गुरुवार, 09 July 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
SmarterASP.NET Hosting
None

केंद्रीय बजट 2026 से पहले इनकम टैक्स सिस्टम पर सरकार का फोकस

None 2026-01-05 09:06:19
केंद्रीय बजट 2026 से पहले इनकम टैक्स सिस्टम पर सरकार का फोकस

बजट 2026 की तैयारी में इनकम टैक्स को लेकर बड़े संकेत

केंद्रीय बजट 2026 से पहले पर्सनल इनकम टैक्स सिस्टम को लेकर सरकार की दिशा स्पष्ट होती दिख रही है। बजट 2025 में न्यू टैक्स सिस्टम में किए गए बदलावों का असर अब आंकड़ों में नजर आ रहा है।

📍New Delhi ✍️ Asif Khan 

केंद्रीय बजट 2026 से पहले पर्सनल इनकम टैक्स सिस्टम को लेकर सरकार की सोच धीरे-धीरे साफ होती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को टैक्स सिस्टम से जोड़ने की कोशिश की गई है। बजट 2025 में किए गए बदलावों को इसी दिशा का अहम कदम माना जा रहा है।

वित्त मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि टैक्स सिस्टम में सरलता और कम कंप्लायंस पर जोर दिया गया है। इसका मकसद यह है कि टैक्सपेयर्स को कैलकुलेशन में आसानी हो और रिटर्न फाइलिंग ज्यादा सरल बने।

बजट 2025 में क्या बदला

बजट 2025 में न्यू टैक्स सिस्टम के तहत बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट को बढ़ाया गया। पहले जहां यह सीमा 3 लाख रुपये थी, उसे बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दिया गया। इसके साथ ही सैलरीड कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को भी बढ़ाया गया।

https://youtube.com/shorts/tHxylv-CwkU?si=A1Vi8cgU9qRiXr3e

इन बदलावों के बाद सैलरी पाने वाले लोगों के लिए 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आय टैक्स फ्री हो गई। यह फैसला सीधे तौर पर मिडिल इनकम ग्रुप को राहत देने वाला माना गया।

टैक्सपेयर्स का बदलता रुझान

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के आंकड़े दिखाते हैं कि न्यू टैक्स सिस्टम की तरफ टैक्सपेयर्स का झुकाव लगातार बढ़ रहा है। असेसमेंट ईयर 2024-25 में फाइल किए गए कुल 7.28 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न में से करीब 72 प्रतिशत न्यू टैक्स सिस्टम के तहत दाखिल किए गए।

ओल्ड टैक्स सिस्टम को चुनने वालों की संख्या लगभग 2.01 करोड़ रही। यह आंकड़ा साफ करता है कि बड़ी संख्या में लोग कम डिडक्शन और आसान टैक्स स्ट्रक्चर को प्राथमिकता दे रहे हैं।

सैलरीड और पेंशनर्स को राहत

न्यू टैक्स सिस्टम में सैलरीड कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों को 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया जा रहा है। इसके अलावा 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगने से टैक्स फ्री इनकम की सीमा बढ़कर 12.75 लाख रुपये हो गई है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नियमित आय पाने वाले लोगों के हाथ में ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम रहे। इससे घरेलू खर्च और सेविंग दोनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

टैक्स स्लैब में बदलाव

न्यू टैक्स सिस्टम के तहत टैक्स स्लैब को भी रेशनलाइज किया गया है। अब 30 प्रतिशत टैक्स सिर्फ 24 लाख रुपये से ज्यादा की सालाना आय पर लागू होता है। पहले यह सीमा काफी कम थी, जिससे मिडिल इनकम ग्रुप पर टैक्स का बोझ ज्यादा पड़ता था।

नई व्यवस्था में स्लैब स्ट्रक्चर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि 7.5 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक की आय वाले टैक्सपेयर्स को सबसे ज्यादा फायदा मिल सके।

टैक्स बचत के आंकड़े

टैक्स बचत के आंकड़े न्यू और ओल्ड टैक्स सिस्टम के फर्क को साफ दिखाते हैं। 7.5 लाख रुपये की सालाना आय पर ओल्ड टैक्स सिस्टम में करीब 65,000 रुपये टैक्स देना पड़ता था, जबकि न्यू टैक्स सिस्टम में टैक्स शून्य हो गया है।

15 लाख रुपये की आय पर न्यू टैक्स सिस्टम में ओल्ड सिस्टम की तुलना में करीब 36,400 रुपये की बचत होती है। यह बचत प्रतिशत के हिसाब से लगभग 25 प्रतिशत तक पहुंचती है।

हाई इनकम ग्रुप पर असर

20 से 25 लाख रुपये की सालाना आय वाले टैक्सपेयर्स को भी न्यू टैक्स सिस्टम में 30 प्रतिशत तक की टैक्स राहत मिल रही है। हालांकि 30 लाख रुपये से ज्यादा की आय पर टैक्स बचत का प्रतिशत धीरे-धीरे कम होता जाता है।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इसका उद्देश्य यह है कि मिडिल इनकम ग्रुप को ज्यादा राहत दी जाए, जबकि हाई इनकम ग्रुप के लिए टैक्स स्ट्रक्चर संतुलित रखा जाए।

बजट 2026 से उम्मीदें

अब जब बजट 2026 नजदीक है, तो टैक्सपेयर्स यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आने वाले बजट में सरकार किस दिशा में कदम बढ़ा सकती है। मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए माना जा रहा है कि न्यू टैक्स सिस्टम को और आकर्षक बनाया जा सकता है।

सरकार का फोकस कम डिडक्शन, आसान सिस्टम और डिजिटल प्रोसेस को मजबूत करने पर बताया जा रहा है। इसका मकसद टैक्स कंप्लायंस बढ़ाना और सिस्टम को ज्यादा ट्रांसपेरेंट बनाना है।

ओल्ड बनाम न्यू सिस्टम

ओल्ड टैक्स सिस्टम में कई तरह के डिडक्शन और एग्जेम्पशन उपलब्ध हैं, जबकि न्यू टैक्स सिस्टम में डिडक्शन कम हैं लेकिन टैक्स स्लैब ज्यादा सरल हैं। यही वजह है कि टैक्सपेयर्स को अपनी इनकम प्रोफाइल के हिसाब से चुनाव करना पड़ता है।

हाल के वर्षों में सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में टैक्स सिस्टम को ज्यादा से ज्यादा न्यू स्ट्रक्चर की तरफ ले जाया जा सकता है।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का उद्देश्य एक ऐसा टैक्स सिस्टम तैयार करना है जो समझने में आसान हो और जिसमें विवाद की गुंजाइश कम हो। इसके लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है और ऑटोमेटेड प्रोसेस पर जोर दिया जा रहा है।

बजट 2026 में भी इसी सोच के तहत फैसले लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

निष्कर्ष के बजाय तथ्य

मौजूदा आंकड़े और हालिया बदलाव यह दिखाते हैं कि इनकम टैक्स सिस्टम में सरकार का फोकस स्पष्ट है। न्यू टैक्स सिस्टम की ओर बढ़ता झुकाव बजट 2026 की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

ADVERTISEMENT
None

None

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर