आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में परीक्षा हॉल की सीसीटीवी फुटेज सामने आई है। अपराध शाखा परीक्षा के बाद उनकी गतिविधियों और मामले से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है।
📍 मुंबई
🗓️ 22 सितंबर 2026
✍️ वसी सिद्दीकी
परीक्षा हॉल की सीसीटीवी फुटेज ने आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले की जांच को नया आधार दिया है। 18 सितंबर 2026 को परीक्षा के दौरान हुई घटनाओं की रिकॉर्डिंग अब अपराध शाखा की पड़ताल का अहम हिस्सा है। परिवार के आरोप, संस्थान की सफाई और फैकल्टी फोरम के पक्ष को अलग-अलग देखा जा रहा है।
परीक्षा के दौरान क्या हुआ
साहिल वाकोडे ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग में दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, परीक्षा के दौरान उनके पास मोबाइल फोन होने को लेकर कार्रवाई हुई। आईआईटी बॉम्बे की शुरुआती जानकारी में प्रश्नपत्र को चैटजीपीटी पर अपलोड कर जवाब तलाशने का दावा किया गया था। बाद में संस्थान ने इस भाषा पर माफी मांगते हुए कहा कि जांच पूरी होने से पहले मौत से पहले की परिस्थितियों पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं था।
सीसीटीवी फुटेज में 18 सितंबर को करीब 12:30 बजे से 12:45 बजे तक की अवधि दर्ज है। रिपोर्ट के मुताबिक, साहिल से पूछताछ हुई और उन्हें परीक्षा हॉल से बाहर ले जाते हुए देखा गया।
अपराध शाखा की पड़ताल
मामले की जांच मुंबई अपराध शाखा कर रही है। टीम परीक्षा हॉल के साथ कैंपस और हॉस्टल क्षेत्र की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग भी खंगाल रही है, ताकि परीक्षा स्थल से हॉस्टल तक घटनाओं की क्रमवार कड़ी सामने आ सके। उपलब्ध जांच जानकारी के अनुसार, साहिल करीब 1:25 बजे हॉस्टल के कमरे में पहुंचे थे।
18 सितंबर को हॉस्टल में मौत
साहिल 18 सितंबर 2026 को अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे। इसके बाद आईआईटी बॉम्बे परिसर में विरोध प्रदर्शन हुए। परिवार ने जाति आधारित उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए। पुलिस ने परिवार की शिकायत के आधार पर संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज किया और जांच बाद में अपराध शाखा को सौंप दी गई। आरोप अभी जांचाधीन हैं।
आईआईटी बॉम्बे की सफाई
संस्थान ने जातीय भेदभाव से जुड़े आरोपों से इनकार किया है। आईआईटी बॉम्बे और उसके एससी/एसटी प्रकोष्ठ के अनुसार, साहिल की ओर से ऐसी शिकायत दर्ज कराने का कोई रिकॉर्ड नहीं था। 22 सितंबर को फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रोफेसर राजकुमार पंत ने भी यही बात दोहराई।
प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का विवाद
मामले में परीक्षा निरीक्षक रहे प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का नाम भी सामने आया है। परिवार ने उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं और प्राथमिकी में उनका नाम शामिल है। आईआईटी बॉम्बे ने उन्हें प्रशासनिक पद से अस्थायी रूप से मुक्त किया था, जबकि फैकल्टी फोरम ने कहा कि उन्होंने संस्थागत प्रक्रिया के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाई।
फैकल्टी फोरम का पक्ष
फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर डूला के समर्थन में बयान जारी किया और निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई। उसका कहना है कि परीक्षा अनुशासन लागू करना शिक्षकों की जिम्मेदारी है और जांच पूरी होने से पहले दोष तय नहीं किया जाना चाहिए।
छात्रों का विरोध और 18 मांगें
साहिल की मौत के बाद छात्रों ने कई मांगों को लेकर विरोध किया। रिपोर्टों के मुताबिक, आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केडारे ने छात्रों से बैठक कर 18 मांगों वाले चार्टर पर हस्ताक्षर किए। संस्थान ने अपनी शुरुआती प्रतिक्रिया के लिए भी माफी जारी की।
सीसीटीवी क्यों महत्वपूर्ण है
इस फुटेज से घटनाओं का समय और क्रम स्थापित करने में मदद मिल सकती है। फिर भी सीसीटीवी अकेले मौत के कारण का अंतिम निर्धारण नहीं करता। इसे गवाहों के बयान, संस्थागत रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और पुलिस जांच के साथ मिलाकर देखा जाना होगा।
मुख्य विवाद क्या है
मामले में दो प्रमुख दावे सामने हैं। परिवार जातीय उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना की बात कर रहा है। दूसरी ओर, संस्थान और फैकल्टी फोरम शिकायत के रिकॉर्ड से इनकार करते हुए परीक्षा प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बता रहे हैं। इन दावों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।
आगे क्या होगा
अपराध शाखा अब परीक्षा हॉल से हॉस्टल तक की गतिविधियों की कड़ी, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और संबंधित बयानों की समीक्षा कर रही है। जांच पूरी होने तक किसी भी आरोप को प्रमाणित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। फिलहाल 18 सितंबर 2026 की घटनाएं, सीसीटीवी फुटेज और उससे जुड़ी संस्थागत कार्रवाइयां इस मामले की आगे की पड़ताल का केंद्र हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।