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हेमंत सोरेन को आदिवासियों की नहीं, बल्कि लूट की ज्यादा चिंता थी : रविशंकर

None 2024-02-02 11:35:49
हेमंत सोरेन को आदिवासियों की नहीं, बल्कि लूट की ज्यादा चिंता थी : रविशंकर

नई दिल्ली ।‌ भाजपा वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद (RaviShankar Prasad) ने झारखंड (Jharkhand) के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें आदिवासियों की नहीं, बल्कि लूट की ज्यादा चिंता थी, इसीलिए सोरेन सत्ता के नशे में चूर होकर जनता के खून-पसीने की कमाई को लग्जरी कारों और आलीसान बंगला बनाने में उड़ा दिया। प्रसाद ने यहां स्थित पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए सोरेन के समर्थकों द्वारा विपक्षी नेताओं पर द्वेषपूर्ण कार्रवाई करने को लेकर केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोपों का जवाब दिया।

उन्होंने सोरेन के कार्यकाल में झारखंड (Jharkhand) में हुए घोटालों के बारे में बताते हुए कहा कि सोरेन ने आम जनता की खून पसीने की कमाई लूटकर लग्जरी गाड़ियां खरीदी और आलीशान बंगले बनाए।

उन्होंने कहा, “झारखंड (Jharkhand) के पूर्व मुख्यमंत्री मौजूदा समय में प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में हैं, लेकिन उनके समर्थक यह झूठा आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार के द्वारा विपक्षी पार्टियों को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है और विशेष रूप से आदिवासी नेताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार देश के आदिवासी समाज की बहुत चिंता करती है और उनके उत्थान के लिए संकल्पित है। यह मोदी सरकार ही है, जिसने पहली बार आदिवासी समुदाय की नेता द्रौपदी मुर्मु (Draupadi Murmu) को राष्ट्रपति बनाया और देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठाया।

यह मोदी की दूरदर्शिता को दर्शाता है। इससे पहले दलित समाज से आने वाले देश के वरिष्ठ नेता रामनाथ कोविंद जी को भारत का राष्ट्रपति बनाया था। मोदी सरकार ने बिरसा मुंडा संग्रहालय को स्थापित कर, आदिवासी नेताओं के योगदान को नई पीढ़ी के सामने लाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने स्वयं बिरसा मुंडा (Birsa Munda) के गांव जाकर, राष्ट्रीय संग्रहालय का उद्घाटन भी किया और आदिवासी समाज के लोगों और नौजवानों के लिए विशेष योजनाएं भी प्रारंभ कीं।

केंद्र की मोदी सरकार (Modi government) ने आदवासी समाज की चिंता करने से लिए अलग से आयोग का गठन किया, अनुसूचित जाति एवं जनजाति (SC-ST) आयोग को प्राथमिकता दी और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया।”

प्रसाद ने सोरेन सरकार (Soren Sarkar) में हुए घोटालों के बारे में कहा कि पहले तो सोरेन ने लूट और भ्रष्टाचार किया और जब कारवाई हो रही, है तो कह रहे हैं कि एक आदिवासी को तंग किया जा रहा है। अपने समाज की चिंता करते हुए संघर्ष करना अच्छा है, परंतु झारखंड में ‘चिंता कम और लूट अधिक है।’उन्होंने बताया कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सोरेन के खिलाफ मुख्यतः तीन मामले हैं, जिनमें पहला - जमीन की लूट, दूसरा - अवैध खनन और तीसरा - कोयला खदान में घोटाला।

अभी सिर्फ एक मामले में सोरेन के खिलाफ कार्रवाई हुई है और अन्य दो मामलों में इनके खिलाफ कार्रवाई होना बाकी है। ईडी की जांच में 36 लाख रुपये सोरेन के घर से बरामद हुए हैं। जांच में पता चला है कि आम जनता के खून पसीने की कमाई के साथ घोटाले कर सोरेन ने दिल्ली की पॉश कॉलोनी शांति निकेतन में आलीशान घर बनाया है और इस घर से दो लग्जरी कारें (BMW) भी बरामद हुई हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) प्रमुख सोचते हैं कि बेईमानी के पैसे से कार चलाएंगे और इनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

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भाजपा नेता ने सोरेन पर हमला करते हुए कहा कि सोरेन ने सेना की जमीन पर भी घोटाला किया है। रांची (Ranchi) के मुराबादी मौजा में 455 डिसबिल जमीन आजादी से पहले से ही सेना के नाम पर थी। जमीन के नकली दस्तावेज बना और फर्जीवाड़ा कर इस जमीन का मालिकाना हक प्रदीप बागची ने हासिल कर लिया और इस जमीन को जगतबंधु टी-एस्टेट को मात्र सात करोड़ रुपए में बेच दिया, जबकि इस जमीन की बाजार कीमत 20.67 करोड़ रुपये थी। इसके बाद ईडी की जांच में सामने आया कि रांची में नकली दस्तावेज बनाकर जमीनों पर अवैध कब्जा करने वाले लोगों का एक संगठन संचालित होता है।

कई प्रशासनिक अधिकारियों की इस संगठन के साथ सांठ-गांठ थी, जिसमें रांची (Ranchi) के पूर्व जिलाधिकारी छवि रंजन, अमित अग्रवाल (Amit Agarwal) और विष्णु अग्रवाल (Vishnu Agarwal) भी शामिल थे। इसके अलावा खनन सचिव पूजा सिंघल के घर से 19 करोड़ रुपए बरामद हुए थे। इस संगठन को इन सभी अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था। इन सभी मामलों की जांच चल रही है। आदिवासी समाज से आने वाले हेमंत सोरेन अपनी नाक के नीचे इस तरह के जमीन घोटालों को प्रोत्साहन देते हैं और सेना की जमीन तक पर ये घोटाला करते हैं।

प्रसाद ने कहा कि सोरेन के कार्यकाल में हुए खनन घोटाले की कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने खुलासा किया कि साहिबगंज इलाके में 4,952 अवैध खनन के मामले पिछले तीन वर्षों में दर्ज हुए हैं। इस घोटाले में 23.26 करोड़ घन फुट से ज्यादा भूमि पर अवैध खनन हुआ, जिसकी राशि 1,250 करोड़ रुपये है। इसके अलावा रांची में सोरेन ने 28 डिसबिल सरकारी खनन जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम पर करवा ली। इस पूरे मामले के मुख्य सरगना सोरेन के निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि पंकज मिश्रा हैं।

प्रसाद ने रांची उच्च न्यायालय (High Court of Ranchi) के निर्णय का उल्लेख करते हुए बताया कि रांची उच्च न्यायालय ने अप्रैल 2022 में ही कह दिया था कि खनन विभाग में कुछ गड़बड़ियां देखने को मिली है। सोरेन आदिवासी की बात करते हैं, मगर उनकी ही जमीन कब्जा करते हैं।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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