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IMF से कर्ज और आतंक की नर्सरी: भारत की चेतावनी की अनदेखी,पाकिस्तान को एक और राहत

None • 2025-05-10 09:10:48
IMF से कर्ज और आतंक की नर्सरी: भारत की चेतावनी की अनदेखी,पाकिस्तान को एक और राहत


IMF से पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की राहत, भारत ने जताई आपत्ति


IMF द्वारा पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की मदद पर भारत ने विरोध जताते हुए कहा कि यह राशि आतंकियों के हाथों में जा सकती है। जानिए भारत की आपत्ति, पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका प्रभाव।


एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने के नाम पर 1 अरब डॉलर की राहत राशि मंजूर की है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये रकम सही दिशा में जाएगी या एक बार फिर आतंक की नर्सरी में खाद-पानी का काम करेगी?

भारत ने स्पष्ट शब्दों में IMF को चेताया कि पाकिस्तान का इतिहास कर्ज के दुरुपयोग से भरा रहा है—चाहे वो आंतरिक सुधारों में विफलता हो या सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए संसाधनों का प्रयोग। इसके बावजूद, IMF की बोर्ड बैठक में पाकिस्तान के पक्ष में बेलआउट मंजूर किया जाना न केवल भारत की आपत्तियों की अनदेखी है, बल्कि वैश्विक वित्तीय संस्थानों की साख पर भी सवाल खड़े करता है।

https://youtube.com/shorts/S23fRyGYU24?si=5gt_olxZfUf6eRWY

भारत ने इस कर्ज प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लेकर एक स्पष्ट संकेत दिया—आतंक को पालने वालों को आर्थिक सहूलियत देना, वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है। साथ ही भारत ने IMF की एक रिपोर्ट का हवाला भी दिया जिसमें पाकिस्तान को "too big to fail" करार दिया गया है, यानी जिस देश को बार-बार बचाया जा रहा है, उसकी जवाबदेही खत्म होती जा रही है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बयान—"भारत की रणनीति विफल हो गई"—एक तरह से इस बात की स्वीकारोक्ति है कि भारत की आपत्ति ने वैश्विक मंच पर हलचल जरूर पैदा की है। लेकिन सवाल यही है कि क्या आतंकवाद के पोषण में लगे राष्ट्र को बिना शर्त आर्थिक मदद देना तात्कालिक समाधान तो है, लेकिन दीर्घकालिक समस्या को और गहराने वाला कदम नहीं?

IMF जैसे वैश्विक वित्तीय संस्थानों को यह समझना होगा कि केवल आर्थिक संकट का समाधान पर्याप्त नहीं है; जब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति नहीं अपनाई जाएगी, तब तक ऐसे कर्ज अस्थायी राहत तो देंगे, लेकिन स्थायी असुरक्षा पैदा करेंगे। भारत की आपत्ति सिर्फ एक राष्ट्र का विरोध नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के प्रति गंभीर चेतावनी है।


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IMF से पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की राहत, भारत ने जताई आपत्ति


IMF द्वारा पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की मदद पर भारत ने विरोध जताते हुए कहा कि यह राशि आतंकियों के हाथों में जा सकती है। जानिए भारत की आपत्ति, पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका प्रभाव।


एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने के नाम पर 1 अरब डॉलर की राहत राशि मंजूर की है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये रकम सही दिशा में जाएगी या एक बार फिर आतंक की नर्सरी में खाद-पानी का काम करेगी?

भारत ने स्पष्ट शब्दों में IMF को चेताया कि पाकिस्तान का इतिहास कर्ज के दुरुपयोग से भरा रहा है—चाहे वो आंतरिक सुधारों में विफलता हो या सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए संसाधनों का प्रयोग। इसके बावजूद, IMF की बोर्ड बैठक में पाकिस्तान के पक्ष में बेलआउट मंजूर किया जाना न केवल भारत की आपत्तियों की अनदेखी है, बल्कि वैश्विक वित्तीय संस्थानों की साख पर भी सवाल खड़े करता है।

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भारत ने इस कर्ज प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लेकर एक स्पष्ट संकेत दिया—आतंक को पालने वालों को आर्थिक सहूलियत देना, वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है। साथ ही भारत ने IMF की एक रिपोर्ट का हवाला भी दिया जिसमें पाकिस्तान को "too big to fail" करार दिया गया है, यानी जिस देश को बार-बार बचाया जा रहा है, उसकी जवाबदेही खत्म होती जा रही है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बयान—"भारत की रणनीति विफल हो गई"—एक तरह से इस बात की स्वीकारोक्ति है कि भारत की आपत्ति ने वैश्विक मंच पर हलचल जरूर पैदा की है। लेकिन सवाल यही है कि क्या आतंकवाद के पोषण में लगे राष्ट्र को बिना शर्त आर्थिक मदद देना तात्कालिक समाधान तो है, लेकिन दीर्घकालिक समस्या को और गहराने वाला कदम नहीं?

IMF जैसे वैश्विक वित्तीय संस्थानों को यह समझना होगा कि केवल आर्थिक संकट का समाधान पर्याप्त नहीं है; जब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति नहीं अपनाई जाएगी, तब तक ऐसे कर्ज अस्थायी राहत तो देंगे, लेकिन स्थायी असुरक्षा पैदा करेंगे। भारत की आपत्ति सिर्फ एक राष्ट्र का विरोध नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के प्रति गंभीर चेतावनी है।


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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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