घरेलू गैस कनेक्शन से जुड़ी केवाईसी प्रक्रिया में अव्यवस्था और धीमी कार्यप्रणाली के कारण मुजफ्फरनगर में उपभोक्ता परेशान नजर आए। गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से लंबी कतारें लगी रहीं, जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे। कई लोगों को घंटों इंतजार के बाद “सर्वर डाउन” का जवाब मिला और उन्हें अगले दिन आने को कहा गया।
उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि केवाईसी के नाम पर अनावश्यक रूप से पाइप और रेगुलेटर खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। वहीं एजेंसी प्रबंधन का कहना है कि एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के आने से काम का दबाव बढ़ गया है। प्रशासन ने नियमों के अनुसार केवाईसी करने और शिकायत मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है
📍 Muzaffarnagar ✍️Nadeem Siddiqui
केवाईसी व्यवस्था और जमीनी हकीकत
घरेलू गैस उपभोक्ताओं की पहचान सत्यापन प्रक्रिया यानी केवाईसी को व्यवस्था सुधारने का जरिया माना गया था। मकसद यह था कि गैस सिलेंडर सही उपभोक्ताओं तक पहुंचे, कालाबाज़ारी रुके और सरकारी सब्सिडी का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।
लेकिन मुजफ्फरनगर में सामने आई तस्वीर कुछ और ही कहानी बयान करती है। गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और कामकाजी लोग घंटों खड़े रहते हैं, मगर जब उनका नंबर आता है तो अक्सर जवाब मिलता है — “सर्वर डाउन है, कल आइए।”
यह स्थिति सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं बल्कि व्यवस्था की तैयारी पर भी सवाल खड़े करती है।
कतारों में इंतजार और बढ़ती मायूसी
स्थानीय उपभोक्ताओं के मुताबिक सुबह सात बजे से ही लोग एजेंसियों के बाहर लाइन में लगना शुरू कर देते हैं। कई लोग जरूरी दस्तावेजों के साथ उम्मीद लेकर आते हैं कि आज उनका काम हो जाएगा।
लेकिन दोपहर तक भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती। कर्मचारी कम, भीड़ ज्यादा और काम की गति बेहद धीमी दिखाई देती है। नतीजा यह कि कई लोग निराश होकर वापस लौट जाते हैं।
एक बुजुर्ग उपभोक्ता ने बताया कि वह सुबह से लाइन में लगे थे, लेकिन तीन घंटे बाद भी नंबर नहीं आया। अंत में उन्हें बताया गया कि सिस्टम काम नहीं कर रहा और अगले दिन फिर आना होगा।
ऐसे अनुभव उपभोक्ताओं के भरोसे को कमजोर करते हैं।
महिलाओं और बुजुर्गों की मुश्किल
कतारों में खड़े लोगों में बड़ी संख्या महिलाओं और बुजुर्गों की होती है। कई महिलाएं छोटे बच्चों के साथ आती हैं, जबकि बुजुर्गों के लिए लंबे समय तक खड़े रहना आसान नहीं होता।
गर्मी या ठंड के मौसम में यह इंतजार और कठिन हो जाता है। कई बार एजेंसी परिसर में बैठने या पानी की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं होती।
यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब प्रशासन को पता है कि बड़ी संख्या में लोगों को केवाईसी के लिए बुलाया जाएगा, तो क्या पहले से बेहतर इंतजाम नहीं होने चाहिए थे।
केवाईसी के नाम पर अतिरिक्त खर्च का आरोप
कुछ उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि केवाईसी प्रक्रिया के दौरान उन्हें पाइप और रेगुलेटर खरीदने के लिए कहा गया। कई लोगों का कहना है कि उनके पुराने उपकरण ठीक हालत में थे, फिर भी उन्हें नए लेने के लिए कहा गया।
ऐसी स्थिति में उपभोक्ता दुविधा में पड़ जाते हैं। अगर वे मना करें तो डर रहता है कि कहीं उनका केवाईसी अधूरा न रह जाए या गैस सिलेंडर मिलने में परेशानी न हो।
यह आरोप अगर सही हैं तो यह सिर्फ प्रशासनिक ढिलाई नहीं बल्कि उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डालने वाली समस्या है।
