गदरपुर में 26 जुलाई को हुई फायरिंग का पुलिस ने खुलासा किया। चार आरोपी गिरफ्तार हुए। घटना पुरानी रंजिश से जुड़ी निकली। हथियार और वाहन बरामद हुए। दो आरोपी अभी फरार हैं।
📍 स्थान: रुद्रपुर, उत्तराखंड
📰 तारीख: 04 अगस्त 2026
✍️ By Asif Khan
ऊधमसिंह नगर के गदरपुर क्षेत्र में हुई गोलीबारी का मामला अब साफ होता दिख रहा है। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल क्राइम केस में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती तफ्तीश में यह वारदात पुरानी रंजिश का नतीजा बताई जा रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के मुताबिक, 26 जुलाई की शाम सरदार नगर अंडरपास के पास फायरिंग की घटना हुई थी। इस घटना ने इलाके में खौफ का माहौल पैदा कर दिया था। पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर इन्वेस्टिगेशन शुरू किया।
शिकायतकर्ता सहजपाल सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह रुद्रपुर से लौट रहे थे। उसी दौरान दो स्कॉर्पियो गाड़ियों में सवार आरोपियों ने उनका पीछा किया। कुछ दूरी तक पीछा करने के बाद अचानक फायरिंग शुरू कर दी गई।
इस हमले में गुरशरण उप्पल उर्फ गगन के पैर में गोली लगी। वहीं सहजपाल सिंह और उनके साथी सौरभ बाबा के साथ मारपीट भी की गई। यह हमला सुनियोजित बताया जा रहा है, जिसमें पहले पीछा किया गया और फिर निशाना साधा गया।
पुलिस ने इस केस को प्राथमिकता में रखते हुए लगातार दबिश दी। आखिरकार गुलरभोज स्थित हरिपुरा जलाशय के पास से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई:
राजवीर सिंह विर्क (23), आकाशदीप सिंह (24), प्रशांत सिंह उर्फ मनी उर्फ पिद्दी (29) और सौरभ कुमार (22)।
पुलिस ने इनके कब्जे से अवैध हथियार बरामद किए। इनमें .32 बोर की देशी पिस्टल, 315 बोर तमंचा, जिंदा कारतूस और एक डंडा शामिल है। साथ ही घटना में इस्तेमाल की गई दो स्कॉर्पियो गाड़ियों को भी सीज किया गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ आरोपी पहले से आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं। सौरभ कुमार, आकाशदीप सिंह और प्रशांत सिंह के खिलाफ पहले से मुकदमे दर्ज हैं।
इस केस में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और आयुध अधिनियम के तहत कार्रवाई बढ़ाई गई है। पुलिस का कहना है कि केस को मजबूत करने के लिए फॉरेंसिक और तकनीकी एविडेंस भी जुटाए जा रहे हैं।
पुलिस ने साफ किया है कि इस वारदात में दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी तलाश के लिए लगातार रेड की जा रही है। स्थानीय इंटेलिजेंस और सर्विलांस की मदद ली जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। केस की चार्जशीट तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
यह मामला सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं है। यह क्षेत्र में बढ़ते गैंग राइवलरी और निजी दुश्मनी के ट्रेंड को भी दिखाता है। ऐसी घटनाएं लॉ एंड ऑर्डर के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में निजी रंजिश अक्सर हिंसक रूप ले रही है। हथियारों की आसान उपलब्धता इस समस्या को और गंभीर बना रही है।
पुलिस का दावा है कि केस का खुलासा हो गया है और मुख्य आरोपी पकड़े जा चुके हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर लोगों में अभी भी असुरक्षा की भावना बनी हुई है।
कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में जल्दी गिरफ्तारी के बावजूद नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं होता। यह सवाल भी उठता है कि अवैध हथियार इतनी आसानी से कैसे उपलब्ध हो रहे हैं।
इस घटना का असर स्थानीय सियासत पर भी पड़ सकता है। कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा सकता है। वहीं प्रशासन के लिए यह टेस्ट केस बन गया है कि वह इलाके में भरोसा कैसे बहाल करता है।
सामाजिक स्तर पर भी यह घटना चिंता बढ़ाती है। खासकर युवाओं का क्राइम में शामिल होना एक गंभीर संकेत है।
पुलिस अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और चार्जशीट दाखिल करने पर फोकस कर रही है। अदालत में केस की सुनवाई के दौरान कई और तथ्य सामने आ सकते हैं।
इस केस का अंतिम नतीजा यह तय करेगा कि न्यायिक प्रक्रिया कितनी मजबूत है और अपराधियों को सजा कितनी जल्दी मिलती है।
गदरपुर गोलीकांड ने एक बार फिर दिखाया कि निजी रंजिश किस तरह हिंसक रूप ले सकती है। पुलिस ने शुरुआती सफलता हासिल की है, लेकिन असली चुनौती पूरे नेटवर्क को खत्म करने की है। आने वाले दिनों में इस केस की दिशा तय करेगी कि कानून व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।