📍 Lucknow
📰 24 May 2026
✍️ Asif Khan
उत्तर प्रदेश इस वक्त सिर्फ दिन की भीषण गर्मी से नहीं, बल्कि रातों में बढ़ते तापमान से भी जूझ रहा है। नौतपा के दौरान गर्म हवाएं, उमस भरी रातें और लगातार बढ़ता तापमान अब पब्लिक हेल्थ, बिजली व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। सरकार अलर्ट मोड में है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह सिर्फ मौसमी संकट नहीं, बल्कि बदलते क्लाइमेट पैटर्न का गंभीर संकेत भी है।
उत्तर प्रदेश में इस बार की गर्मी सिर्फ “एक और गर्म मौसम” नहीं लग रही। सड़कों पर तपिश है, अस्पतालों में बेचैनी है, बिजली खपत रिकॉर्ड तोड़ रही है, और सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब रातें भी ठंडी नहीं हो रहीं।
हीटवेव का असर भारत में नया नहीं है, लेकिन इस बार जिस चीज़ ने एक्सपर्ट्स को सबसे ज्यादा परेशान किया है, वह है “राइजिंग नाइट टेम्परेचर”। यानी सूरज ढलने के बाद भी गर्मी कम नहीं हो रही।
यही वजह है कि मौसम विभाग के अलर्ट अब सिर्फ दोपहर की धूप तक सीमित नहीं हैं। खतरा अब पूरी रात बना रह सकता है।
गर्मी इंसानी शरीर को सिर्फ बाहर से नहीं झुलसाती। लगातार ऊंचा तापमान शरीर की रिकवरी सिस्टम को भी कमजोर करता है।
दिनभर की गर्मी के बाद आमतौर पर रात शरीर को राहत देती है। शरीर का तापमान नियंत्रित होता है, नींद बेहतर आती है, और हार्ट रेट सामान्य होता है। लेकिन जब रातें भी गर्म हों, तो शरीर लगातार स्ट्रेस में रहता है।
यूपी के कई शहरों में यही स्थिति सामने आ रही है। बुंदेलखंड क्षेत्र में तापमान तेजी से बढ़ा है। कुछ इलाकों में रात का तापमान भी सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया।
इसका असर सिर्फ असहजता तक सीमित नहीं रहता। डॉक्टरों के मुताबिक लगातार गर्म रातें डिहाइड्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर, माइग्रेन, हार्ट स्ट्रेस और नींद की गंभीर समस्या पैदा कर सकती हैं।
गरीब और लो-इनकम परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि उनके पास एयर कंडीशनिंग या पर्याप्त वेंटिलेशन की सुविधा नहीं होती।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अधिकारियों को पेयजल, बिजली और हेल्थ सेवाओं को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार की तरफ से सार्वजनिक स्थानों पर पानी की व्यवस्था और अस्पतालों को तैयार रखने पर जोर दिया गया है।
यह प्रशासनिक प्रतिक्रिया जरूरी है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या भारत के बड़े राज्यों के पास लंबे समय की “हीट मैनेजमेंट पॉलिसी” मौजूद है?
