एयर चीफ एपी सिंह के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के रडार, कमांड सेंटर, रनवे और हैंगर प्रभावित हुए। उन्होंने 5 लड़ाकू विमानों को गिराने का भी दावा किया।
📍
नई दिल्ली
🗓️
3 अक्टूबर 2025
✍️
Mohd Naved
ऑपरेशन सिंदूर में क्या हुआ था
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव ने एक नए स्तर की एयर वॉर रणनीति को सामने रखा। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बाद में इस अभियान से जुड़े कई अहम ऑपरेशनल विवरण साझा किए।
उनके मुताबिक भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर मौजूद सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया और पाकिस्तानी एयर डिफेंस नेटवर्क को चुनौती दी। एपी सिंह ने रडार लोकेशन, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, रनवे और हैंगर को हुए नुकसान का उल्लेख किया।
इन बयानों को समझते समय एक अहम बात जरूरी है। सामने आए आंकड़े भारतीय वायुसेना प्रमुख के बयान पर आधारित हैं। इन्हें पाकिस्तान के कुल सैन्य नुकसान का स्वतंत्र और पूर्ण आकलन नहीं माना जाना चाहिए।
5 लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा
एपी सिंह के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान के 5 लड़ाकू विमान हवा में मार गिराए।
उन्होंने इनमें F-16 और JF-17 जैसे लड़ाकू विमानों का उल्लेख किया। इसके अलावा एक बड़े एयरबोर्न प्लेटफॉर्म को लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से निशाना बनाए जाने की बात भी सामने आई।
एयर चीफ के बयान के मुताबिक इस कार्रवाई में एयर डिफेंस सिस्टम और लंबी दूरी की मिसाइल तकनीक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यहां भी आंकड़ों की प्रकृति स्पष्ट रखना जरूरी है। 5 लड़ाकू विमानों को गिराए जाने का आंकड़ा भारतीय वायुसेना प्रमुख का आधिकारिक दावा है। अलग-अलग पक्षों के सार्वजनिक दावों में नुकसान के आंकड़ों को लेकर अंतर रहा है।
पाकिस्तान के रडार और कमांड सेंटर
एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की एयर डिफेंस संरचना पर कार्रवाई का भी उल्लेख किया।
उनके अनुसार कम से कम 4 रडार लोकेशन को नष्ट किया गया। इसके अलावा 2 कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई।
एयर वॉर में रडार नेटवर्क की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। रडार किसी इलाके में आने वाले विमानों और अन्य हवाई खतरों की निगरानी में मदद करते हैं। कमांड एंड कंट्रोल सेंटर इस सूचना को सैन्य प्रतिक्रिया से जोड़ते हैं।
इसलिए किसी एयर डिफेंस नेटवर्क पर हमला केवल एक सैन्य प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं होता। इससे निगरानी, कमांड और प्रतिक्रिया की पूरी श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
रनवे और हैंगर भी निशाने पर
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने पाकिस्तान के सैन्य एयरबेस पर मौजूद रनवे और हैंगर को भी नुकसान पहुंचने की बात कही।
उपलब्ध विवरण के अनुसार 2 रनवे और 3 हैंगर को नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया।
हैंगर में लड़ाकू विमानों और दूसरे सैन्य एयरक्राफ्ट की पार्किंग, रखरखाव और तैयारी होती है। इसलिए हैंगर पर हमला एयरबेस की ऑपरेशनल क्षमता को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर देखा जाता है।
रनवे पर कार्रवाई का उद्देश्य भी एयरबेस से विमानों की आवाजाही को बाधित करना हो सकता है। हालांकि किसी विशिष्ट एयरबेस की क्षमता कितने समय तक प्रभावित रही, इसका आकलन अलग-अलग तकनीकी और सैटेलाइट प्रमाणों पर निर्भर करता है।
एयर डिफेंस में S-400 और लंबी दूरी की मिसाइलों की भूमिका
एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में S-400 और लंबी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइल प्रणालियों की भूमिका पर भी जोर दिया था।
उनके अनुसार लंबी दूरी के रडार और मिसाइल सिस्टम ने भारतीय पक्ष को पाकिस्तानी विमानों के खिलाफ उनकी अपनी सीमा के भीतर खतरा पैदा करने की क्षमता दी।
