आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद उनके पिता की शिकायत पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज हुआ है। परिवार ने जातिगत गालियों और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, जबकि संस्थान ने जातिगत भेदभाव के आरोप से इनकार किया है।
📍 मुंबई
🗓️ 21 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की मौत ने कैंपस में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौत से पहले परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल किए जाने की घटना सामने आई थी। इसके बाद साहिल की मौत हुई और अब उनके माता-पिता ने आरोप लगाया है कि उन्हें लंबे समय से जातिगत टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। पुलिस ने परिवार की शिकायत पर आत्महत्या के लिए उकसाने समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के सामने क्या शिकायत दी गई
साहिल के पिता रविंद्र चक्रधर वानखड़े की शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस ने आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायत में दो अन्य लोगों की भूमिका का भी उल्लेख है, जिनकी पहचान FIR में स्पष्ट रूप से नहीं की गई है। मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
परिवार का आरोप है कि साहिल को करीब तीन महीने से जाति को लेकर अपमानजनक टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। पिता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि संबंधित शिक्षक ने साहिल के साथ जातिसूचक भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के स्तर पर नहीं हुई है।
मां ने भी लगाए गंभीर आरोप
साहिल की मां सोनाली ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका बेटा कथित तौर पर लगातार प्रताड़ना का सामना कर रहा था और परिवार न्याय चाहता है। परिवार का कहना है कि मौत से पहले तक उन्हें ऐसी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली थी जिससे उन्हें अंदाजा हो कि साहिल गंभीर मानसिक दबाव में थे।
परिवार के मुताबिक साहिल पढ़ाई में अच्छे थे और भविष्य में सिविल सर्विसेज की तैयारी करने की योजना रखते थे। उनके माता-पिता ने यह भी कहा कि वह संस्थान में खेल गतिविधियों से जुड़े थे और उनकी पढ़ाई को लेकर परिवार को कोई बड़ी चिंता नजर नहीं आई थी।
परीक्षा के दिन क्या हुआ
आईआईटी बॉम्बे के अनुसार, साहिल परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़े गए थे। संस्थान का कहना है कि उन्होंने परीक्षा का प्रश्नपत्र चैटजीपीटी पर डालकर उत्तर हासिल करने की कोशिश की थी। घटना के बाद उन्हें शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने समझाया था। संस्थान ने कहा कि इस मामले में उनके खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि इससे उनके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
इसके बाद साहिल अपने हॉस्टल लौटे। उसी शाम उनके कमरे में उनकी मौत की जानकारी सामने आई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा से जुड़ी घटना, कथित मानसिक प्रताड़ना और मौत के बीच क्या संबंध था।
परिवार और संस्थान के दावों में अंतर
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू परिवार और आईआईटी बॉम्बे के पक्षों के बीच मौजूद अंतर है। परिवार का आरोप है कि साहिल को जातिगत आधार पर परेशान किया गया और उन्हें निलंबन जैसी कार्रवाई का डर दिखाया गया। दूसरी तरफ संस्थान ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है।
आईआईटी बॉम्बे ने कहा है कि साहिल की ओर से संस्थान के एससी-एसटी सेल या प्रशासन के पास जातिगत भेदभाव की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। संस्थान ने यह भी कहा है कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और वह जांच में पूरा सहयोग करेगा।
पुलिस जांच में अब क्या अहम होगा
पुलिस जांच में परीक्षा कक्ष में हुई घटना, साहिल और संबंधित शिक्षकों के बीच बातचीत, कथित धमकियों, परिवार को दी गई जानकारी और संस्थान के रिकॉर्ड की पड़ताल अहम होगी। इसके साथ ही पुलिस यह भी देखेगी कि परिवार द्वारा लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य मौजूद हैं।
एससी-एसटी कानून के तहत दर्ज प्रकरण में आरोपों की प्रकृति और कथित घटनाओं की परिस्थितियां भी जांच का हिस्सा होंगी। फिलहाल FIR दर्ज होना आरोपों के साबित होने के बराबर नहीं है। दोष या आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
कैंपस में छात्रों का विरोध
साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे कैंपस में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। रिपोर्टों के मुताबिक बड़ी संख्या में छात्र प्रशासन से जवाबदेही, पारदर्शिता और मामले की विस्तृत जांच की मांग को लेकर सामने आए। छात्रों ने परीक्षा और अनुशासन से जुड़े दबाव तथा संस्थान की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए।
इस विरोध ने आईआईटी जैसे उच्च दबाव वाले शैक्षणिक संस्थानों में छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर व्यापक बहस को फिर सामने ला दिया है। हालांकि इस मामले में किसी एक कारण को साहिल की मौत का अंतिम कारण मानना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
आईआईटी बॉम्बे का पक्ष
आईआईटी बॉम्बे ने कहा है कि घटना की परिस्थितियों की जांच संबंधित अधिकारी कर रहे हैं। संस्थान ने पुलिस जांच में सहयोग की बात कही है और लोगों से अटकलों से बचने तथा परिवार की निजता का सम्मान करने की अपील की है।
संस्थान का यह पक्ष भी सामने आया है कि परीक्षा में मोबाइल फोन के इस्तेमाल की घटना के बाद साहिल के साथ बातचीत की गई थी और उन्हें बताया गया था कि इससे उनके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसे में पुलिस जांच का एक अहम सवाल यह रहेगा कि परिवार द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों और संस्थान के आधिकारिक दावे के बीच वास्तविक स्थिति क्या थी।
मामला क्यों अहम है
साहिल वाकोडे की मौत केवल एक छात्र की व्यक्तिगत त्रासदी तक सीमित नहीं है। इस मामले में जातिगत भेदभाव, संस्थागत जवाबदेही, परीक्षा अनुशासन और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई सवाल एक साथ सामने आए हैं।
अगर परिवार के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल गंभीर होगा कि शिकायतों और कथित उत्पीड़न की पहचान तथा रोकथाम के लिए संस्थागत तंत्र कितना प्रभावी था। दूसरी ओर, अगर आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो भी परीक्षा से जुड़े तनाव और छात्र सहायता व्यवस्था की भूमिका की स्वतंत्र समीक्षा की जरूरत पर बहस बनी रहेगी।
आगे की राह
फिलहाल मामले में पुलिस जांच सबसे अहम है। FIR में दर्ज आरोपों की पुष्टि, संबंधित लोगों के बयान, उपलब्ध डिजिटल या अन्य साक्ष्य और संस्थान के रिकॉर्ड जांच की दिशा तय करेंगे।
साहिल के परिवार ने न्याय की मांग की है। आईआईटी बॉम्बे ने जांच में सहयोग का भरोसा दिया है। इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलना चाहिए।
साहिल वाकोडे की मौत ने उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र सुरक्षा और गरिमा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो, हर आरोप और हर पक्ष की पड़ताल हो और तथ्य सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाए।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।