योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बरेली DM अविनाश सिंह ने पांच अपराधियों को जिला बदर किया, शस्त्र निरस्तीकरण की कार्यवाही भी पूरी।
Bareilly, (Shah Times)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लगातार अपने Zero Tolerance Policy को लेकर सुर्ख़ियों में है। "क़ानून का राज" और "गुंडा मुक्त समाज" इस प्रशासन का केन्द्रीय नारा बन चुका है। ताज़ा कार्रवाई बरेली ज़िले में सामने आई है, जहाँ जिला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह ने उ०प्र० गुण्डा नियंत्रण अधिनियम 1970 के तहत पाँच अपराधियों को छह महीने के लिए जिला बदर कर दिया। साथ ही शस्त्र धारक की मृत्यु पर आर्म्स एक्ट के तहत लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही भी उपशमित की गई।
सरकारी कार्रवाई की पृष्ठभूमि
योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ही क़ानून व्यवस्था पर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की थी। “अपराध पर नकेल और अपराधियों पर शिकंजा” – यही सरकार की कार्यशैली का मुख्य आयाम है।
जिला मजिस्ट्रेट का आदेश: बरेली DM अविनाश सिंह ने अपराधियों पर नज़र डालते हुए गुंडा एक्ट की धाराओं का उपयोग किया।
गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970: यह कानून उन व्यक्तियों पर लागू होता है जो लगातार अपराधों में संलिप्त पाए जाते हैं और जिनकी गतिविधियाँ समाज और शांति व्यवस्था के लिए ख़तरा बन जाती हैं।
जिला बदर हुए अपराधियों की सूची
आशिफ़ उर्फ लंगड़ा (पुत्र अब्दुल क़ादिर) – थाना बहेड़ी, 24 मुक़दमे दर्ज।
तस्लीम उर्फ कलुआ (पुत्र साबिर) – थाना बहेड़ी, 19 मुक़दमे दर्ज।
विशाल यादव (पुत्र इन्द्रपाल) – थाना इज्जतनगर, 07 मुक़दमे दर्ज।
विकास (पुत्र इन्द्रपाल) – थाना इज्जतनगर, 04 मुक़दमे दर्ज।
नाज़िम (पुत्र निसार अली) – थाना इज्जतनगर, 03 मुक़दमे दर्ज।
👉 इन पाँचों अपराधियों को छह माह के लिए जिला बदर किया गया है।
शस्त्र निरस्तीकरण की कार्यवाही
भारतीय शस्त्र अधिनियम 1959 की धारा 17(3) के अंतर्गत, रति राम पुत्र राम लाल निवासी बिहारीपुर उर्फ शेखूपुर थाना भमोरा की मृत्यु के बाद उनके लाइसेंसधारी शस्त्र को निरस्त कर दिया गया। यह कार्यवाही 4 सितंबर को आधिकारिक रूप से संपन्न हुई।
सरकारी दृष्टिकोण से यह कार्रवाई Law & Order Strengthening का हिस्सा है। अपराधियों पर लगातार शिकंजा कसने का असर सामाजिक माहौल में देखा जा सकता है।
प्रशासनिक संदेश: अपराधियों को साफ़ चेतावनी – “अपराध या तो छोड़ो, या फिर प्रदेश छोड़ो।”
सामाजिक प्रभाव: लोगों में क़ानून पर भरोसा बढ़ता है जब सरकार अपराधियों पर कार्रवाई करती है।
राजनीतिक संदेश: यह सख़्ती सीधे तौर पर योगी सरकार के शासन-शैली को मज़बूत करती है।
हर नीति के साथ आलोचना भी होती है।
मानवाधिकार की बहस: कुछ लोग कहते हैं कि जिला बदर की प्रक्रिया कभी-कभी “due process” को बायपास करती है। अपराधियों को बिना मुकम्मल ट्रायल के सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर देना उनके बुनियादी अधिकारों के ख़िलाफ़ हो सकता है।
पुनर्वास का सवाल: अपराधियों को केवल जिला बदर करने से अपराध कम होंगे या नहीं, यह विवादित प्रश्न है। क्या सरकार को इनके पुनर्वास के उपाय नहीं खोजने चाहिए?
कानूनी चुनौती: जिला बदर आदेशों को अपराधी अक्सर हाईकोर्ट में चुनौती देते हैं। कई मामलों में ऐसे आदेशों को न्यायालय ने निरस्त भी किया है।
बरेली में जिला मजिस्ट्रेट की कार्रवाई यह दर्शाती है कि योगी सरकार अपराधियों के प्रति कोई नरमी बरतने को तैयार नहीं है। हालांकि यह बहस भी ज़िंदा है कि सिर्फ़ जिला बदर काफ़ी है या अपराधियों के पुनर्वास और सुधार की नीतियाँ भी ज़रूरी हैं।
क़ानून व्यवस्था की मज़बूती और मानवाधिकारों का संतुलन – यही लोकतांत्रिक राज्य का सबसे बड़ा इम्तहान है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।