इसका रणनीतिक महत्व इसलिए है क्योंकि आधुनिक एयर वॉर में केवल लड़ाकू विमानों की संख्या निर्णायक नहीं होती। सेंसर, रडार, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, कमांड नेटवर्क और रियल टाइम इंटेलिजेंस मिलकर एयर डिफेंस की प्रभावशीलता तय करते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भारतीय पक्ष की रणनीति में इसी नेटवर्क आधारित क्षमता को महत्वपूर्ण बताया गया।
भारतीय क्षेत्र में हवाई खतरे को रोकने का दावा
एपी सिंह ने भारतीय इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका का भी उल्लेख किया।
उनके अनुसार भारतीय एयर डिफेंस नेटवर्क ने पाकिस्तान की ओर से आने वाले खतरों को भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने में भूमिका निभाई। उन्होंने ऐसे विमानों और हथियारों को हवा में ही रोकने की बात कही जो भारतीय क्षेत्र के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।
यहां इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस का अर्थ अलग-अलग सेंसर और हथियार प्रणालियों के बीच समन्वय से है।
इस तरह की व्यवस्था में रडार से मिली जानकारी को कमांड सिस्टम तक पहुंचाया जाता है और फिर उपयुक्त एयर डिफेंस हथियार या एयरक्राफ्ट को प्रतिक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
ऑपरेशन सिंदूर का बड़ा सैन्य संदर्भ
ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं थी। यह भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में बढ़े सैन्य तनाव की व्यापक कड़ी थी।
भारतीय पक्ष ने अभियान को आतंकवादी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई के रूप में पेश किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां बढ़ीं और हवाई तथा ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं।
इसी दौरान एयर डिफेंस नेटवर्क की भूमिका भी प्रमुख हो गई।
भारत के लिए चुनौती दो स्तरों पर थी। पहला, पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठानों पर सटीक कार्रवाई। दूसरा, भारतीय सैन्य और नागरिक प्रतिष्ठानों को जवाबी हमलों से सुरक्षित रखना।
300 किलोमीटर दूर एयरबोर्न प्लेटफॉर्म को निशाना बनाने का दावा
एपी सिंह के बयानों में एक बड़े एयरबोर्न प्लेटफॉर्म का भी उल्लेख आया।
उनके मुताबिक लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से एक एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम या इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस भूमिका वाले विमान को निशाना बनाया गया।
ऐसे एयरक्राफ्ट आधुनिक एयर वॉर में महत्वपूर्ण सेंसर प्लेटफॉर्म होते हैं। वे दूर से हवाई गतिविधियों की निगरानी और कमांड नेटवर्क को सूचना उपलब्ध कराने में भूमिका निभाते हैं।
इसलिए ऐसे प्लेटफॉर्म को नुकसान पहुंचाने का दावा एयर डिफेंस और सेंसर नेटवर्क के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि इस तरह के ऑपरेशनल दावों की पूरी तकनीकी पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं से करना कठिन होता है।
पाकिस्तान के एयरबेस पर असर
एपी सिंह ने पाकिस्तान के कुछ एयरबेस और सैन्य प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए कहा था कि कार्रवाई के बाद वहां मौजूद सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित हुआ।
बताए गए नुकसान में रडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, रनवे और हैंगर शामिल थे। कुछ स्थानों पर लड़ाकू विमानों और दूसरे सैन्य प्लेटफॉर्म को नुकसान पहुंचने की बात भी कही गई।
इन दावों का महत्व इस वजह से है क्योंकि एयरबेस किसी भी आधुनिक एयर फोर्स के लिए लॉजिस्टिक्स, ऑपरेशनल तैयारी और sortie generation का आधार होते हैं।
लेकिन किसी एयरबेस के क्षतिग्रस्त होने और उसके पूरी तरह निष्क्रिय होने के बीच अंतर है। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर दोनों को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।
भारत की रणनीति में दूरी और एयर डिफेंस क्यों अहम रहे