हर साल गर्मी आती है। हर साल अलर्ट जारी होता है। लेकिन शहरों की संरचना, हरियाली, पानी प्रबंधन और अर्बन प्लानिंग में बदलाव बहुत धीमा दिखता है।
भारत में नौतपा को पारंपरिक तौर पर साल का सबसे गर्म दौर माना जाता है। लेकिन इस बार की चर्चा सिर्फ सांस्कृतिक कैलेंडर की नहीं, बल्कि क्लाइमेट साइंस की भी है।
कई क्लाइमेट रिसर्च रिपोर्ट्स लगातार यह संकेत दे रही हैं कि दक्षिण एशिया में हीटवेव की अवधि लंबी हो रही है। तापमान रिकॉर्ड तेजी से टूट रहे हैं। और सबसे खतरनाक ट्रेंड “वार्म नाइट्स” का है।
अगर रात का तापमान नीचे नहीं जाता, तो इंसानी शरीर को आराम नहीं मिलता। यही वजह है कि हीटवेव से मौतों का खतरा बढ़ सकता है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों में।
यह सवाल सिर्फ मौसम विभाग का नहीं, शहरों की प्लानिंग का भी है।
कंक्रीट, डामर, कम हरियाली और अनियोजित निर्माण शहरों को “हीट ट्रैप” में बदल देते हैं। इसे अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट कहा जाता है।
दिनभर सड़कें और इमारतें गर्मी सोखती हैं और रात में धीरे-धीरे उसे छोड़ती हैं। नतीजा यह होता है कि रात का तापमान सामान्य नहीं हो पाता।
Lucknow, Kanpur और Varanasi जैसे तेजी से फैलते शहरों में यह समस्या आगे और गंभीर हो सकती है।
सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन पूरी जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन पर डाल देना भी आसान नैरेटिव हो सकता है।
पानी की बर्बादी, पेड़ों की कटाई, बिना प्लानिंग के अर्बन एक्सपेंशन और ऊर्जा खपत का बढ़ता पैटर्न भी संकट को गहरा करते हैं।
लोगों की आदतें भी बदलनी होंगी। दिन में बाहर निकलने का समय, पानी पीने की मात्रा, बुजुर्गों का ध्यान, बच्चों की आउटडोर एक्टिविटी और घरों में वेंटिलेशन जैसे छोटे कदम भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
सोशल मीडिया पर लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं कि रात में भी पंखे गर्म हवा दे रहे हैं। बिजली कटौती को लेकर नाराजगी भी सामने आई है।
कुछ यूजर्स इसे “नई सामान्य गर्मी” कह रहे हैं। वहीं कई लोग क्लाइमेट चेंज को लेकर सरकारों की धीमी प्रतिक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
हालांकि हर मौसमीय बदलाव को सीधे क्लाइमेट चेंज से जोड़ देना भी जल्दबाजी हो सकती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि किसी एक घटना से निष्कर्ष निकालने के बजाय लंबे पैटर्न को देखना जरूरी है।
हीटवेव अमीर और गरीब दोनों को प्रभावित करती है, लेकिन असर बराबर नहीं होता।
रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, खेतों में काम करने वाले लोग, सड़क विक्रेता और बिना कूलिंग सिस्टम वाले घरों में रहने वाले परिवार सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
गांवों में पानी की कमी और शहरों में बिजली की मांग, दोनों मिलकर स्थिति को और मुश्किल बना सकते हैं।
मौसम विभाग ने कई इलाकों में गर्मी जारी रहने की आशंका जताई है। कुछ क्षेत्रों में हल्की राहत मिल सकती है, लेकिन व्यापक स्तर पर तापमान तुरंत गिरने के संकेत नहीं हैं।
यह स्थिति भारत के लिए एक बड़ा टेस्ट बन सकती है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि तापमान कितना बढ़ा। असली सवाल यह है कि क्या हमारे शहर, अस्पताल, बिजली नेटवर्क और सामाजिक ढांचे इस नई गर्मी के लिए तैयार हैं?
उत्तर प्रदेश की गर्मी इस समय एक बड़ी चेतावनी की तरह दिख रही है।
जब रातें भी गर्म हो जाएं, तो इसका मतलब सिर्फ असुविधा नहीं होता। यह बताता है कि पर्यावरण, शहर और पब्लिक हेल्थ सिस्टम के बीच संतुलन बिगड़ रहा है।
सरकार को तत्काल राहत से आगे जाकर लॉन्ग-टर्म क्लाइमेट एडाप्टेशन पॉलिसी पर काम करना होगा। और समाज को भी यह समझना होगा कि हीटवेव अब “सीजनल परेशानी” नहीं, बल्कि आने वाले दशक की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन सकती है।
UP Heatwave Turns Dangerous at Night
India’s Sleepless Summer Crisis
Heat Alert Across Uttar Pradesh
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।