ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिकी दबाव में नहीं खुलेगा। हालिया सैन्य घटनाओं और दोनों देशों के आरोप-प्रत्यारोप ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है, जिसका असर वैश्विक तेल बाज़ार और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।
📍 Location: मॉस्को / तेहरान
📰 Date: 09 जुलाई 2026
✍️ Apurva Choudhary
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का कड़ा रुख
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य किसी बाहरी दबाव में नहीं बल्कि केवल ईरान की शर्तों पर ही खोला जाएगा। उनका बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिर से बढ़ता दिखाई दे रहा है।
अमेरिका को सीधी चेतावनी
ग़ालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को यह समझ लेना चाहिए कि सैन्य दबाव और धमकियों की कीमत चुकानी पड़ती है। उनके अनुसार यदि ईरान पर हमला किया गया तो उसका जवाब भी दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में तनाव बढ़ाने से किसी पक्ष को लाभ नहीं होगा।
कई इलाकों में विस्फोटों की खबर
ईरानी मीडिया के अनुसार अबू मूसा द्वीप, बंदर अब्बास, चाबहार, जास्क और अन्य तटीय क्षेत्रों में विस्फोटों की सूचना मिली है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि कुछ स्थानों पर वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय की गई।
हालांकि इन घटनाओं के सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
अमेरिका और ईरान के दावे
अमेरिकी केंद्रीय कमान का कहना है कि उसकी कार्रवाई वाणिज्यिक जहाजों पर कथित हमलों के जवाब में की गई। वहीं ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने दोनों देशों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन किया है और इसके जवाब में क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
दोनों देशों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और स्थिति लगातार बदल रही है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, शिपिंग लागत और ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ सकता है।
भारत सहित कई ऊर्जा आयातक देश इस क्षेत्र की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
आगे क्या?
फिलहाल दोनों देशों की ओर से सख्त बयानबाज़ी जारी है। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते तो क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कोशिश होगी कि समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो तथा तनाव को बातचीत के जरिए कम किया जाए।