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पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का 92 वर्ष की आयु में देहांत

None 2024-12-27 06:30:52
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का 92 वर्ष की आयु में देहांत

डॉ मनमोहन सिंह को भारत में आर्थिक सुधारों की शुरुआत करने वाले शीर्ष अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री के तौर पर लगातार दो कार्यकाल तक गठबंधन सरकार चलाने वाले पहले कांग्रेस नेता के तौर पर याद किया जाएगा।

नई दिल्‍ली, ( Shah Times)। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. दिल्ली एम्स में डॉक्टरों की एक टीम उनका इलाज कर रही थी. बताया जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री को गुरुवार शाम करीब 8 बजे एम्स लाया गया था. उनका इलाज इमरजेंसी वार्ड में चल रहा था. कई डॉक्टरों की टीम उनकी जांच कर रही थी, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. डॉ. मनमोहन सिंह लगातार दो बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके थे. उन्होंने 2004 से 2014 तक देश की बागडोर संभाली थी. उन्होंने 2008 की आर्थिक मंदी को बखूबी संभाला था. पूरी दुनिया ने उनके हुनर ​​का लोहा माना था।

जानकारी के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की तबीयत गुरुवार (26 दिसंबर 2024) को अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें आनन-फानन में दिल्ली एम्स के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि सांस लेने में दिक्कत महसूस होने के बाद उन्हें एम्स लाया गया, जहां उन्हें आईसीयू में रखा गया। प्रधानमंत्री का पद संभालने से पहले मनमोहन सिंह भारत के वित्त मंत्री और वित्त सचिव भी रह चुके थे। नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान अर्थव्यवस्था के उदारीकरण में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। मनमोहन सिंह आरबीआई गवर्नर भी रह चुके थे।

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कई बार अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका था। उम्र से जुड़ी परेशानियों के चलते वह अक्सर परेशान रहते थे। इस बार बताया जा रहा है कि सांस लेने में तकलीफ के चलते पूर्व प्रधानमंत्री को दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया था।

वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। विभिन्न विभागों के डॉक्टरों की टीम मनमोहन सिंह के स्वास्थ्य और उनकी स्थिति पर नजर रख रही थी।

आपको बता दें कि डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म साल 1932 में पाकिस्तान में हुआ था। बंटवारे के बाद वह भारत आ गए थे। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का 92 साल की उम्र में निधन हो गया।

26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गाह गांव में गुरमुख सिंह और अमृत कौर के घर जन्मे मनमोहन सिंह ने 1948 में पंजाब में अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की। उनका शैक्षणिक जीवन उन्हें पंजाब से कैम्ब्रिज, यूके ले गया, जहां उन्होंने 1957 में अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी की ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद मनमोहन सिंह ने 1962 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नफिल्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में डी.फिल. की डिग्री प्राप्त की।

सौम्य और मृदुभाषी व्यक्तित्व वाले डॉ मनमोहन सिंह को भारत में आर्थिक सुधारों की शुरुआत करने वाले शीर्ष अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री के तौर पर लगातार दो कार्यकाल तक गठबंधन सरकार चलाने वाले पहले कांग्रेस नेता के तौर पर याद किया जाएगा। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के 10 साल तक प्रधानमंत्री रहे सिंह को उनकी आर्थिक विद्वता और कार्यों के लिए दुनिया भर में सम्मान मिला। उन्होंने भारत के 14वें प्रधानमंत्री के तौर पर 2004 से 2014 तक 10 साल तक देश का नेतृत्व किया। कभी अपने गांव में मिट्टी के तेल के दीये की रोशनी में पढ़ाई करने वाले सिंह बाद में एक प्रसिद्ध शिक्षाविद् बने। 1990 के दशक की शुरुआत में भारत को उदारीकरण की राह पर लाने के लिए मनमोहन सिंह की प्रशंसा की गई, लेकिन प्रधानमंत्री के तौर पर अपने 10 साल के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों पर आंखें मूंद लेने के लिए उनकी आलोचना भी हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने कहा, 'भारत अपने सबसे प्रतिष्ठित नेताओं में से एक डॉ. मनमोहन सिंह जी के निधन पर शोक व्यक्त करता है। एक साधारण परिवार से निकलकर वे एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री बने। उन्होंने वित्त मंत्री सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया और वर्षों तक हमारी आर्थिक नीति पर अपनी मजबूत छाप छोड़ी। संसद में उनका हस्तक्षेप भी व्यावहारिक था। हमारे प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए।'

मनमोहन सिंह के करीबी सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी द्वारा दोषी नेताओं को चुनाव लड़ने की अनुमति देने के लिए अध्यादेश लाने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले की प्रति फाड़ने के बाद सिंह ने लगभग इस्तीफा देने का फैसला कर लिया था। उस समय वे विदेश में थे। भाजपा द्वारा मनमोहन सिंह पर अक्सर भ्रष्टाचार में डूबी सरकार चलाने का आरोप लगाया जाता था। पार्टी ने उन्हें 'मौनमोहन सिंह' नाम दिया था और उन पर अपने मंत्रिमंडल में भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ आवाज न उठाने का आरोप लगाया था।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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