उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का पहला चरण समाप्त हो गया है।
31 दिसंबर को ड्राफ्ट सूची जारी होगी, जिस पर दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।
📍 लखनऊ,🗓️ 27 दिसंबर 2025 ✍️ Asif Khan
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का पहला चरण शुक्रवार को औपचारिक रूप से पूरा हो गया। निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार इस चरण में घर-घर सत्यापन, गणना प्रपत्रों का संकलन और प्रारंभिक मिलान का काम तय समयसीमा के भीतर पूरा किया गया। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से की गई है।
ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 दिसंबर को
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि 31 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी। ड्राफ्ट के प्रकाशन के साथ ही दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया शुरू होगी। यह चरण 30 जनवरी 2026 तक चलेगा, ताकि पात्र मतदाता अपने नाम जोड़ने या सुधार कराने के लिए आवेदन कर सकें।
वर्तमान मतदाता संख्या और संभावित बदलाव
वर्तमान मतदाता सूची में करीब 15 करोड़ 44 लाख नाम दर्ज हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार ड्राफ्ट सूची में लगभग 2 करोड़ 89 लाख नाम हटाए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह संख्या पिछले सत्यापन और रिकॉर्ड मिलान के आधार पर सामने आई है।
नाम हटने की श्रेणियां स्पष्ट
निर्वाचन आयोग के अनुसार जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में हैं, उनमें विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं। इनमें लगभग 1 करोड़ 26 लाख ऐसे मतदाता हैं जो स्थानांतरित पाए गए, 46 लाख मृत घोषित किए गए, 23.70 लाख डुप्लीकेट प्रविष्टियां हैं, 83.73 लाख अनुपस्थित श्रेणी में आए हैं और 9.57 लाख अन्य श्रेणी के मतदाता शामिल हैं।
नोटिस चरण में जाएंगे 1.11 करोड़ मतदाता
करीब 1 करोड़ 11 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने की प्रक्रिया तय की गई है। इन मतदाताओं के रिकॉर्ड या तो अधूरे पाए गए हैं या उनका ऐतिहासिक मिलान अभी शेष है। नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाताओं को अपनी पहचान और पात्रता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
वर्ष 2003 की सूची से मैपिंग
निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान सूची की मैपिंग का कार्य भी पूरा कर लिया है। आयोग के अनुसार लगभग 91 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान सफलतापूर्वक किया गया है। यह मिलान स्वयं मतदाता के नाम, माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी के नाम के आधार पर किया गया। शेष लगभग 9 प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं, जिनका मिलान रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हो सका।
घर-घर सत्यापन की प्रक्रिया
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान सभी जिलों में बूथ लेवल ऑफिसर और राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों को सक्रिय किया गया। बूथवार सूची तैयार कर घर-घर जाकर सत्यापन कराया गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे और अपात्र प्रविष्टियां सूची से हटाई जा सकें।
समयसीमा में विस्तार और समाप्ति
SIR की समयसीमा पहले दो बार बढ़ाई गई थी। 11 दिसंबर को इसे दूसरी बार दो सप्ताह के लिए बढ़ाकर 26 दिसंबर किया गया था। शुक्रवार को यह अवधि समाप्त हो गई और तीसरी बार समयसीमा बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया गया। आयोग के अनुसार तय कार्यक्रम के अनुसार आगे की प्रक्रिया संचालित की जाएगी।
सात लाख मतदाताओं का पुनः सत्यापन
आयोग के आंकड़ों के अनुसार पहले अनुमान में लगभग 2.96 करोड़ नाम हटने की बात सामने आई थी। बाद में सत्यापन के दौरान करीब सात लाख मतदाताओं का पता लगा लिया गया, जिससे संभावित कटौती की संख्या घटकर लगभग 2.89 करोड़ रह गई।
जिलों को दिए गए निर्देश
निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ड्राफ्ट मतदाता सूची पूरी सावधानी और पारदर्शिता के साथ जारी की जाए। दावे और आपत्तियों के निस्तारण में भी निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।
नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया
