सरकार बनी तो पुरानी पेंशन लागू करेंगे, अखिलेश यादव ने 2027 चुनाव से पहले किया ऐलान
Wasi Siddiqui
•
2026-09-28 14:55:23
लखनऊ में अखिलेश यादव ने कहा कि सपा की सरकार बनने पर पुरानी पेंशन योजना लागू की जाएगी। उन्होंने वित्त विभाग के साथ मंथन और कर्मचारियों की मांग पूरी करने की बात कही।
📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश
🗓️ 28 सितंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
सरकार बनने पर पुरानी पेंशन लागू करने का दावा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी कर्मचारियों से जुड़े पुरानी पेंशन योजना यानी OPS का मुद्दा फिर चर्चा में है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर पुरानी पेंशन योजना लागू की जाएगी। यह बयान फिलहाल पार्टी की राजनीतिक घोषणा और चुनावी वादे के रूप में सामने आया है।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार बनने के बाद पुरानी पेंशन योजना को लागू करने के लिए वित्त विभाग के साथ मंथन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके जरिए कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में काम किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में NPS की मौजूदा व्यवस्था
उत्तर प्रदेश में 1 अप्रैल 2005 से नई पेंशन व्यवस्था यानी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली लागू है। हालांकि, प्रदेश सरकार ने कुछ ऐसे कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन का विकल्प उपलब्ध कराया है जिनकी भर्ती या नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन अथवा अधिसूचना NPS लागू होने से पहले जारी हुई थी। राज्य विधान परिषद में उपलब्ध आधिकारिक जवाब के अनुसार, इस संबंध में 2024 और 2025 में शासनादेश और स्पष्टीकरण जारी किए गए थे।
इसलिए अखिलेश यादव की घोषणा का मौजूदा सरकारी व्यवस्था से अलग व्यापक राजनीतिक आशय है। मौजूदा व्यवस्था में OPS सभी नए राज्य कर्मचारियों के लिए सामान्य विकल्प के रूप में लागू नहीं है। अखिलेश यादव ने अपनी प्रस्तावित सरकार के संदर्भ में OPS लागू करने की बात कही है।
अखिलेश ने वित्तीय मंथन की बात कही
पुरानी पेंशन योजना और NPS के बीच बड़ा अंतर वित्तीय संरचना का है। OPS में सेवानिवृत्ति के बाद निर्धारित पेंशन व्यवस्था रहती है, जबकि NPS अंशदान आधारित व्यवस्था है। इसलिए OPS की व्यापक बहाली का सवाल राज्य के दीर्घकालिक वित्तीय दायित्व से भी जुड़ता है।
केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में लोकसभा में कहा था कि भारत सरकार के स्तर पर OPS को दोबारा बहाल करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। केंद्र ने इसकी वजह सरकारी राजकोष पर पड़ने वाले दीर्घकालिक वित्तीय दायित्व को बताया था। यह जवाब केंद्र सरकार की व्यवस्था से संबंधित है और उत्तर प्रदेश की किसी भावी राज्य सरकार के राजनीतिक फैसले का प्रत्यक्ष निर्णय नहीं है।
कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है OPS
पुरानी पेंशन योजना सरकारी कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति आय से जुड़ा प्रमुख मुद्दा रही है। OPS के समर्थक इसे निश्चित पेंशन से जोड़ते हैं, जबकि NPS अंशदान और निवेश आधारित व्यवस्था पर टिकी है।
उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा लंबे समय से कर्मचारी संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच चर्चा में रहा है। राज्य विधान परिषद के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी OPS बहाली को लेकर कर्मचारी संगठनों की ओर से सरकार को भेजे गए पत्रों का उल्लेख है।
अखिलेश ने शिक्षामित्रों और मदरसों पर भी घोषणा की
लखनऊ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने केवल पेंशन का मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने की बात कही। उनके अनुसार इससे बंद हो चुके स्कूलों को दोबारा संचालित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने मदरसा शिक्षकों के बकाया वेतन और आधुनिक मदरसा शिक्षकों से जुड़े मामलों के समाधान की भी बात कही। संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं को लेकर भी उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया। ये सभी घोषणाएं उनके 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा हैं।
घोषणा और क्रियान्वयन में अंतर
OPS को लागू करने की घोषणा और उसके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच नीतिगत और वित्तीय प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। सरकार बनने की स्थिति में नियमों में बदलाव, वित्तीय प्रभाव का आकलन, कर्मचारियों की पात्रता और मौजूदा NPS व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों पर फैसला करना होगा।
यह भी महत्वपूर्ण है कि अखिलेश यादव ने अपने बयान में वित्त विभाग के साथ मंथन की बात कही है। इसलिए फिलहाल इसे लागू हो चुकी सरकारी नीति के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह समाजवादी पार्टी की ओर से घोषित राजनीतिक प्रतिबद्धता है।
पुरानी पेंशन पर राष्ट्रीय स्तर की स्थिति
अगस्त 2026 में लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, केंद्र सरकार ने OPS की बहाली के लिए कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं बताया था। उसी जवाब में कुछ राज्यों द्वारा NPS से OPS की ओर लौटने की जानकारी भी दर्ज की गई थी।
यह स्थिति उत्तर प्रदेश के राजनीतिक संदर्भ को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। राज्य स्तर पर कोई पार्टी OPS लागू करने का वादा कर सकती है, लेकिन वास्तविक नीति के लिए राज्य सरकार की प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रिया जरूरी होगी।
अब आगे क्या
अखिलेश यादव की घोषणा के बाद OPS 2027 के चुनावी विमर्श में एक अहम मुद्दा बन सकता है। आने वाले समय में इसकी वित्तीय रूपरेखा, पात्र कर्मचारियों की संख्या, NPS से संबंधित व्यवस्था और संभावित प्रशासनिक प्रक्रिया पर अधिक स्पष्टता महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि अखिलेश यादव ने सत्ता में आने की स्थिति में पुरानी पेंशन योजना लागू करने का सार्वजनिक वादा किया है। इसे वर्तमान सरकारी नीति या लागू योजना के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
उत्तर प्रदेश में OPS को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने सरकार बनने पर पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा की है और इसके लिए वित्त विभाग के साथ मंथन की बात कही है। दूसरी ओर, मौजूदा राज्य व्यवस्था में 1 अप्रैल 2005 से NPS लागू है और कुछ विशेष मामलों में पहले की भर्ती प्रक्रिया वाले कर्मचारियों को OPS का विकल्प दिया गया है।
इसलिए अभी OPS बहाली को भविष्य की राजनीतिक प्रतिबद्धता के रूप में देखना उचित है। इसके वास्तविक क्रियान्वयन की तस्वीर सरकार बनने की स्थिति में नीतिगत फैसलों और वित्तीय प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
वीडियो देखें
ADVERTISEMENT
Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।