शुक्रवार, 10 July 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
SmarterASP.NET Hosting
None

30 साल बाद सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता को मिला इंसाफ

None 2024-03-18 17:11:59
30 साल बाद सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता को मिला इंसाफ

रामपुर तिराहा कांड मे दोषियों को आजीवन कारावास

मुजफ्फरनगर,(Shah Times)। अलग राज्य गठन की मांग को लेकर उत्तराखंड से दिल्ली जा रहे  आंदोलनकारी महिला से सामूहिक दुष्कर्म के दोषी पीएसी के सेवानिवृत्त सिपाहियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

घटना के 30 साल बाद पीड़िता को इंसाफ मिला है। चार दिन पहले अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह ने सामूहिक दुष्कर्म के दो आरोपित पीएसी के सेवानिवृत्त दो सिपाहियों को मामले में दोषी ठहराया था। सोमवार को सजा के प्रश्न पर कोर्ट में बहस हुई। दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने दुष्कर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 

कोर्ट ने घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह ऐसी घटना से समाज शर्मसार हुआ। अंग्रेजी जमाने में जलियांवाला कांड हुआ था, लेकिन आजाद भारत में लोकतांत्रिक परंपरा के तहत अपनी मांगो को मनवाने के लिए शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे महिलाओं के साथ इस तरह की घटना कारित करना क्षम्य है।

उत्तराखंड संघर्ष समिति की ओर से अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने बताया कि राज्य उत्तराखंड गठन के लिए 30 वर्ष पूर्व आंदोलन हुआ था।        

 दरअसल एक अक्टूबर 1994 को बस में सवार होकर हजारों आंदोलनकारी उत्तराखंड से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। उसी दिन शाम के समय थाना छपार क्षेत्र के रामपुर तिराहा पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर आंदोलनकारियों के वाहनों को रोक लिया था।

 यहां टकराव होने पर पुलिस की फायरिंग में सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। जबकि कई महिला आंदोलनकारियों से दुष्कर्म की शिकायत सामने आई थी। जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता परविंदर सिंह ने बताया कि उत्तराखंड संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में मिसलेनियस रिट पिटीशन फाइल की थी। जिसके बाद लखनऊ सीबीआइ, एसआइटी के एसपी एसआर अग्रवाल ने 25 जनवरी 1995 में एफआइआर कराई थी। सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले की विवेचना सीबीआइ देहरादून ने की थी।

जिसमें यह तथ्य उभरकर सामने आया था कि उत्तराखंड संघर्ष समिति के आह्वान पर रैली में भाग लेने के लिए एक आंदोलनकारी महिला उत्तराखंड के श्रीनगर से दिल्ली के लिए बस संख्या यूपी-411 में सवार होकर चली थी। रामपुर तिराहा पर दो अक्टूबर 1994 की रात एक बजे बस को रोक लिया गया था। महिला का आरोप था कि कुछ पुलिस कर्मियों ने बस के हेडलाइट और शीशे तोड़ दिए थे। भद्दी-भद्दी गालियां दी गई थी। जिसके बाद पीएसी के दो सिपाहियों ने बस में चढ़कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था और एक हजार रुपये लूट लिए थे।

 बताया कि सीबीआइ ने इस मामले में पीएसी के सिपाही मिलाप सिंह पुत्र नेम सिंह निवासी हरेची, पोस्ट निघोली कला, जनपद एटा और वीरेंद्र प्रताप पुत्र कन्हैया यादव निवासी गोरी, पोस्ट कोटिया, थाना पथरा बाजार जिला एटा को आरोपित बनाया था। सीबीआइ ने विवेचना कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। अप्रैल 2023 में हाईकोर्ट ने इस मुकदमे की सुनवाई को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह को अधिकृत किया था। बताया कि सीबीआइ लोक अभियोजक धारा सिंह मीणा ने इस मामले में 15 गवाह पेश किए। प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी प्रदीप कुमार और गृह सचिव डा. दीप्ति विलास की भी गवाही कराई गई। 

कोर्ट ने दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद शुक्रवार को सामूहिक दुष्कर्म, छेड़छाड़, लूट और लज्जा भंग करने के आरोप मेंं दोनों आरोपितोंं को दोष सिद्ध कर दिया था। सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश कोर्ट में सजा के प्रश्न पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों दोषियों को को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों दोषियों पर कोर्ट ने 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।

ADVERTISEMENT
None

None

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर