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हाइनीवट्रेप यूथ काउंसिल ने समान नागरिक संहिता लागू न करने का किया आग्रह

None • 2023-07-05 16:02:14
हाइनीवट्रेप यूथ काउंसिल ने समान नागरिक संहिता लागू न करने का किया आग्रह

शिलांग । हाइनीवट्रेप यूथ काउंसिल(HYC) ने बुधवार को भारत के विधि आयोग से आग्रह किया कि मेघालय (Meghalaya) में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू नहीं करें, क्योंकि यह प्रचलित रीति-रिवाजों एवं प्रथाओं को कमजोर कर देगा।
एचवाईसी ने कहा, "यूसीसी छठी अनुसूची के प्रावधानों और स्वायत्त जिला परिषदों की शक्तियों को कमजोर कर देगा। यह भारत के संघीय ढांचे का उल्लंघन करेगा और धार्मिक मामलों में भी हस्तक्षेप करेगा।"

एचवाईसी ने विधि आयोग को सुझाव दिया कि उन्हें सिफारिश करनी चाहिए कि केंद्र सरकार को मेघालय में स्वायत्त जिला परिषदों की वित्तीय सहायता करनी चाहिए और विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों को सुव्यवस्थित करें। इसके अलावा, कानून बनाने के लिए मार्गदर्शन में मदद करनी चाहिए।
मेघालय संविधान की छठी अनुसूची के प्रावधानों के अंतर्गत आता है। राज्य में खासी, जैन्तिया और गारो हिल्स तीन जिला परिषदें हैं। परिषद ने कहा, "राज्य के मूल निवासियों को अभी भी इन स्वायत्त जिला परिषदों पर भरोसा है और वे अभी भी विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों पर रीति-रिवाजों और परंपराओं द्वारा खुद पर शासन करना चाहते हैं।"

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एचवाईसी ने कहा कि विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने, रखरखाव, संरक्षकता, सह-पालन आदि जैसे व्यक्तिगत कानून भी राज्य सरकार की शक्तियां हैं। उन्होंने कहा कि मेघालय ने पहले से ही विवाह, विरासत आदि पर विभिन्न कानून बनाए हैं और ये राज्य के लोगों द्वारा कार्यान्वित और स्वीकार किया गया है। एचवाईसी ने कहा, "अगर भारत की संसद यूसीसी लाती है, तो यह संविधान में परिकल्पित संघीय ढांचे का उल्लंघन होगा, जो कि अनावश्यक है।" उन्होंने कहा कि भारत बहु धर्मों वाला देश है और संविधान हर धर्म और उसके अद्वितीय मानदंडों की सुरक्षा की गारंटी देता है।

एचवाईसी ने कहा, “मेघालय एक ऐसा राज्य है, जहां बहुसंख्यक ईसाई हैं। यहां ऐसे लोग भी हैं, जो अन्य धर्मों के साथ-साथ हिंदू, मुस्लिम आदि पारंपरिक धर्मों का पालन करते हैं।” उन्होंने कहा, “हमारी राय है कि यूसीसी विवाह, तलाक आदि जैसे मामलों पर धार्मिक मानदंडों को कमजोर कर देगा। हमें लगता है कि इन धर्मों को अपने स्वयं के अद्वितीय मानदंडों का पालन करने की अनुमति देकर प्रत्येक धर्म का सम्मान करना किसी भी सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है। इन मानदंडों को प्रतिस्थापित करके नहीं।” इसके अलावा, संगठन ने कहा कि भारत के 21वें विधि आयोग ने 2018 में अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि यूसीसी न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय है, इसलिए केंद्र को इसे लागू नहीं करना चाहिए।

#ShahTimes

शिलांग । हाइनीवट्रेप यूथ काउंसिल(HYC) ने बुधवार को भारत के विधि आयोग से आग्रह किया कि मेघालय (Meghalaya) में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू नहीं करें, क्योंकि यह प्रचलित रीति-रिवाजों एवं प्रथाओं को कमजोर कर देगा।
एचवाईसी ने कहा, "यूसीसी छठी अनुसूची के प्रावधानों और स्वायत्त जिला परिषदों की शक्तियों को कमजोर कर देगा। यह भारत के संघीय ढांचे का उल्लंघन करेगा और धार्मिक मामलों में भी हस्तक्षेप करेगा।"

एचवाईसी ने विधि आयोग को सुझाव दिया कि उन्हें सिफारिश करनी चाहिए कि केंद्र सरकार को मेघालय में स्वायत्त जिला परिषदों की वित्तीय सहायता करनी चाहिए और विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों को सुव्यवस्थित करें। इसके अलावा, कानून बनाने के लिए मार्गदर्शन में मदद करनी चाहिए।
मेघालय संविधान की छठी अनुसूची के प्रावधानों के अंतर्गत आता है। राज्य में खासी, जैन्तिया और गारो हिल्स तीन जिला परिषदें हैं। परिषद ने कहा, "राज्य के मूल निवासियों को अभी भी इन स्वायत्त जिला परिषदों पर भरोसा है और वे अभी भी विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों पर रीति-रिवाजों और परंपराओं द्वारा खुद पर शासन करना चाहते हैं।"

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एचवाईसी ने कहा कि विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने, रखरखाव, संरक्षकता, सह-पालन आदि जैसे व्यक्तिगत कानून भी राज्य सरकार की शक्तियां हैं। उन्होंने कहा कि मेघालय ने पहले से ही विवाह, विरासत आदि पर विभिन्न कानून बनाए हैं और ये राज्य के लोगों द्वारा कार्यान्वित और स्वीकार किया गया है। एचवाईसी ने कहा, "अगर भारत की संसद यूसीसी लाती है, तो यह संविधान में परिकल्पित संघीय ढांचे का उल्लंघन होगा, जो कि अनावश्यक है।" उन्होंने कहा कि भारत बहु धर्मों वाला देश है और संविधान हर धर्म और उसके अद्वितीय मानदंडों की सुरक्षा की गारंटी देता है।

एचवाईसी ने कहा, “मेघालय एक ऐसा राज्य है, जहां बहुसंख्यक ईसाई हैं। यहां ऐसे लोग भी हैं, जो अन्य धर्मों के साथ-साथ हिंदू, मुस्लिम आदि पारंपरिक धर्मों का पालन करते हैं।” उन्होंने कहा, “हमारी राय है कि यूसीसी विवाह, तलाक आदि जैसे मामलों पर धार्मिक मानदंडों को कमजोर कर देगा। हमें लगता है कि इन धर्मों को अपने स्वयं के अद्वितीय मानदंडों का पालन करने की अनुमति देकर प्रत्येक धर्म का सम्मान करना किसी भी सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है। इन मानदंडों को प्रतिस्थापित करके नहीं।” इसके अलावा, संगठन ने कहा कि भारत के 21वें विधि आयोग ने 2018 में अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि यूसीसी न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय है, इसलिए केंद्र को इसे लागू नहीं करना चाहिए।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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