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी एपी सिंह की टिप्पणियों में लंबी दूरी की मिसाइल और एयर डिफेंस क्षमता पर लगातार जोर दिखाई देता है।
उनके मुताबिक भारतीय सिस्टम की रेंज ने पाकिस्तानी विमानों को अपनी हथियार छोड़ने की प्रभावी सीमा तक पहुंचने से रोकने में मदद की।
आधुनिक एयर वॉर में इसे stand-off capability के संदर्भ में देखा जाता है। इसका मतलब है कि हमला करने वाली शक्ति अपने प्लेटफॉर्म को विरोधी की सीधी मारक क्षमता से दूर रखते हुए हथियार का इस्तेमाल करती है।
इसके साथ लंबी दूरी के सेंसर और एयर डिफेंस सिस्टम जुड़ जाएं तो विरोधी विमान के लिए सुरक्षित दूरी बनाए रखना अधिक कठिन हो जाता है।
क्या ऑपरेशन सिंदूर ने युद्ध की रणनीति बदली
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सैन्य नेतृत्व ने आधुनिक युद्ध में ड्रोन, एयर डिफेंस, लंबी दूरी के हथियार और नेटवर्क आधारित ऑपरेशंस की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की।
एपी सिंह ने भी बाद के वक्तव्यों में इस बात पर जोर दिया कि भविष्य का युद्ध अधिक एकीकृत होगा और अलग-अलग सेनाओं तथा एजेंसियों के बीच तालमेल महत्वपूर्ण रहेगा।
इसका अर्थ है कि भविष्य के संघर्ष में केवल लड़ाकू विमान या टैंक की संख्या से परिणाम तय नहीं होंगे। सेंसर नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, मिसाइल डिफेंस, ड्रोन और कमांड सिस्टम का एक साथ काम करना अहम होगा।
सबसे अहम सवाल, आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि कितनी है
ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में सबसे जरूरी पत्रकारिता सावधानी नुकसान के आंकड़ों को लेकर है।
भारतीय वायुसेना प्रमुख ने 5 पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को गिराने और कई सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाने की जानकारी दी। ये भारतीय सैन्य नेतृत्व के आधिकारिक बयान हैं।
दूसरी तरफ युद्ध या सैन्य संघर्ष के दौरान दोनों पक्ष अपने नुकसान और दूसरे पक्ष के नुकसान को अलग-अलग तरीके से पेश कर सकते हैं। इसलिए किसी भी संख्या को अंतिम और पूर्ण तथ्य के तौर पर पेश करने से पहले स्वतंत्र प्रमाण जरूरी होते हैं।
शाह टाइम्स के लिए रिपोर्टिंग में इस अंतर को स्पष्ट रखना जरूरी है। इससे पाठक को दावा, प्रमाण और स्वतंत्र पुष्टि के बीच फर्क समझने में मदद मिलती है।
आगे क्या मायने रखता है
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक सबक एयर डिफेंस और लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता का विस्तार है।
साथ ही स्वदेशी लड़ाकू विमान, रडार, मिसाइल, ड्रोन और कमांड नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
एयर चीफ एपी सिंह ने भविष्य के युद्ध को अधिक integrated और technology-driven बताया है। इसका संकेत साफ है कि आने वाले वर्षों में भारतीय वायुशक्ति की तैयारी केवल नए लड़ाकू विमानों की खरीद तक सीमित नहीं रहेगी।
सेंसर से लेकर मिसाइल और कमांड नेटवर्क तक पूरी kill chain को मजबूत करना रणनीतिक प्राथमिकता बनी रहेगी।
ऑपरेशन सिंदूर के बारे में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के बयानों ने भारत की एयर वॉर रणनीति के कई पहलुओं को सामने रखा है।
उनके मुताबिक पाकिस्तान के रडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, रनवे और हैंगर को निशाना बनाया गया। उन्होंने 5 पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को हवा में गिराने और लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से एक बड़े एयरबोर्न प्लेटफॉर्म को निशाना बनाए जाने का भी दावा किया।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल नुकसान के आंकड़े नहीं हैं। यह ऑपरेशन लंबी दूरी की एयर डिफेंस, सटीक स्ट्राइक, सेंसर नेटवर्क और एकीकृत सैन्य कमांड की बढ़ती भूमिका को भी सामने लाता है।
फिर भी सैन्य दावों और स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। यही अंतर ऑपरेशन सिंदूर की वास्तविक सैन्य तस्वीर को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।