राज्य में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने का काम भी समानांतर रूप से जारी है। अब तक 11 लाख से अधिक लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया है। जिन युवाओं की आयु 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष पूरी हो रही है, वे भी आवेदन कर सकते हैं।
फॉर्म-6 और घोषणा पत्र
नए मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवाया जा रहा है। इसके साथ एक घोषणा पत्र भी लिया जा रहा है, जिससे जानकारी की पुष्टि की जा सके। सभी बूथ लेवल ऑफिसरों को पर्याप्त संख्या में फॉर्म उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
शहरी और सीमावर्ती जिलों में स्थिति
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार राजधानी लखनऊ, गाजियाबाद, प्रयागराज, कानपुर, बरेली और नेपाल सीमा से सटे जिलों में नाम कटने की संख्या अधिक हो सकती है। इन क्षेत्रों में स्थानांतरण और डुप्लीकेट प्रविष्टियों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई गई है।
बिना रिकॉर्ड वाले मतदाता
आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती उन 1 करोड़ 11 लाख मतदाताओं का सत्यापन है, जिनका कोई भी पिछला रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। जांच में पाया गया कि न तो वर्ष 2003 की सूची में उनके नाम हैं और न ही उनके माता-पिता या पूर्वजों का कोई स्पष्ट उल्लेख मिला है।
नोटिस के बाद की प्रक्रिया
ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद ऐसे मतदाताओं को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा नोटिस भेजे जाएंगे। नोटिस मिलने पर उन्हें तय समय में दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। संतोषजनक प्रमाण मिलने पर नाम अंतिम सूची में शामिल किया जाएगा।
अंतिम मतदाता सूची की तिथि
निर्वाचन आयोग के अनुसार दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 28 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। आयोग का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य एक शुद्ध, पारदर्शी और भरोसेमंद मतदाता सूची तैयार करना है।
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का पहला चरण समाप्त हो गया है।
31 दिसंबर को ड्राफ्ट सूची जारी होगी, जिस पर दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।
📍 लखनऊ,🗓️ 27 दिसंबर 2025 ✍️ Asif Khan
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का पहला चरण शुक्रवार को औपचारिक रूप से पूरा हो गया। निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार इस चरण में घर-घर सत्यापन, गणना प्रपत्रों का संकलन और प्रारंभिक मिलान का काम तय समयसीमा के भीतर पूरा किया गया। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से की गई है।
ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 दिसंबर को
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि 31 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी। ड्राफ्ट के प्रकाशन के साथ ही दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया शुरू होगी। यह चरण 30 जनवरी 2026 तक चलेगा, ताकि पात्र मतदाता अपने नाम जोड़ने या सुधार कराने के लिए आवेदन कर सकें।
वर्तमान मतदाता संख्या और संभावित बदलाव
वर्तमान मतदाता सूची में करीब 15 करोड़ 44 लाख नाम दर्ज हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार ड्राफ्ट सूची में लगभग 2 करोड़ 89 लाख नाम हटाए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह संख्या पिछले सत्यापन और रिकॉर्ड मिलान के आधार पर सामने आई है।
नाम हटने की श्रेणियां स्पष्ट
निर्वाचन आयोग के अनुसार जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में हैं, उनमें विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं। इनमें लगभग 1 करोड़ 26 लाख ऐसे मतदाता हैं जो स्थानांतरित पाए गए, 46 लाख मृत घोषित किए गए, 23.70 लाख डुप्लीकेट प्रविष्टियां हैं, 83.73 लाख अनुपस्थित श्रेणी में आए हैं और 9.57 लाख अन्य श्रेणी के मतदाता शामिल हैं।
नोटिस चरण में जाएंगे 1.11 करोड़ मतदाता
करीब 1 करोड़ 11 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने की प्रक्रिया तय की गई है। इन मतदाताओं के रिकॉर्ड या तो अधूरे पाए गए हैं या उनका ऐतिहासिक मिलान अभी शेष है। नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाताओं को अपनी पहचान और पात्रता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