गैस बुकिंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
समस्या सिर्फ केवाईसी तक सीमित नहीं है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस बुकिंग के लिए जो नंबर जारी किए गए हैं, उन पर कॉल करने पर “इनवैलिड नंबर” का संदेश आता है।
इसका मतलब यह हुआ कि बुकिंग की प्रक्रिया ही अस्पष्ट हो गई है। कई लोगों को मजबूर होकर सीधे गोदाम पहुंचना पड़ता है।
गोदाम पर भी सुबह से लंबी कतारें दिखाई देती हैं। सिलेंडर पाने की चिंता में लोग घंटों इंतजार करते हैं।
प्रशासनिक आदेश और जमीनी अंतर
जिला पूर्ति अधिकारी के आदेश के अनुसार गैस बुकिंग के तीन दिन के भीतर होम डिलीवरी होनी चाहिए। लेकिन कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें डिलीवरी नहीं मिलती और खुद गोदाम जाना पड़ता है।
यह स्थिति दिखाती है कि कागजों में मौजूद नियम और जमीनी स्तर पर उनकी पालना के बीच बड़ा अंतर है।
एजेंसी प्रबंधन का पक्ष
गैस एजेंसी कर्मचारियों का कहना है कि अचानक बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के आने से दबाव बढ़ गया है। उनके अनुसार सीमित स्टाफ और तकनीकी समस्याओं के कारण काम की गति धीमी हो जाती है।
वे यह भी कहते हैं कि जल्द ही सभी उपभोक्ताओं की केवाईसी पूरी कर दी जाएगी और गैस वितरण सामान्य हो जाएगा।
यह तर्क अपनी जगह सही हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि अगर भीड़ का अंदाजा पहले से था तो अतिरिक्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
प्रशासन की चेतावनी
जिला पूर्ति अधिकारी हरि ओम उपाध्याय ने स्पष्ट कहा है कि केवाईसी नियमानुसार की जानी चाहिए। अगर किसी एजेंसी द्वारा जबरन पाइप या रेगुलेटर देने की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस, राजस्व और खाद्य एवं रसद विभाग की संयुक्त टीमें औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग की जांच कर रही हैं।
दुरुपयोग पाए जाने पर एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2000 और संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
असली चुनौती: व्यवस्था या नीयत
यहां एक अहम सवाल उभरता है। क्या समस्या सिर्फ तकनीकी है या व्यवस्था की योजना में ही कमी है?
अगर एक ही समय में हजारों लोगों को केवाईसी के लिए बुलाया जाएगा तो कतारें लगना तय है। अगर सर्वर क्षमता सीमित होगी तो सिस्टम बार-बार डाउन होना भी तय है।
इसलिए समाधान सिर्फ शिकायतों के जवाब देने से नहीं बल्कि बेहतर योजना और संसाधन बढ़ाने से आएगा।
संभावित समाधान
स्थिति को सुधारने के लिए कुछ व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं।
पहला, केवाईसी के लिए अलग-अलग तारीख और समय स्लॉट तय किए जाएं। इससे भीड़ कम होगी।
दूसरा, ऑनलाइन केवाईसी की सुविधा को मजबूत किया जाए ताकि लोगों को बार-बार एजेंसी जाने की जरूरत न पड़े।
तीसरा, एजेंसी परिसर में बुनियादी सुविधाएं जैसे बैठने की जगह और पीने का पानी उपलब्ध कराया जाए।
और चौथा, शिकायतों के लिए एक स्पष्ट व्यवस्था हो ताकि उपभोक्ता अपनी बात आसानी से रख सकें।
भरोसे की परीक्षा
गैस सिलेंडर हर घर की बुनियादी जरूरत है। जब उससे जुड़ी प्रक्रिया कठिन और उलझी हुई हो जाती है, तो लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है।
मुजफ्फरनगर में सामने आई स्थिति यह संकेत देती है कि व्यवस्था को सिर्फ नियम बनाने से नहीं बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने से मजबूत किया जा सकता है।
जब तक प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और तेज नहीं होगी, तब तक कतारों में खड़े उपभोक्ताओं की परेशानी खत्म होना मुश्किल दिखाई देता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।