पूर्व इजरायली मेजर जनरल नित्ज़ान अलोन ने कहा कि गाजा युद्ध और बंधक संकट का समझौता लगभग 1 साल पहले संभव था। उन्होंने युद्ध को अनावश्यक रूप से लंबा खिंचने की बात कही।
तेल अवीव | 3 अक्टूबर 2026
By Mohd Haris
गाजा युद्ध पर पूर्व वार्ताकार का बड़ा दावा
गाजा युद्ध को लेकर इजरायल के एक पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के बयान ने बंधक वार्ता और युद्ध की अवधि पर फिर बहस तेज कर दी है। मेजर जनरल नित्ज़ान अलोन ने कहा है कि इजरायल उस स्थिति तक लगभग 1 साल पहले पहुंच सकता था, जहां वह अक्टूबर 2025 के समझौते के जरिए पहुंचा।
अलोन उस समय इजरायली सेना में बंधक वार्ता के प्रमुख संपर्क अधिकारी थे। उन्होंने 2 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक नीति फोरम में कहा कि युद्ध को पहले छोटा किया जा सकता था और बंधकों की वापसी भी पहले संभव थी। कार्यक्रम के आधिकारिक विवरण में भी उन्हें 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद बंधक वार्ता के लिए इजरायली सेना का प्रमुख संपर्क अधिकारी बताया गया है।
नित्ज़ान अलोन ने क्या कहा?
अलोन के मुताबिक इजरायल उस मुकाम तक “बहुत पहले” पहुंच सकता था, संभवतः करीब 1 साल पहले। उनका कहना था कि ऐसा करने से युद्ध के दूसरे रणनीतिक लक्ष्यों पर कोई बड़ा असर जरूरी नहीं था।
उन्होंने युद्ध को लंबा खिंचने का जिक्र करते हुए कहा कि अवसर गंवाया गया। उनके आकलन में पहले समझौते से कुछ ऐसे बंधकों की जान भी बच सकती थी, जो बाद में कैद के दौरान मारे गए।
यह अलोन का आकलन है। इसे किसी स्वतंत्र जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। उनका बयान युद्ध के दौरान हुई वार्ता, उपलब्ध विकल्पों और उस समय लिए गए फैसलों की उनकी पेशेवर समीक्षा पर आधारित है।
अलोन की भूमिका क्या थी?
नित्ज़ान अलोन इजरायली सेना से सेवानिवृत्त मेजर जनरल हैं। 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद उन्हें बंधक वार्ता से जुड़ी सैन्य जिम्मेदारी दी गई थी।
इससे पहले वह इजरायली सेना के सेंट्रल कमांड के प्रमुख रह चुके हैं। उन्होंने सैन्य खुफिया के ऑपरेशंस डिवीजन और वेस्ट बैंक से जुड़े कमांड पदों पर भी काम किया था।
इस पृष्ठभूमि की वजह से बंधक वार्ता और युद्ध की रणनीति पर उनका बयान एक पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
किस समझौते की ओर इशारा है?
अलोन का संदर्भ अक्टूबर 2025 में हुए उस युद्धविराम और बंधक समझौते से है, जिसके तहत गाजा में मौजूद जीवित इजरायली बंधकों की रिहाई हुई थी।
उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार अक्टूबर 2025 के समझौते के पहले चरण में 20 जीवित इजरायली बंधकों की रिहाई हुई। इसके बदले इजरायल की जेलों में बंद बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी कैदियों और हिरासत में रखे गए लोगों की रिहाई का प्रावधान था।
अलोन का तर्क है कि जिस परिणाम तक इजरायल अक्टूबर 2025 में पहुंचा, उसके लिए इतनी लंबी लड़ाई जरूरी नहीं थी।
क्या बंधक पहले रिहा हो सकते थे?
यही अलोन के बयान का सबसे अहम हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि अगर पहले समझौता हुआ होता तो कुछ बंधक, जो बाद में कैद में मारे गए, जीवित वापस लौट सकते थे। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध को छोटा करने से दोनों पक्षों की जानें बच सकती थीं।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। “समझौता पहले संभव था” एक पूर्व वार्ताकार का आकलन है। इससे यह स्वतः साबित नहीं होता कि हमास और इजरायल उस समय निश्चित रूप से किसी समझौते पर हस्ताक्षर कर देते।
वार्ता में बंधकों की रिहाई, युद्धविराम की अवधि, इजरायली सेना की तैनाती, फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई और गाजा के भविष्य को लेकर गंभीर मतभेद रहे थे।
वार्ता में सबसे बड़ी अड़चनें क्या थीं?