वर्ष 2003 की सूची से मैपिंग
निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान सूची की मैपिंग का कार्य भी पूरा कर लिया है। आयोग के अनुसार लगभग 91 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान सफलतापूर्वक किया गया है। यह मिलान स्वयं मतदाता के नाम, माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी के नाम के आधार पर किया गया। शेष लगभग 9 प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं, जिनका मिलान रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हो सका।
घर-घर सत्यापन की प्रक्रिया
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान सभी जिलों में बूथ लेवल ऑफिसर और राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों को सक्रिय किया गया। बूथवार सूची तैयार कर घर-घर जाकर सत्यापन कराया गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे और अपात्र प्रविष्टियां सूची से हटाई जा सकें।
समयसीमा में विस्तार और समाप्ति
SIR की समयसीमा पहले दो बार बढ़ाई गई थी। 11 दिसंबर को इसे दूसरी बार दो सप्ताह के लिए बढ़ाकर 26 दिसंबर किया गया था। शुक्रवार को यह अवधि समाप्त हो गई और तीसरी बार समयसीमा बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया गया। आयोग के अनुसार तय कार्यक्रम के अनुसार आगे की प्रक्रिया संचालित की जाएगी।
सात लाख मतदाताओं का पुनः सत्यापन
आयोग के आंकड़ों के अनुसार पहले अनुमान में लगभग 2.96 करोड़ नाम हटने की बात सामने आई थी। बाद में सत्यापन के दौरान करीब सात लाख मतदाताओं का पता लगा लिया गया, जिससे संभावित कटौती की संख्या घटकर लगभग 2.89 करोड़ रह गई।
जिलों को दिए गए निर्देश
निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ड्राफ्ट मतदाता सूची पूरी सावधानी और पारदर्शिता के साथ जारी की जाए। दावे और आपत्तियों के निस्तारण में भी निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।
नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया
राज्य में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने का काम भी समानांतर रूप से जारी है। अब तक 11 लाख से अधिक लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया है। जिन युवाओं की आयु 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष पूरी हो रही है, वे भी आवेदन कर सकते हैं।
फॉर्म-6 और घोषणा पत्र
नए मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवाया जा रहा है। इसके साथ एक घोषणा पत्र भी लिया जा रहा है, जिससे जानकारी की पुष्टि की जा सके। सभी बूथ लेवल ऑफिसरों को पर्याप्त संख्या में फॉर्म उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
शहरी और सीमावर्ती जिलों में स्थिति
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार राजधानी लखनऊ, गाजियाबाद, प्रयागराज, कानपुर, बरेली और नेपाल सीमा से सटे जिलों में नाम कटने की संख्या अधिक हो सकती है। इन क्षेत्रों में स्थानांतरण और डुप्लीकेट प्रविष्टियों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई गई है।
बिना रिकॉर्ड वाले मतदाता
आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती उन 1 करोड़ 11 लाख मतदाताओं का सत्यापन है, जिनका कोई भी पिछला रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। जांच में पाया गया कि न तो वर्ष 2003 की सूची में उनके नाम हैं और न ही उनके माता-पिता या पूर्वजों का कोई स्पष्ट उल्लेख मिला है।
नोटिस के बाद की प्रक्रिया
ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद ऐसे मतदाताओं को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा नोटिस भेजे जाएंगे। नोटिस मिलने पर उन्हें तय समय में दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। संतोषजनक प्रमाण मिलने पर नाम अंतिम सूची में शामिल किया जाएगा।
अंतिम मतदाता सूची की तिथि
निर्वाचन आयोग के अनुसार दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 28 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। आयोग का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य एक शुद्ध, पारदर्शी और भरोसेमंद मतदाता सूची तैयार करना है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।