Business & Economy
सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, MCX गोल्ड ₹3,200 तक टूटा, जानिए आज क्यों सस्ता हुआ सोना
Mohammad Naved
•
2026-09-28 16:32:17
MCX गोल्ड में ₹3,200 की गिरावट, सोना गिरने के पीछे क्या हैं बड़े कारण?सोने पर बढ़ा दबाव, 2% से ज्यादा टूटा MCX गोल्ड, आगे क्या होगा?कच्चे तेल और Fed के फैसलों का असर, सोने की कीमत में तेज गिरावट
📍
नई दिल्ली
🗓️
28 सितंबर 2026
✍️ MOHD NAVED
सोने की कीमतों में तेज गिरावट
सोने की कीमतों में सोमवार, 28 सितंबर 2026 को तेज गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार में अक्टूबर डिलीवरी वाला MCX गोल्ड कारोबार के दौरान लगभग ₹3,214 की गिरावट के साथ ₹1,47,667 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। यह गिरावट 2% से अधिक रही। बाद के कारोबार में कीमतों में कुछ उतार-चढ़ाव भी देखा गया।
इस गिरावट ने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर वैश्विक ब्याज दरों, कच्चे तेल और डॉलर की चाल पर केंद्रित कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्पॉट गोल्ड में करीब 1.5% की गिरावट दर्ज की गई और कीमत लगभग $4,223.95 प्रति ट्रॉय औंस तक आ गई।
गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?
आज की गिरावट को किसी एक वजह से जोड़ना सही नहीं होगा। कई वैश्विक आर्थिक संकेत एक साथ सोने के खिलाफ गए हैं।
सबसे अहम कारक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। तेल महंगा होने से वैश्विक महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है। इससे बाजार में यह धारणा बनी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को ऊंचा रख सकता है या आगे और बढ़ा सकता है।
ब्याज दरों की आशंका ने सोने को दबाया
सोना खुद कोई नियमित ब्याज या यील्ड नहीं देता। ऐसे माहौल में जब सरकारी बॉन्ड से मिलने वाली यील्ड बढ़ती है, निवेशकों के लिए बिना यील्ड वाली संपत्ति रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने इसी महीने ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद बाजार में अक्टूबर की बैठक में एक और बढ़ोतरी की संभावना पर चर्चा तेज हुई है। CME FedWatch के अनुसार 28 सितंबर के आसपास अक्टूबर में बढ़ोतरी की संभावना लगभग 66% के स्तर पर थी।
यही वजह है कि निवेशकों का एक हिस्सा सोने में नई खरीदारी करने के बजाय ब्याज देने वाली संपत्तियों की तरफ देख रहा है।
बॉन्ड यील्ड और डॉलर का असर
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ने भी बुलियन मार्केट पर दबाव डाला है। ऊंची यील्ड का मतलब है कि निवेशकों को सुरक्षित सरकारी बॉन्ड से अपेक्षाकृत बेहतर रिटर्न मिल सकता है।
साथ ही अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी सोने के लिए चुनौती बनती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं में खरीदने वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा पड़ता है। इससे मांग पर दबाव आ सकता है।
कच्चे तेल की कीमत क्यों महत्वपूर्ण है?
सोने की मौजूदा चाल को समझने के लिए कच्चे तेल के बाजार को समझना जरूरी है।
मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच तेल की कीमतों में तेजी आई। इससे बाजार में महंगाई बढ़ने की चिंता फिर मजबूत हुई। ऊंची ऊर्जा कीमतें परिवहन, उत्पादन और दूसरी लागतों को प्रभावित करती हैं।
बाजार की चिंता यह है कि यदि ऊर्जा कीमतों के कारण महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय मौद्रिक नीति को सख्त रख सकते हैं। यही धारणा सोने पर दबाव डाल रही है।
वैश्विक बाजार में भी सोना कमजोर
सोने में गिरावट सिर्फ भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रही। अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड में भी सोमवार को गिरावट दर्ज हुई।
स्पॉट गोल्ड करीब 1.5% नीचे आकर $4,223.95 प्रति ट्रॉय औंस के आसपास कारोबार करता दिखा। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी करीब 1.5% नीचे रहे। इससे साफ है कि MCX की गिरावट के पीछे वैश्विक बुलियन मार्केट की कमजोरी भी एक प्रमुख कारक है।
क्या यह सिर्फ मुनाफावसूली है?
