कांवड़ यात्रा में 11 हजार वोल्ट लाइन से पांच झुलसे
डीजे कैंटर बिजली लाइन से टकराया, पांच लोग झुलसे
राजस्थान में कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ा बिजली हादसा
राजस्थान के खैरथल-तिजारा में कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे कैंटर 11 हजार वोल्ट की लाइन की चपेट में आ गया। पांच लोग झुलसे। चार गंभीर घायलों को अलवर रेफर किया गया। परिजनों ने लाइन की ऊंचाई पर सवाल उठाए हैं। हादसे की जांच और सुरक्षा मानकों की पुष्टि बाकी है।
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जोजाका, खैरथल-तिजारा, राजस्थान | 11 अगस्त 2026 | Mohd Naved
कांवड़ यात्रा के दौरान बिजली लाइन की चपेट में आया डीजे कैंटर
राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में कांवड़ यात्रा के दौरान 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन की चपेट में आने से पांच लोग झुलस गए। हादसा मंगलवार को शेखपुर थाना क्षेत्र के जोजाका गांव में हुआ। कांवड़ यात्रा में शामिल डीजे कैंटर आगे चल रहा था और उसके ऊपर बैठे लोग बिजली लाइन के संपर्क में आ गए।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कैंटर के ऊपर बैठे चार युवकों की पहचान सागर, मोहित, करण और सुनील के रूप में हुई है। इनके अलावा एक कांवड़िया भी करंट की चपेट में आया। हादसे के बाद यात्रा में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों तथा परिजनों ने घायलों को तत्काल तिजारा अस्पताल पहुंचाया।
गंभीर रूप से झुलसे चार लोगों को अलवर भेजा गया
तिजारा अस्पताल में घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया। हालत गंभीर होने पर चार लोगों को अलवर के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल रेफर किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट में घायलों की आगे की चिकित्सकीय स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
हादसे के बाद विद्युत लाइन भी टूट गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। राजस्थान पुलिस के रिकॉर्ड में जोजाका गांव शेखपुर अहीर थाना क्षेत्र में दर्ज है।
परिजनों ने विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
हादसे के बाद घायलों के परिजनों ने विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की लाइन काफी नीचे थी और सड़क से करीब 10 फुट की ऊंचाई पर थी। परिजनों के मुताबिक, इसी वजह से कैंटर के ऊपर बैठे लोग लाइन के संपर्क में आए।
यह दावा फिलहाल परिजनों के आरोप के रूप में सामने आया है। उपलब्ध सामग्री में विद्युत विभाग की ओर से लाइन की वास्तविक ऊंचाई, रखरखाव या हादसे के कारण पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान दर्ज नहीं है। इसलिए यह तय करना जल्दबाजी होगी कि दुर्घटना के लिए केवल लाइन की ऊंचाई जिम्मेदार थी।
बिजली सुरक्षा नियम हादसे की जांच में क्यों अहम हैं
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के 2023 के सेफ्टी रेगुलेशंस में ओवरहेड इलेक्ट्रिकल लाइनों के लिए अलग-अलग परिस्थितियों में न्यूनतम क्लीयरेंस निर्धारित किए गए हैं। रेगुलेशंस के शेड्यूल में 11 केवी लाइन के लिए सड़क और जमीन के ऊपर न्यूनतम क्लीयरेंस का प्रावधान दिया गया है।
उपलब्ध नियामकीय दस्तावेज के अनुसार, 11 केवी सिस्टम के लिए सामान्य स्थिति में जमीन से कंडक्टर की न्यूनतम ऊंचाई 6.50 मीटर और सड़क के ऊपर अलग-अलग श्रेणियों में निर्धारित क्लीयरेंस लागू होता है। इसलिए इस हादसे में केवल यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि लाइन नीचे थी। मौके पर वास्तविक माप, सड़क की श्रेणी, लाइन का प्रकार, अधिकतम सैग और घटना के समय कैंटर की ऊंचाई जैसे तकनीकी पहलुओं की जांच जरूरी होगी।
रेगुलेटरी व्यवस्था में इलेक्ट्रिकल दुर्घटनाओं की जांच की जिम्मेदारी
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की चीफ इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टरेट डिविजन इलेक्ट्रिकल दुर्घटनाओं की जांच और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुधारात्मक उपाय सुझाने की जिम्मेदारी निभाती है। सीईए के मुताबिक, यह डिविजन इलेक्ट्रिकल दुर्घटनाओं से संबंधित आंकड़े भी एकत्र करता है।
इस संदर्भ में जोजाका हादसे की तकनीकी जांच अहम हो जाती है। जांच में यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित लाइन निर्धारित क्लीयरेंस के अनुरूप थी या नहीं, लाइन में किसी तरह का झुकाव या सैग था या नहीं, सड़क पर चलने वाले ऊंचे वाहनों के लिए कोई चेतावनी या सुरक्षा व्यवस्था थी या नहीं और कांवड़ यात्रा के दौरान मार्ग का विद्युत सुरक्षा ऑडिट किया गया था या नहीं।
