना जा रहा है।
64 टीमों का प्रस्ताव क्यों महत्वपूर्ण है?
इन्फेंटिनो का मानना है कि यदि अधिक देशों को विश्व कप में खेलने का अवसर मिलेगा तो एशिया, अफ्रीका, ओशिनिया और कैरेबियन जैसे क्षेत्रों में फुटबॉल का विकास और तेज होगा। छोटे देशों को बड़े मंच पर खेलने का मौका मिलने से उनके खिलाड़ियों, कोचिंग सिस्टम और खेल ढांचे को मजबूती मिलेगी।
क्या इस प्रस्ताव पर सभी सहमत हैं?
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग राय सामने आ सकती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक टीमों से प्रतियोगिता की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और टूर्नामेंट की अवधि भी बढ़ सकती है। वहीं समर्थकों का कहना है कि फुटबॉल का उद्देश्य अधिक से अधिक देशों को वैश्विक मंच देना होना चाहिए।
फीफा किन पहलुओं पर करेगा विचार?
फीफा की संबंधित समितियां प्रतियोगिता के प्रारूप, क्वालिफिकेशन प्रक्रिया, मैचों की संख्या, खिलाड़ियों पर बढ़ने वाले कार्यभार और आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं का विस्तृत मूल्यांकन करेंगी। इसके बाद ही किसी अंतिम निर्णय की घोषणा की जाएगी।
वैश्विक फुटबॉल पर क्या पड़ेगा असर?
यदि 64 टीमों वाला प्रारूप लागू होता है तो विश्व कप के इतिहास में यह सबसे बड़ा बदलाव होगा। इससे अधिक देशों को भागीदारी का अवसर मिलेगा, नए बाजार विकसित होंगे और फुटबॉल की लोकप्रियता उन क्षेत्रों तक पहुंचेगी जहां अभी इसकी पहुंच सीमित है।