मुनाफावसूली भी बाजार की तस्वीर का हिस्सा है, लेकिन उपलब्ध संकेतों के आधार पर आज की पूरी गिरावट को केवल प्रॉफिट बुकिंग से समझना पर्याप्त नहीं होगा।
सोने में पिछले महीनों में मजबूत तेजी रही थी। इसके बाद ऊंचे स्तरों पर कुछ निवेशकों ने मुनाफा निकाला। लेकिन इसके साथ ही अमेरिकी यील्ड, डॉलर, तेल और Fed की मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदों ने बिकवाली का दबाव बढ़ाया।
सोने और चांदी दोनों पर दबाव
आज सिर्फ सोना ही दबाव में नहीं था। चांदी में भी तेज गिरावट देखने को मिली।
MCX पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी करीब ₹6,661 गिरकर ₹2,28,035 प्रति किलोग्राम तक पहुंची। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर भी कमजोर रहा। इससे संकेत मिलता है कि दबाव व्यापक रूप से प्रीशियस मेटल्स पर बना हुआ है।
इस सप्ताह बाजार किन आंकड़ों पर नजर रखेगा?
अब निवेशकों की निगाह अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। रोजगार, महंगाई और व्यक्तिगत उपभोग से जुड़े आंकड़े आगे की ब्याज दर नीति के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
अमेरिकी PCE महंगाई आंकड़े और Nonfarm Payrolls जैसे संकेतक बाजार को यह समझने में मदद करेंगे कि महंगाई और रोजगार की स्थिति किस दिशा में जा रही है। इन आंकड़ों से Fed की अगली नीति को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल सकती हैं।
MCX गोल्ड के लिए अहम स्तर
28 सितंबर के शुरुआती कारोबार में अक्टूबर MCX गोल्ड लगभग ₹1,47,667 प्रति 10 ग्राम तक गिरा। तकनीकी बाजार विश्लेषण में ₹1,50,150 से ₹1,49,600 के आसपास सपोर्ट क्षेत्र पर नजर रखी जा रही थी।
हालांकि सपोर्ट और रेजिस्टेंस ट्रेडिंग संकेत हैं, भविष्य की कीमत की गारंटी नहीं। बाजार में कच्चे तेल, डॉलर और अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदों में बदलाव से ये स्तर तेजी से बदल सकते हैं।
घरेलू बाजार में इसका क्या असर?
MCX की कीमत में गिरावट का सीधा मतलब यह नहीं है कि देश के हर शहर में ज्वेलरी की कीमत उसी अनुपात में गिर जाएगी।
रिटेल गोल्ड रेट में अंतरराष्ट्रीय कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात से जुड़ी लागत, टैक्स, स्थानीय प्रीमियम और मेकिंग चार्ज जैसे कई कारक शामिल होते हैं।
इसलिए यदि MCX गोल्ड में 2% की गिरावट आती है तो खुदरा बाजार में आभूषण की कीमत में ठीक 2% की गिरावट जरूरी नहीं है।
क्या सोना आगे और गिर सकता है?
आगे की दिशा फिलहाल कई बाहरी कारकों पर निर्भर है। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है और Fed की सख्त नीति की उम्मीद मजबूत होती है तो सोने पर दबाव बना रह सकता है।
इसके उलट, यदि अमेरिकी आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं, ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद कम होती है या वैश्विक जोखिम फिर बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को समर्थन मिल सकता है।
इसलिए मौजूदा गिरावट को देखकर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि सोने की लंबी अवधि की तेजी खत्म हो गई है। फिलहाल बाजार में दिशा तय करने वाले प्रमुख संकेतक ब्याज दर, डॉलर, तेल और वैश्विक जोखिम हैं।
निवेशकों के लिए अहम बात
सोने की कीमत में तेज गिरावट के बाद निवेशकों को केवल एक दिन की चाल देखकर फैसला लेने के बजाय अंतरराष्ट्रीय कीमत, MCX ट्रेंड, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और Fed की नीति को साथ में देखना चाहिए।
ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए भी MCX की गिरावट और स्थानीय रिटेल रेट के बीच अंतर समझना जरूरी है। निवेश संबंधी निर्णय अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।
28 सितंबर 2026 की सोने में तेज गिरावट के पीछे कई वैश्विक आर्थिक कारक एक साथ काम कर रहे हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई की चिंता बढ़ी है। इससे अमेरिकी ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की उम्मीद मजबूत हुई है।
ऊंची बॉन्ड यील्ड, मजबूत डॉलर और ऊंची दरों की संभावना ने गैर-ब्याज देने वाली संपत्ति के रूप में सोने पर दबाव बढ़ाया है। इसके साथ ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली ने भी गिरावट को तेज किया।
फिलहाल सोने का अगला बड़ा ट्रिगर अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और Fed की ब्याज दर नीति से जुड़े संकेत होंगे। इसलिए आने वाले कारोबारी सत्रों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना बाजार के मौजूदा संकेतों से दिखती है।
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।