कांवड़ यात्रा और ऊंचे वाहनों की सुरक्षा का सवाल
कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में सड़क पर पैदल श्रद्धालुओं के साथ डीजे वाहन, ट्रैक्टर, कैंटर और अन्य वाहन भी चलते हैं। ऐसे आयोजनों में सामान्य यातायात व्यवस्था के साथ ओवरहेड बिजली लाइनों की स्थिति भी महत्वपूर्ण सुरक्षा मुद्दा बन जाती है।
जोजाका की घटना इसी व्यापक सुरक्षा चुनौती की ओर इशारा करती है। यदि किसी मार्ग पर ऊंचे वाहन नियमित रूप से गुजरते हैं, तो विद्युत लाइनों की ऊंचाई और सड़क की वास्तविक परिस्थितियों का निरीक्षण केवल सामान्य दिनों के लिए नहीं, बल्कि बड़े आयोजनों के दौरान भी किया जाना जरूरी है।
हालांकि, इस मामले में यह दावा उपलब्ध नहीं है कि प्रशासन या विद्युत विभाग को पहले से किसी विशेष जोखिम की जानकारी थी। इसलिए किसी अधिकारी या विभाग पर लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने से पहले आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।
हादसे के बाद क्या सवाल सबसे अहम हैं
पहला सवाल यह है कि घटना के समय 11 हजार वोल्ट की लाइन की वास्तविक ऊंचाई कितनी थी। दूसरा सवाल कैंटर की कुल ऊंचाई और उसके ऊपर बैठे लोगों की स्थिति से जुड़ा है। तीसरा सवाल यह है कि यात्रा मार्ग पर बिजली लाइनों का पहले से निरीक्षण हुआ था या नहीं।
इसके अलावा यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि लाइन टूटने की वजह क्या थी और क्या घटना के बाद विद्युत आपूर्ति को तत्काल बंद किया गया था। उपलब्ध रिपोर्ट इन तकनीकी सवालों का पूरा जवाब नहीं देती।
घायलों की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर
हादसे में पांच लोग झुलसे हैं और चार को गंभीर स्थिति में अलवर रेफर किए जाने की सूचना है। ऐसे मामलों में शुरुआती चिकित्सा उपचार के बाद मरीजों की स्थिति बदल सकती है। इसलिए आगे की मेडिकल रिपोर्ट हादसे की गंभीरता का अधिक स्पष्ट आकलन देगी।
पुलिस और प्रशासन ने घटना की जानकारी जुटाई है। लेकिन उपलब्ध सामग्री में एफआईआर, विद्युत विभाग की जांच रिपोर्ट, जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई या किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की पुष्टि नहीं है। इन पहलुओं की जानकारी आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
कांवड़ यात्रा में 11 हजार वोल्ट लाइन का जोखिम
कांवड़ यात्रा के दौरान ऊंचे डीजे कैंटर का बिजली लाइन के नीचे से गुजरना एक गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा करता है। हाई-वोल्टेज लाइन के संपर्क में आने के लिए तार को वाहन से सीधे छूना जरूरी नहीं होता। पर्याप्त सुरक्षा दूरी नहीं होने पर भी विद्युत आर्किंग का जोखिम पैदा हो सकता है।
यही वजह है कि ओवरहेड बिजली लाइनों के लिए निर्धारित क्लीयरेंस का पालन महत्वपूर्ण है। सीईए के 2023 रेगुलेशंस बिजली लाइनों, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन और बिजली आपूर्ति से जुड़े सुरक्षा उपायों के लिए व्यापक प्रावधान निर्धारित करते हैं।
आगे क्या होना चाहिए
इस हादसे के बाद सबसे पहले घायलों के इलाज और उनकी स्थिति की आधिकारिक जानकारी सामने आनी चाहिए। इसके साथ ही संबंधित लाइन और सड़क की संयुक्त तकनीकी जांच जरूरी है। जांच में लाइन की ऊंचाई, पोल की स्थिति, कंडक्टर का सैग, वाहन की ऊंचाई और यात्रा मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था का दस्तावेजी परीक्षण होना चाहिए।
यदि जांच में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय करने के साथ सुधारात्मक कार्रवाई भी जरूरी होगी। यदि लाइन निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई जाती है, तो फिर कैंटर की ऊंचाई, मार्ग प्रबंधन और आयोजन संबंधी सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका की जांच करनी होगी।
जोजाका का हादसा फिलहाल पांच लोगों के झुलसने और चार गंभीर घायलों के अलवर रेफर होने के रूप में स्थापित है। यह भी सामने आया है कि डीजे कैंटर 11 हजार वोल्ट की लाइन की चपेट में आया और विद्युत लाइन टूट गई।
वहीं, लाइन की ऊंचाई करीब 10 फुट होने और इसी वजह से हादसा होने का दावा परिजनों की ओर से किया गया है। इसकी स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है। इसलिए जिम्मेदारी तय करने से पहले आधिकारिक जांच जरूरी है।
कांवड़ यात्रा में 11 हजार वोल्ट लाइन से जुड़ा यह हादसा धार्मिक आयोजनों के दौरान विद्युत सुरक्षा, मार्ग निरीक्षण और ऊंचे वाहनों के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाता है। आगे की जांच ही बताएगी कि घटना में विद्युत व्यवस्था, वाहन की ऊंचाई, मार्ग प्रबंधन या इन सभी कारकों की क्या भूमिका रही।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।