गाजा युद्ध के दौरान बातचीत कई अलग-अलग मुद्दों पर अटकी रही।
इजरायल की प्राथमिकता बंधकों की वापसी और हमास की सैन्य क्षमता को कमजोर करना रही। दूसरी तरफ हमास स्थायी युद्धविराम, इजरायली सैन्य वापसी और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई जैसी मांगों पर जोर देता रहा।
इन मुद्दों के बीच मध्यस्थों के सामने ऐसा समझौता तैयार करना कठिन था, जिसमें दोनों पक्ष अपनी मूल सुरक्षा और राजनीतिक मांगों के साथ आगे बढ़ सकें।
2024 की वार्ताओं से जुड़े पूर्व इजरायली वार्ता अधिकारियों ने भी बाद में अलग-अलग मौकों पर दावा किया था कि कुछ समय पर समझौते की गुंजाइश बनी थी। हालांकि उन आकलनों पर इजरायली सरकार की ओर से विरोध और अलग व्याख्याएं भी सामने आई थीं।
क्या अलोन ने सरकार पर राजनीतिक आरोप लगाया?
अलोन ने अपने हालिया बयान में राजनीतिक और व्यक्तिगत विचारों के प्रभाव का सवाल उठाए जाने पर यह नहीं कहा कि वह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मंशा को निश्चित रूप से जानते थे।
उन्होंने इसके बजाय यह तर्क रखा कि युद्ध के रणनीतिक लक्ष्य पहले हासिल किए जा सकते थे।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। किसी नीति फैसले की आलोचना और किसी नेता की निजी मंशा का दावा दो अलग बातें हैं। अलोन के बयान को मुख्य रूप से युद्ध की रणनीति और बंधक वार्ता के परिणाम पर उनका आकलन माना जाना चाहिए।
“टोटल विक्ट्री” की बहस
अलोन ने युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए “टोटल विक्ट्री” यानी पूर्ण जीत के लक्ष्य को भी अपने आकलन के केंद्र में रखा।
उनका तर्क था कि इजरायल को अपने रणनीतिक लक्ष्यों और बंधकों की वापसी के बीच ऐसा संतुलन तलाशना चाहिए था, जिससे युद्ध कम समय में समाप्त हो सके।
उन्होंने अक्टूबर 2025 के समझौते को एक रणनीतिक उपलब्धि के रूप में स्वीकार किया, लेकिन साथ ही कहा कि इसी तरह का परिणाम पहले हासिल किया जा सकता था।
इस दावे का अर्थ यह नहीं है कि युद्ध के दौरान मौजूद सभी सुरक्षा और सैन्य चुनौतियां आसानी से हल हो सकती थीं। यह अलोन का retrospective assessment है, यानी घटनाओं के बाद किया गया रणनीतिक आकलन।
बंधक संकट की मानवीय कीमत
7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद बड़ी संख्या में लोगों को गाजा ले जाकर बंधक बनाया गया। बंधकों की रिहाई इजरायल के लिए युद्ध का सबसे संवेदनशील मानवीय और राजनीतिक मुद्दा रही।
युद्ध के दौरान कुछ बंधक अलग-अलग समझौतों के तहत रिहा हुए। कुछ को सैन्य अभियान के दौरान बचाया गया और कुछ की मौत की पुष्टि हुई।
अक्टूबर 2025 के समझौते ने शेष जीवित बंधकों की वापसी का एक बड़ा चरण पूरा किया। इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर अलोन का कहना है कि इससे पहले भी एक व्यापक समझौते की संभावना मौजूद थी।
अलोन के बयान का राजनीतिक संदर्भ
अलोन का बयान ऐसे समय आया है जब 7 अक्टूबर 2023 के हमले के 3 साल पूरे होने जा रहे हैं और इजरायल में युद्ध से जुड़े राजनीतिक फैसलों पर बहस जारी है।
उनका बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह सरकार के बाहर से टिप्पणी करने वाले सामान्य विश्लेषक नहीं हैं। वह उस सैन्य ढांचे का हिस्सा रहे हैं, जो बंधकों की वापसी और वार्ता से सीधे जुड़ा था।
क्या पहले समझौते से हजारों जानें बचतीं?
