जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच गंभीर आरोप, 3 महिला पत्रकारों की शिकायतों की जांच क्राइम ब्रांच करेगी
महिला पत्रकारों की शिकायत पर बढ़ा विवाद, एसीपी के खिलाफ एफआईआर की मांग, राहुल गांधी ने गृह मंत्री को घेरा
दिल्ली पुलिस पर यौन उत्पीड़न के आरोपों से सियासी हलचल, आखिर शिकायतों पर अब आगे क्या होगा?
जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रदर्शन की कवरेज के दौरान 3 महिला पत्रकारों की शिकायतों ने पुलिस की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी है।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 4 अक्टूबर 2026
✍️ Asif Khan
राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शन की कवरेज के दौरान 3 महिला पत्रकारों द्वारा पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली पुलिस ने शिकायतें मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले को निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है। आरोपों की सत्यता पर अभी जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए किसी पुलिस अधिकारी की आपराधिक जिम्मेदारी इस स्तर पर स्थापित नहीं मानी जा सकती।
क्या है पूरा मामला?
3 अक्टूबर को नई दिल्ली इलाके में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान वहां कवरेज कर रही 3 महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतें दीं।
दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान के मुताबिक, नई दिल्ली जिले को तीनों शिकायतें मिलीं और उन्हें निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया।
एक पत्रकार ने क्या आरोप लगाया?
एक महिला पत्रकार की लिखित शिकायत के मुताबिक, वह प्रदर्शन के दौरान आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा और दूसरी महिला प्रदर्शनकारियों की हिरासत को कवर कर रही थीं।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि सवाल उठाने के दौरान एक पुलिस अधिकारी ने उनके शरीर को अनुचित तरीके से छुआ और उन्हें धक्का दिया। यह पत्रकार का आरोप है और फिलहाल जांच के अधीन है।
एक अन्य वीडियो पत्रकार ने भी अपनी शिकायत में पुलिसकर्मी द्वारा कथित तौर पर अनुचित शारीरिक संपर्क किए जाने का आरोप लगाया है। इस आरोप की भी जांच होनी है।
https://www.instagram.com/reel/DeEgSDiT8Of/?stkn=MTM5ZTAxaXo1dHJkYw==
एसीपी विवेक भगत के खिलाफ एफआईआर की मांग
कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के सौरभ दास ने एसीपी विवेक भगत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं कर रही थी और कार्रवाई की मांग को लेकर पत्रकार तथा प्रदर्शनकारी थाने के बाहर मौजूद रहे।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि एसीपी के खिलाफ लगाए गए आरोप इस समय जांच के दायरे में हैं। शिकायत या सार्वजनिक आरोप अपने आप दोष सिद्ध नहीं करते।
राहुल गांधी ने अमित शाह से मांगा जवाब
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मामले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा।
गांधी ने महिला पत्रकार की शिकायत और एफआईआर की मांग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी, पत्रकारों को घसीटे जाने और कैमरे छीने जाने के भी आरोप सामने आए हैं। ये दावे राहुल गांधी और प्रदर्शन से जुड़े पक्षों के आरोप हैं।
उन्होंने दिल्ली पुलिस के केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन होने का हवाला देते हुए गृह मंत्री से जवाब मांगा।
आइसा ने भी लगाए आरोप
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा ने भी आरोप लगाया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और वकीलों के साथ धक्का-मुक्की की और कई महिलाओं ने अनुचित तरीके से छुए जाने की शिकायत की।
इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और पुलिस की अंतिम प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
दिल्ली में प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में बदलाव के विरोध से जुड़ा है।
3 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बैरिकेडिंग को लेकर टकराव की स्थिति भी बनी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचाते हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सत्यापन प्रक्रिया का मकसद डुप्लीकेट, मृत या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना है।
3 अक्टूबर को 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई। इनमें नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण सहित कई लोग शामिल थे।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे अहम घटनाक्रम शिकायतों का क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर होना है।
जांच में शिकायतकर्ताओं के बयान, उपलब्ध वीडियो और दूसरे साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। जांच के निष्कर्ष सामने आने से पहले किसी आरोपी अधिकारी को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
यह मामला दो अलग मुद्दों को एक साथ सामने लाता है।
पहला, किसी विरोध-प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पुलिस की जिम्मेदारी।
दूसरा, उसी कार्रवाई को कवर कर रहे पत्रकारों, खासकर महिला पत्रकारों की सुरक्षा और उनके साथ पेशेवर व्यवहार सुनिश्चित करने की जवाबदेही।
दिल्ली पुलिस का शिकायतों को क्राइम ब्रांच के पास भेजना जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। लेकिन ट्रांसफर अपने आप आरोपों की पुष्टि नहीं करता।
इसी तरह राजनीतिक नेताओं और संगठनों की प्रतिक्रिया सार्वजनिक बहस का हिस्सा है, मगर उसे जांच के निष्कर्ष का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जांच कितनी स्वतंत्र, समयबद्ध और साक्ष्य-आधारित रहती है। आरोपों की गंभीरता और संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र को देखते हुए जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक जवाबदेही के लिहाज से अहम होंगे।