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हज हाउस की तामीर एक ‘सेक्यूलर एक्टिविटी है, मज़हबी नहीं’: हाई कोर्ट

None • 2023-09-08 11:12:58
हज हाउस की तामीर एक ‘सेक्यूलर एक्टिविटी है, मज़हबी नहीं’: हाई कोर्ट

हिंदू अघाड़ी से जुड़े हिंदुत्व नेता ने पुणे में वर्तमान में निर्माणाधीन एक हज हाउस को ध्वस्त करने के लिए अदालत की अनुमति मांगी गई थी

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay high court) ने कहा कि हज हाउस (Haj House) का निर्माण एक “सेकुलर गतिविधि है, मज़हबी नहीं”।

यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय (DK Upadhya) और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर (Justice Arif Doctor) की खंडपीठ ने समस्त हिंदू अघाड़ी से जुड़े हिंदुत्व नेता मिलिंद एकबोटे (Milind Ekbote) की याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें पुणे में वर्तमान में निर्माणाधीन एक हज हाउस को ध्वस्त करने के लिए अदालत की अनुमति मांगी गई थी।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “आपको धार्मिक गतिविधि और धर्मनिरपेक्ष गतिविधि में राज्य की कृपा के बीच अंतर करना चाहिए। हज हाउस (Haj House) का निर्माण एक धर्मनिरपेक्ष गतिविधि है। यह कोई धार्मिक गतिविधि नहीं है। अपने आप को भ्रमित न करें,। ”

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पीठ ने एकबोटे की याचिका को यह कहते हुए जनहित याचिका (PIL) याचिका में बदल दिया कि मामले में उनका कोई व्यक्तिगत हित नहीं है।

एकबोटे की ओर से पेश वकील कपिल राठौड़ ने अदालत को बताया कि “भूमि उपयोग में बदलाव” हुआ है क्योंकि यह स्थल पुणे के कोंढवा क्षेत्र और उसके आसपास के लोगों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए आरक्षित था। उन्होंने तर्क दिया कि हज हाउस के निर्माण के लिए भूमि का उपयोग बदल दिया गया है ।

पुणे नगर निगम के वकील अभिजीत कुलकर्णी ने कहा कि भूमि उपयोग नहीं बदला गया है। उन्होंने कहा कि इस स्थल पर विभिन्न समुदायों को अपनी सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए जगह मिलती है। कुलकर्णी ने एकबोटे की दलील में कहा कि इमारत की दो मंजिलों का निर्माण पहले ही किया जा चुका है। पीठ ने राज्य को जनहित याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

#ShahTimes

हिंदू अघाड़ी से जुड़े हिंदुत्व नेता ने पुणे में वर्तमान में निर्माणाधीन एक हज हाउस को ध्वस्त करने के लिए अदालत की अनुमति मांगी गई थी

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay high court) ने कहा कि हज हाउस (Haj House) का निर्माण एक “सेकुलर गतिविधि है, मज़हबी नहीं”।

यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय (DK Upadhya) और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर (Justice Arif Doctor) की खंडपीठ ने समस्त हिंदू अघाड़ी से जुड़े हिंदुत्व नेता मिलिंद एकबोटे (Milind Ekbote) की याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें पुणे में वर्तमान में निर्माणाधीन एक हज हाउस को ध्वस्त करने के लिए अदालत की अनुमति मांगी गई थी।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “आपको धार्मिक गतिविधि और धर्मनिरपेक्ष गतिविधि में राज्य की कृपा के बीच अंतर करना चाहिए। हज हाउस (Haj House) का निर्माण एक धर्मनिरपेक्ष गतिविधि है। यह कोई धार्मिक गतिविधि नहीं है। अपने आप को भ्रमित न करें,। ”

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पीठ ने एकबोटे की याचिका को यह कहते हुए जनहित याचिका (PIL) याचिका में बदल दिया कि मामले में उनका कोई व्यक्तिगत हित नहीं है।

एकबोटे की ओर से पेश वकील कपिल राठौड़ ने अदालत को बताया कि “भूमि उपयोग में बदलाव” हुआ है क्योंकि यह स्थल पुणे के कोंढवा क्षेत्र और उसके आसपास के लोगों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए आरक्षित था। उन्होंने तर्क दिया कि हज हाउस के निर्माण के लिए भूमि का उपयोग बदल दिया गया है ।

पुणे नगर निगम के वकील अभिजीत कुलकर्णी ने कहा कि भूमि उपयोग नहीं बदला गया है। उन्होंने कहा कि इस स्थल पर विभिन्न समुदायों को अपनी सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए जगह मिलती है। कुलकर्णी ने एकबोटे की दलील में कहा कि इमारत की दो मंजिलों का निर्माण पहले ही किया जा चुका है। पीठ ने राज्य को जनहित याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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