अलोन ने कहा कि अगर युद्ध लगभग 1 साल पहले छोटा किया जाता तो दोनों पक्षों की हजारों जानें बच सकती थीं।
यह भविष्यवाणी नहीं बल्कि घटनाओं के बाद उनका आकलन है।
इस दावे की स्वतंत्र रूप से ऐसी गणना के जरिए पुष्टि करना कठिन है, क्योंकि इसमें यह तय करना पड़ेगा कि यदि किसी खास तारीख पर समझौता होता तो उसके बाद सैन्य कार्रवाई, बंधक मौतें, नागरिक हताहत और अन्य घटनाएं किस तरह बदलतीं।
इजरायल की सुरक्षा चिंताएं भी बनी रहीं
इस पूरे विवाद में इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को अलग नहीं किया जा सकता।
7 अक्टूबर 2023 के हमले ने इजरायल में राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस को बदल दिया। सरकार के सामने बंधकों की वापसी के साथ हमास की सैन्य क्षमता को कमजोर करने और भविष्य के हमलों को रोकने का लक्ष्य भी था।
इसलिए किसी भी समझौते की व्यवहारिकता केवल बंधकों की संख्या या युद्धविराम की अवधि से तय नहीं होती। सैन्य तैनाती, गाजा की सुरक्षा व्यवस्था, हमास की भूमिका और युद्ध के बाद के शासन का सवाल भी इसमें शामिल था।
फिलिस्तीनी पक्ष की मांगें भी निर्णायक थीं
दूसरी ओर फिलिस्तीनी पक्ष के लिए स्थायी युद्धविराम, इजरायली सैन्य कार्रवाई का अंत, विस्थापित लोगों की वापसी और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई अहम मुद्दे रहे।
यही वजह है कि बंधक वार्ता को केवल एक पक्ष की राजनीतिक इच्छा से समझना अधूरा होगा।
किसी भी समझौते के लिए इजरायल और हमास के साथ मध्यस्थ देशों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। बातचीत में अलग-अलग चरणों पर प्रस्ताव बदले और दोनों पक्षों की शर्तें भी बदलती रहीं।
अब इस बयान का महत्व क्या है?
नित्ज़ान अलोन का बयान गाजा युद्ध के दौरान लिए गए फैसलों की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण नया input है।
इससे 3 सवाल फिर सामने आते हैं।
क्या बंधकों की वापसी को युद्ध के शुरुआती चरणों में ज्यादा प्राथमिकता दी जा सकती थी?
क्या इजरायल के रणनीतिक लक्ष्य और युद्धविराम एक साथ हासिल करने का रास्ता पहले मौजूद था?
और क्या बाद में हासिल हुए समझौते की शर्तें पहले किसी दूसरे रूप में स्वीकार की जा सकती थीं?
इन सवालों का अंतिम जवाब केवल एक बयान से नहीं निकलेगा। इसके लिए उस समय की वार्ता फाइलों, प्रस्तावों, सैन्य आकलनों और दोनों पक्षों के फैसलों का स्वतंत्र अध्ययन जरूरी होगा।
टाइमलाइन
7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में इजरायल पर हमला हुआ और बड़ी संख्या में लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया।
नवंबर 2023 में अस्थायी युद्धविराम और बंधक-कैदी आदान-प्रदान के जरिए बड़ी संख्या में बंधकों की रिहाई हुई।
2024 में युद्ध और वार्ता दोनों जारी रहे, लेकिन स्थायी समझौता नहीं हो सका।
2025 में फिर व्यापक युद्धविराम और बंधक समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ी।
अक्टूबर 2025 में समझौते के पहले चरण के तहत 20 जीवित इजरायली बंधकों की रिहाई हुई।
जुलाई 2026 में नित्ज़ान अलोन ने सार्वजनिक रूप से कहा कि युद्ध कम से कम 1 साल पहले समाप्त हो सकता था।
2 अक्टूबर 2026 को उन्होंने फिर कहा कि युद्ध को छोटा किया जा सकता था और बंधकों की वापसी पहले हो सकती थी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।