पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी एक्शन मोड में हैं। सेना को खुली छूट, हाई अलर्ट पर बॉर्डर, और आज 4 अहम कैबिनेट बैठकों में बड़ा फैसला संभव। जानिए पूरी विश्लेषणात्मक रिपोर्ट।
New Delhi (Shah Times)।22 अप्रैल को पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने न केवल पूरे देश को झकझोर कर रख दिया, बल्कि भारत की आतंक के प्रति नीति को भी निर्णायक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। 26 निर्दोष पर्यटकों की शहादत के बाद अब देश की निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हो रही आज की चार उच्चस्तरीय बैठकों पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ यह नहीं कि आगे क्या होगा, बल्कि यह भी कि अब आतंक के जवाब की टाइमिंग, टारगेट और तरीका कौन तय करेगा?
मंगलवार की देर शाम प्रधानमंत्री मोदी ने एक हाईलेवल मीटिंग में स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने का समय आ गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, NSA अजीत डोभाल और तीनों सेना प्रमुखों की मौजूदगी में यह संदेश दिया गया कि अब "हमले का तरीका, स्थान और समय" सेना खुद तय करेगी। यह सिर्फ एक नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक सोच में एक बड़ा परिवर्तन है।
बुधवार (30 अप्रैल) को प्रधानमंत्री मोदी कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS), कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति (CCPA), आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) और अंततः पूर्ण कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यह एक दिन, चार बड़े मंच, और एक बड़ा उद्देश्य — आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक नीति तय करना।
इन बैठकों में पाकिस्तान पर कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर कार्रवाई के फैसलों पर मुहर लग सकती है। सूत्रों की मानें तो पिछली CCS बैठक के बाद पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों में कटौती का जो फैसला लिया गया था, वह सिर्फ शुरुआत थी।
पहलगाम हमले के बाद एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सेना को ऑपरेशनल रेडीनेस मोड में रखा गया है। सैटेलाइट इमेजिंग, ड्रोन निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक इंटरसेप्ट्स के जरिए पीओके में लॉन्चपैड्स पर नज़र रखी जा रही है। एनआईए की 45 सदस्यीय टीम घटनास्थल की वीडियोग्राफी से लेकर डिजिटल साक्ष्यों तक, हर एंगल से जांच में जुटी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 24 अप्रैल को स्पष्ट शब्दों में कहा था कि "आतंकियों की बची-खुची जमीन को मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है।" इस बयान के बाद मंगलवार की बैठक में सेना को दी गई छूट, और आज होने वाली बैठकों का संयोजन यह साफ संकेत देता है कि भारत अब जवाबी कार्रवाई की ओर बढ़ चुका है।
आज की बैठकें सिर्फ नीतिगत चर्चा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के सबसे अहम मोड़ पर लिया जाने वाला ठोस निर्णय हैं। सेना को दी गई स्वतंत्रता, राजनीतिक और आर्थिक समितियों की भूमिका और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की रणनीति—सभी मिलकर भारत को आतंक के खिलाफ एक नए युग में प्रवेश कराते हैं।
अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है। लेकिन इस बार भारत सिर्फ वार्तालाप का मंच नहीं, बल्कि निर्णायक कार्रवाई की तैयारी के साथ खड़ा है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।